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कटे पंखों के संग उड़ान का अरमान कब तक!
बीएस संवाददाता /  January 02, 2015

स्पाइसजेट साल 2014 में सुर्खियों में बनी रही और इसकी वजह कंपनी द्वारा बार-बार दी गई लुभावनी टिकट बिक्री की पेशकश थी। कई तिमाहियों के दौरान इस विमानन कंपनी की खराब होती माली हालत से जुड़ी चिंताएं भी जताई गई थीं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने कई बार इस विमान कंपनी को कर्ज की सुविधा खत्म करने की धमकी तक दे डाली थी और लेखा परीक्षकों ने कंपनी के तिमाही नतीजों को लेकर चिंता जताई थी। कंपनी के कर्मचारियों को जून में तब मेल भेजे गए जब स्पाइसजेट समय पर टीडीएस प्रमाणपत्र और फॉर्म 16 नहीं भेज पाई। नागरिक विमानन महानिदेशालय ने अगस्त में विमानन कंपनी का वित्तीय लेखा परीक्षण कराया। लेकिन जब दिसंबर की शुरुआत में यह रिपोर्ट मिलनी शुरू हुई कि वेतन भुगतान में भी देरी हो रही है तो विमानन कंपनी के ठप पडऩे की आशंका के मद्देनजर हितधारकों (यात्री, वेंडर, हवाईअड्डा परिचालक, पट्टादाता) के हितों की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए जाने लगे।

लेकिन विमानन कंपनी की खस्ता हालत को देखते हुए आखिर अधिकारियों ने पहले हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? स्पाइसजेट अब से कुछ समय पहले तक कंपनी के लिए संभावित पूंजी का इंतजाम करने का वादा करती रही थी। नागरिक विमानन मंत्रालय को चिंता भी थी कि अगर विमानन कंपनी बंद हो जाएगी तो लोगों की नौकरियां (20,000 सीधे और परोक्ष रोजगार) जाएंगी। लेकिन दूसरे लोग सरकार की तरह लंबे समय तक कंपनी की ऐसी स्थिति के साथ सहज नहीं थे। 15 दिसंबर को तेल कंपनियों ने स्पाइसजेट को उधार में ईंधन देने से इनकार कर दिया। अगले कुछ दिनों तक विमानन कंपनी का परिचालन बुरी तरह बाधित रहा। ठीक इसी दौरान स्पाइसजेट के पूर्व प्रवर्तक और निदेशक अजय सिंह ने हस्तक्षेप किया। विमानन कंपनी का परिचालन शुरू करने के लिए कुछ नकदी का इंतजाम किया गया। स्पाइसजेट ने जुलाई के 345 क्षेत्रों के मुकाबले 230 क्षेत्रों में अपना परिचालन शुरू कर दिया और वह फिलहाल 18 बोईंग 737 विमान की सेवाएं दे रही है जबकि पिछले साल 37 बोईंग 737 विमानों के जरिए सेवा दी जा रही थी।

नागरिक विमानन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि विमानन कंपनी ने 13 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान तेल कंपनियों को किया है और अब महज 1 करोड़ रुपये ही बकाया है। उनका कहना है कि अब यह नकद भुगतान करके ईंधन की खरीद कर रही है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि स्पाइसजेट ने नकद भुगतान कर ईंधन लेने का विकल्प चुना है क्योंकि तेल कंपनियां नकद भुगतान पर 13 से 16 फीसदी छूट की पेशकश करती हैं। हालांकि वह ज्यादा लागत चुकाने को भी तैयार है बशर्ते तेल कंपनियां 30 दिनों की उधारी की पेशकश कर दें। इस विमानन कंपनी ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को आश्वासन दिया है कि वह 120 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देगी। स्पाइस जेट पर एएआई के 200 करोड़ रुपये (5 दिसंबर तक) बकाया हैं। इससे पहले उसने 82.5 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी दी थी।
 
स्पाइस जेट ने अपने निवेशकों से 200 करोड़ रुपये जुटाए हैं। एक जानकार सूत्र का कहना है, '30 दिनों से ज्यादा की बुकिंग पर लगे हुए प्रतिबंध को थोड़ा नरम किया गया है। ऐसे में विमानन कंपनी एक दिन में 9-10 करोड़ रुपये जुटाने लगी है और खर्च का दायरा करीब 5 करोड़ रुपये तक है। मौजूदा स्तर पर परिचालन बरकरार रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।' जानकार सूत्रों का कहना है कि स्पाइसजेट संभावित निवेश के लिए दो अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फंडों के साथ बातचीत कर रही है और ऐसी संभावना है कि अगले छह हफ्ते में इस पर कोई फैसला हो जाएगा। इससे पहले गोल्डमैन सैक्स और इंडिगो पार्टनर्स ने भी भारत के विमानन क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाई थी। माना जा रहा है कि कलानिधि मारन प्रवर्तित इस विमानन कंपनी में संभावित निवेश के लिए जेपी मॉर्गन के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारियों ने नागरिक विमानन मंत्रालय के अफसरों से मुलाकात की है।

