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एमपीएसई में सूचीबद्घ कंपनियों का कारोबार बंद
स्नेहा पडियत / मुंबई February 04, 2015

मध्य प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज (एमपीएसई) और मद्रास स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) में सूचीबद्घ करीब 50 से ज्यादा ऐसी कंपनियां थीं, जिनका कारोबार नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर भी होता था लेकिन एनएसई ने इसके कारोबार पर स्थायी रूप से रोक लगा दी है। इसका मतलब यह हुआ कि अब इन कंपनियों का एनएसई पर कारोबार नहीं हो सकेगा।

एमएसई और एमपीएसई के बंद होने से इन कंपनियों के शेयरों के कारोबार पर रोक लगाई गई है। 6 जनवरी, 2015 को जारी परिपत्र के मुताबिक 30 जनवरी से इन कंपनियों का कारोबार नहीं होगा। एमपीएसई और एमएसई ने नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के साथ एक रणनीतिक गठजोड़ किया था, जिसके तहत इन एक्सचेंजों में सूचीबद्घ कंपनियों को एनएसई पर भी कारोबार करने की अनुमति थी। इन कंपनियों को एनएसई पर अलग से सूचीबद्घ नहीं कराया गया था।

एनएसई के प्रवक्ता ने कहा, 'एमएसई और एमपीएसई अब मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज नहीं रहे, ऐसे में इन कंपनियों के शेयरों का कारोबार करने पर रोक लगाने का निर्णय किया गया। लेकिन ये कंपनियां एक्सचेंज में सूचीबद्घता के लिए आवेदन कर सकती हैं।' उन्होंने कहा, 'इन दोनों एक्सचेंजों के जरिए जो कंपनियां आईं थीं, उनमें पांच पहले ही एक्सचेंज पर सूचीबद्घ हो चुकी हैं और उनके शेयर कारोबार के लिए उपलब्ध हैं, जबकि पांच अन्य पर अभी बातचीत चल रही है।' इन कंपनियों में से कुछ ने एनएसई पर सूचीबद्घता में रुचि दिखाई है। दक्षिण भारत की एक कंपनी के कंपनी सचिव ने बताया, 'कुछ समय से हम बीएसई पर सूचीबद्घ हैं और अब किसी अन्य एक्सचेंज में सूचीबद्घता के लिए दोबारा पूरी प्रक्रिया करने की योजना नहीं है।' हालांकि एक्सचेंज के अधिकारियों ने बताया कि इन कंपनियों के लिए सूचीबद्घता के लिए अपेक्षाकृत कम जरूरतों को पूरा करना होगा लेकिन मुख्य एक्सचेंज में आना कंपनी के लिए चुनौती भरा हो सकता है।

बीएसई के एक अधिकारी ने कहा, 'इन कंपनियों में से कुछ की वित्तीय स्थिति ऐसी है, जिससे उन्हें मुख्य एक्सचेंज में शामिल होने में मुश्किल आ सकती है।  इन शेयरों की तरलता भी एक समस्या हो सकती है।' एमएसई और एमपीएसई की सेबी द्वारा 2012 में तय न्यूनतम सालाना कारोबार के मानदंड को पूरा नहीं करने के कारण इनकी मान्यता रद्द कर दी गई। 2012 में सेबी ने सभी एक्सचेंजों से कहा था कि वह सालाना 1,000 करोड़ रुपये के कारोबार का मानदंड पूरा करें और साथ ही उनकी न्यूनतम नेटवर्थ 100 करोड़ रुपये होने चाहिए।

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