बिजनेस स्टैंडर्ड - अगर मेरे पिता 68 के बजाय 58 के होते तो मैं इन्फोसिस नहीं जाता : रोहन
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अगर मेरे पिता 68 के बजाय 58 के होते तो मैं इन्फोसिस नहीं जाता : रोहन
इंदुलेखा अरविंद और विभु रंजन मिश्रा /  December 19, 2014

रोहन मूर्ति अपने पिता एनआर नारायणमूर्ति के साथ पिछले साल जून में उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान इन्फोसिस आए थे। उस दौरान चर्चा थी कि संभवत: रोहन ही अगले मुख्य कार्याधिकारी होंगे। लेकिन विशाल सिक्का को सीईओ नियुक्त किए जाने से यह अफवाह साबित हुआ और रोहन ने अपने पिता के साथ ही कंपनी छोड़ दी। रोहन मूर्ति ने इंदुलेखा अरविंद और विभु रंजन मिश्रा के साथ बातचीत में बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि पूरे सॉफ्टवेयर सेवा क्षेत्र में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने पिता के साथ क्यों इन्फोसिस गए थे। पेश हैं मुख्य अंश:

इन्फोसिस में आप क्या कर रहे थे?

मुझे दो जिम्मेदारियां दी गई थीं- व्यक्तिगत उत्पादकता पर काम करना और स्वचालन को बढ़ावा देना। व्यक्तिगत उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह मेरे पिता ने दी थी जबकि स्वचालन मेरा अपना विचार था। मेरे पिता और मैं अक्सर कंप्यूटर विज्ञान के संदर्भ में व्यक्तिगत उत्पादकता पर चर्चा करते थे और मैं विस्तार से बताता था कि यह क्यों एक कठिन समस्या है। जब मैं पीएचडी का छात्र था तो हमें समस्याओं पर काम करना होता था जहां 1,00,000 या 2,00,000 कोड लाइन लिखनी होती थी। इसलिए मैंने उस दुनिया का इस्तेमाल नहीं किया जहां 2,00,000 कोड लाइन 2,000 लोगों द्वारा लिखी जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद इसका संबंध उत्पादकता से है और मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं उस पर ध्यान केंद्रित करूं।

व्यक्तिगत उत्पादकता को मापना काफी महत्त्वपूर्ण क्यों है?

मैं समझता हूं कि यह इस क्षेत्र में पूरे श्रमबल को पहचानने की बुनियाद है। आज यह एक उड़ती चिडिय़ा की तरह है। मैं किसी विशेषज्ञ की नहीं बोलना चाहता हूं बल्कि मेरी सीमित समझ के अनुसार लॉर्ड केल्विन ने सही कहा है कि जिसे आप माप नहींसकते उसमें आप सुधार भी नहीं कर सकते। यदि आप माप नहीं सकेंगे तो आप अपने ग्राहकों के लिए समस्याओं को कैसे निपटा पाएंगे। आप यह कैसे समझ पाएंगे कि सॉफ्टवेयर डिलिवरी में भी बदलाव हो रहा है। फिलहाल वैज्ञानिक दृष्टिï से आप यह कैसे निर्धारित कर पाएंगे कि किसी समस्या को सुलझाने के लिए कितने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जरूरत होगी और उसके बाद मैं कैसे यह तय कर पाऊंगा कि परियोजना पर किन लोगों को लगाने की जरूरत है।

सॉफ्टवेयर सेवा क्षेत्र को इससे और क्या फायदा मिल सकता है?