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सिंह ने सरकार के पास इससे जुड़ी योजना जमा की है जिसमें विदेशी निवेशकों का एक समूह शामिल हो सकता है। कहा जा रहा है कि इस योजना के तहत करीब 1,200 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा जिससे विमानन कंपनी पटरी पर आएगी। सिटी यूनियन बैंक के पास स्पाइस जेट के 100 करोड़ रुपये सुरक्षित राशि के तौर पर जमा हैं। इस पर करीब 100 करोड़ रुपये का कर भी बकाया है। अगर निवेशक नया निवेश करते हैं तो निश्चित तौर पर परिचालन के स्तर पर कई बदलाव होंगे। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि स्पाइसजेट की रणनीति में दो बड़ी खामियां हैं। पहली खामी कंपनी के पूर्व सीईओ नील मिल्स का वह फैसला था जिसके तहत कंपनी के बिजनेस मॉडल में बदलाव किया गया था। स्पाइसजेट दरअसल हुबली, तिरुपति और अमृतसर जैसे क्षेत्रों में दांव लगाना चाहती थी जहां पहले किसी ने ऐसी कोशिश नहीं की थी। नतीजतन, कंपनी को अपने एक ही तरह के बोईंग 737 विमान बेड़े में बदलाव कर 78 सीटों वाले बॉम्बार्डियर्स शामिल करने के लिए बाध्य होना पड़ा। ज्यादातर किफायती विमानन कंपनियां एक ही तरह के विमान को तरजीह देती हैं ताकि उनके प्रबंधन का खर्च सीमा में रहे। इसके अलावा स्पाइसजेट इस बात का अंदाज नहीं लगा पाई कि इन क्षेत्रों से कितना कारोबार मिल पाएगा।

दूसरी गलती कम कीमत की पेशकश वाली रणनीति थी जिसके तहत यह उम्मीद की गई थी कि इस विमानन कंपनी की सेवाएं ज्यादा यात्री लेना शुरू कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  कारोबार को पटरी पर लाने के लिए विमानन कंपनी दो तरीकों पर काम कर सकती है। उसे अपनी कीमतों के स्तर को स्थिर रखना होगा भले ही इससे यात्री कम मिलें। कुछ ऐसा ही इंडिगो भी करती है। स्पाइसजेट ने कीमतों में कटौती कर ज्यादा यात्रियों के जरिये कमाई में सुधार करने का विकल्प चुना। हालांकि यह रणनीति तब तक गलत नहीं है जब तक विमान की लागत की भरपाई हो रही है। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर इस रणनीति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एक विमानन कंपनी के अधिकारी कहते हैं, 'ज्यादा यात्री जुडऩे का मतलब यह हुआ कि आपको ज्यादा ईंधन का इस्तेमाल करना पड़ेगा और कर्मचारियों पर ज्यादा दबाव होगा क्योंकि उन्हें ही ज्यादा यात्रियों का प्रबंधन करना होगा। ऐसे में देरी की संभावना बढ़ेगी और अगर आप नकद पैसे का भुगतान कर ईंधन ले रहे हैं तो आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।'

अगर कोई विमानन कंपनी उड़ान भरकर लागत की भरपाई करती है तब भी यह कारगर होगा। हालांकि प्रति किलोमीटर पर उपलब्ध सीट के लिहाज से स्पाइसजेट की कमाई में सुधार नहीं हुआ। इसी वजह से कंपनी का परिचालन घाटा बढ़ता गया। वर्ष 2014-15 की दूसरी तिमाही के लिए स्पाइसजेट के वित्तीय नतीजे इस बात का खुलासा करते हैं कि कंपनी का राजस्व प्रति किलोमीटर उपलब्ध सीट के लिहाज से 12 फीसदी बढ़कर 3.35 रुपये हो गया जबकि प्रति किलोमीटर उपलब्ध सीट की लागत 4.07 रुपये थी। ऐसा तब हुआ जब वर्ष 2013-14 की दूसरी तिमाही में यात्रियों की तादाद 69 फीसदी से बढ़कर एक साल बाद की समान तिमाही में 82 फीसदी हो गई। हालांकि इसके घाटे में भले ही थोड़ी कमी आई है लेकिन यह अब भी 310.4 करोड़ रुपये प्रति तिमाही है।

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