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विनिवेश कार्यक्रम को मिलेगा एलआईसी का सहारा?
पुनीत वाधवा / नई दिल्ली December 05, 2014

वित्त वर्ष 2014-15 समाप्त होने में महज तीन महीने बचे हैं, लेकिन सरकार का महत्वाकांक्षी विनिवेश कार्यक्रम शुक्रवार को शुरू हुआ और इसके तहत ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए सेल की हिस्सेदारी बेची गई। इसबिक्री से सरकार को करीब 1,700 करोड़ रुपये मिल सकते हैं जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में विनिवेश के जरिए कुल 58,425 करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य है। खबर है कि सेल के ओएफएस के अलावा सरकार कोल इंडिया, ओएनजीसी, एनएचपीसी, पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन (आरईसी), हिंदुस्तान जिंक और बालको आदि कंपनियों की 5 से 75 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी। हालांकि विगत वर्षों के रिकॉर्ड को देखें तो यह सरकार का सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी लक्ष्य नजर आ रहा है। विनिवेश के जरिए सरकारी खजाने में पहुंचने वाली रकम लक्ष्य के मुकाबले काफी रही है।

विनिवेश विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सीपीएसई (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज) की अल्पांश हिस्सेदारी से कुल 15,819.46 करोड़ रुपये मिले (सीपीएसई ईटीएफ के जरिए एमएमटीसी से 571.71 करोड़ रुपये), एचसीएल से 259.56 करोड़ रुपये), एनएफएल से 101.08 करोड़ रुपये, आईटीडीसी से 30.17 करोड़ रुपये, एसटीसी से 4.54 करोड़ रुपये, एनएलसी से 358.21 करोड़ रुपये, एनएचपीसी से 2131.28 करोड़ रुपये, पीजीसीआईएल से 1637.32 करोड़ रुपये, ईआईएल से 497.32 करोड़ रुपये, बीएचईएल से 1886.78 करोड़ रुपये, आईओसीएल से 5341.49 करोड़ रुपये मिले) जबकि विनिवेश के जरिए 40,000 करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य था। 2010-11, 2011-12 और 2012-13 की तरह सरकार सीपीएसई की अल्पांश हिस्सेदारी बेचकर सिर्फ 22,144.21, 13894.05 करोड़ रुपये और 23,956.81 करोड़ रुपये हासिल कर पाई, जो इन वर्षों में वास्तविक लक्ष्य के मुकाबले 44.64 फीसदी, 65.27 फीसदी और 20.14 फीसदी कम था।
ऐसे में क्या इस बार भी भारतीय जीवन बीमा निगम को सहारा देने के लिए बुलाया जाएगा?

एंबिट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक वैभव सांघवी कहते हैं कि इस बार एक अंतर यह है कि बाजार मजबूत है और विदेशी संस्थागत निवेशक निवेश का मौका तलाश रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें अच्छा सौदा और शेयर या कंपनियों की पेशकश बेहतर नजर आती है तो निïिश्चत तौर पर वे निवेश करेंगे। आर्थिक हालात की बात करें तो भारत अभी बेहतर है और यहां हो रही प्रगति को निवेशक सकारात्मक नजरिये से देख रहे हैं। अगर इस वित्त वर्ष का विनिवेश लक्ष्य नहीं भी पूरा होता है तो भी इसमें बहुत ज्यादा कमी नहीं रहेगी।

उन्होंने कहा कि पीएसयू शेयर खरीदने वाले खुदरा निवेशकों के लिए सरकार का विनिवेश कार्यक्रम इसे हासिल करने का बेहतर मौका है। कई पीएसयू कंपनियां हैं, जो महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में हमें लंबी अवधि तक निवेश रखने पर विचार करना चाहिए। यह बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसे इश्यू में खुदरा निवेशकों को छूट भी मिल रही है। इस बीच, खबर है कि एलआईसी कुछ शेयरों की बिकवाली कर रही है ताकि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम के लिए वह तैयार रह सके। खबरें बताती है कि इस वित्त वर्ष में एलआईसी का इक्विटी में निवेश 45,000 करोड़ रुपये रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि अगर सरकार का विनिवेश कार्यक्रम चलता है तो वह और निवेश करने के लिए तैयार है।

के आर चोकसी शेयर्स ऐंड सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी देवेन चोकसी ने कहा कि विनिवेश के लिहाज से संभावित कंपनियों के नाम का पहले से ही ऐलान कर सरकार ने सही दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार सब्सिडी जैसे महत्वपूर्ण मसले को भी सुलझाना चाहती है, जिसका असर ओएनजीसी जैसी कंपनियों पर देखने को मिल सकता है। ये सभी चीजें इस शेयर या सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में भागीदारी की इच्छा रखने वाले निवेशकों को स्पष्टता मुहैया कराते हैं। इससे विनिवेश कार्यक्रम की कामयाबी सुनिश्चित हो सकती है। बाजार के मौजूदा माहौल को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि विनिवेश के जरिए रकम जुटाने में सरकार को दिक्कत होगी।

Keyword: LIC, OFS, ONGC, NHPC,,
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