प्रबंधक के संदर्भ में अब आपको पता है कि कौन कमजोर, मध्यम अथवा बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। साथ ही प्रबंधक की ग्रेडिंग आप इस आधार पर कर सकते हैं कि उसने अपने लोगों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए किस स्तर तक प्रोत्साहित किया। हम जिस तरीके से प्रशिक्षण देते हैं उसमें भी बदलाव होगा। यदि आप प्रशिक्षण पर अधिक निवेश करेंगे तो स्पष्टï तौर पर मेरा मानना है कि आपको लक्षित प्रशिक्षण देने की जरूरत है, खासकर उस सूरत में जब लोगों की उत्पादकता कम हो। इससे किसी को दंडित किए बगैर उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।

लेकिन जब उत्पादकता की बात आती है तो लोग प्रति कर्मचारी राजस्व पर चर्चा करते हैं। इस पर क्या कहेंगे?

यह सबसे अच्छा तरीका नहीं है लेकिन हम जो कोशिश कर रहे हैं उसके लिए केवल इतना कहना चाहते हैं कि केवल कार की अधिकतम गति को ही जानना जरूरी नहीं है बल्कि आपको यह भी जानना होगा कि गति किस उपकरण पर कितनाा निर्भर है। ऐसे में हमे पता चल जाएगा कि किस उपकरण में सुधार की दरकार है। इसलिए केवल प्रति कर्मचारी राजस्व पर गौर करना पर्याप्त नहीं होगा।

क्या आपको लगता है कि इन्फोसिस में अपने पिता के कार्यकारी सहायक के बजाय आपको अन्य पेशेवर की तरह आना चाहिए था?

इन्फोसिस से जुडऩा न तो मेरी योजना में कभी शमिल नहीं था और न ही मेरे पिताजी की योजना में। वास्तव में मेरे पिताजी की इच्छा इन्फोसिस में लौटने की नहीं थी। वह सेवानिवृत्त हो चुके थे और मेरी बहन के बच्चों के साथ खेलते थे। इन्फोसिस में मेरे आने का एकमात्र कारण यह है कि मेरे पिताजी ने कहा कि वह कुछ करना चाहते हैं और उन्हें ऐसे लोगों की जरूरत है जो कुछ अलग कर दिखाए। मैं यह दावा नहीं करता कि मैं बहुत बुद्धिमान हूं और कुछ भी कर सकता हूं। उद्योग में और उसके बाहर काफी बुद्धिमान लोग हैं। लेकिन उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसे लोगों की तलाश है जो बाहर के हों लेकिन अंदर की बातों से अवगत हों। वह दो-तीन चीजों में मेरा योगदान चाहते थे ताकि कंपनी की बुनियाद मजबूत हो सके। इसलिए मैं उनके साथ रहने तक इन्फोसिस जाने के लिए सहमत हो गया। साथ ही यदि मेरे पिताजी की उम्र 58 की होती और वह 68 के नहीं होते तो मैं नहीं जाता और वह इसके लिए कहते भी नहीं। मैंने खुद के लिए कहीं और एक अलग दुनिया बसाई है।

इन्फोसिस में आपने किस हद तक समस्याओं को दूर किया?

यह दावा करना गलत होगा कि हमने समस्याओं को सुलझा लिया। लेकिन हमने इसकी शुरुआत जरूर की। हमने कई मॉडल तैयार किए और उस पर काम किया। कई लोगों ने पंजीकरण शुरू किया और हमने उसका आकलन (स्केलिंग) किया। इसलिए मैं कह सकता हूं कि एक साल में हमने करीब 20 फीसदी रास्ता पार कर लिया। लेकिन यह कंप्यूटर साइंस की एक कठिन समस्या है और इसे सुलझाने में थोड़ा वक्त लगेगा। इन्फोसिस में यदि उस प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया तो मैं कह सकता हूं कि बेहतर के लिए पूरा कार्यबल बदल जाएगा। लेकिन यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो संभवत: कोई अन्य कंपनी उस ओर आगे बढ़ेगी।

Keyword: infosys, IT, CEO, Vishal Sikkka, इन्फोसिस के मुख्य कार्याधिकारी विशाल सिक्का , गैर-कार्यकारी चेयरमैन एन आर नारायणमू,
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