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एक युवराज के बदले मिल जाएंगी सूचीबद्घ कंपनियां हजार
सचिन मामबटा और अशोक जयवंत दिवासे /  February 17, 2015

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम जहां क्रिकेटर युवराज सिंह के लिए 16 करोड़ रुपये खर्च करेगी, वहीं उतनी रकम में एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज में 1,079 कंपनियां खरीदी जा सकती हैं। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसएई) में शामिल इन कंपनियों के बारे में यह बात अलग है कि शायद उनमें से कई का नाम आपने सुना भी न हो।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के इस ट्वेंटी 20 टूर्नामेंट में युवराज को अपने पाले में शामिल करने के लिए दिल्ली डेयरडेविल्स ने 16 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाई। दिलचस्प बात यह है कि इस बोली के बाद युवराज की यह कीमत बीएसई में सूचीबद्घ कुल 1,079 कंपनियों से भी अधिक हो गई। इस अनुमान में सिर्फ उन्हीं कंपनियों को शामिल किया गया है जिन्होंने नीलामी के दिन शेयर बाजार में कारोबार किया। साथ ही कंपनियों का मूल्य कुल बाजार पूंजीकरण पर आधारित है। ये कंपनियां बुनियादी ढांचा, वित्त, दवा, रसायन और सॉफ्टवेयर तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखती हैं।

बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियों में केसीएल इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स (13.7 करोड़ रुपये), डायमंट इन्फ्रा (6.69 करोड़ रुपये) और सनमित इन्फ्रा (5.17 करोड़ रुपये) शामिल हैं। वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों में वाईसागर फाइनैंस (4.81 करोड़ रुपये), लाइबोड्र्स फाइनैंस (4.80 करोड़ रुपये) और एक्सॉन फाइनैंस (4.35 करोड़ रुपये) शामिल हैं। दवा एवं रसायन कंपनियां, जिनमें संदु फार्मा (13.55 करोड़ रुपये), सम्राट फार्माकेम (7.94 करोड़ रुपये), लिंक फार्मा केम (6.66 करोड़ रुपये) जैसी कंपनियां शामिल हैं। वहीं सॉफ्टवेयर कंपनियों में बीटूबी सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज (13.35 करोड़ रुपये), कैलिफोर्निया सॉफ्टवेयर (8.47 करोड़ रुपये) और ऐस सॉफ्टवेयर (7.48 करोड़ रुपये) शामिल हैं। वास्तव में 51 कंपनियां ऐसी हैं, जिनकी हैसियत 1 करोड़ रुपये से कम है, जबकि 521 कंपनियों की हैसियत 5 करोड़ रुपये से कम है। साथ ही 10 करोड़ रुपये से कम हैसियत वाली 849 कंपनियां भी हैं।

सतर्कता बरतें निवेशक

एक निवेशक कार्यकर्ता ए पी बकलीवाल का कहना है कि ऐसी कंपनियां वे कंपनियां होती हैं, जिनकी बिक्री तो सीमित होती है लेकिन उनके शेयरों की कीमतें लगातार बढऩे पर होती हैं। उनका कहना है कि शेयरों की कीमतों में तेजी का यह रुख मुख्य रूप से अक्सर मालिकों द्वारा तय किया जाता है। निवेशक इन कंपनियों के शेयरों में तेजी के आकर्षण से इनकी ओर खिंचे चले आते हैं और जब परिचालक इन कंपनियों से बाहर आ जाते हैं तो निवेशकों के लिए अक्सर इन कंपनियों से निकलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, 'निवेशकों को इसे लेकर सतर्क रहना चाहिए। उन्हें कोई भी निवेश करने से पहले कंपनी के बुनियादी पहलुओं के साथ-साथ प्रबंधन की ईमानदारी पर भी गौर करना चाहिए।'

उन्होंने बताया कि उनमें से अधिकांश कंपनियां ऐसी गैर सूचीबद्घ कंपनियां होती हैं, जो सूचीबद्घ होने के लिए आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए जरूरी करोड़ों रुपये खर्च करने से परहेज करती हैं। मिसाल के तौर पर शिल्पा शेट्टïी और उनके पति राज कुंद्रा ने हिंदुस्तान सेफ्टी ग्लास इंडस्ट्रीज को खरीदा, जबकि बीएसई के पास मौजूद तिमाही आंकड़ों के अनुसार कंपनी की कोई बिक्री ही नहीं थी। कहा जा रहा है कि यह कंपनी उनके आभूषण कारोबार की होल्डिंग कंपनी के तौर पर काम करेगी।

एक स्वतंत्र निवेश सलाहकार एस पी तुलसियान ने बताया, 'ऐसी कंपनियों में निवेश को लेकर कारोबारी सुसंचालन और लेखा प्रक्रियाओं की कमी से जो सही तस्वीर नहीं दिखती, उसे देखते हुए इन कंपनियों में निवेश को लेकर जोखिम बना रहता है।' कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग में फंड मैनेजर (पीएमएस) पी फणी शेखर ने कहा कि जब छोटी और अपरिचित कंपनियों का मामला हो तो निवेशकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया, 'ये बहुत छोटी कंपनियां होती हैं। उन पर दांव लगाने में बड़ा जोखिम होता है। कई बार निवेशक इस विचार के साथ निवेश करते हैं कि कंपनी में वृद्घि की काफी संभावनाएं हैं लेकिन अनुभव यही बताता है कि इनमें से 90 फीसदी कंपनियां कभी अगला पड़ाव ही नहीं पार कर पातीं।' उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को निवेश करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अमुक कंपनी का वास्तव में अस्तित्व है भी या नहीं और क्या वह ऐसे कारोबार में लगी है, जिसे निवेशक समझता हो। उनका कहना है कि उचित जानकारी जुटाने और जोखिम को अच्छी तरह से समझने के बाद ही ऐसी कंपनियों में निवेश का फैसला करना चाहिए। 

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