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जीएसपीसी-अदाणी एलएनजी टर्मिनल की हिस्सेदारी बिकने में लगेगा वक्त
कल्पना पाठक / मुंबई November 26, 2014

मुंद्रा विशेष आर्थिक क्षेत्र में अदाणी समूह और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) के 4500 करोड़ रुपये वाले एलएनजी टर्मिनल (जिसकी क्षमता 50 लाख टन सालाना है) के पूरा होने में और वक्त लगेगा जबकि मूल
लक्ष्य दिसंबर 2016 तक पूरा करने का था। जीएसपीसी और अदाणी समूह की योजना इस टर्मिनल की 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की है। हालांकि यह फंस गया है क्योंंकि मंजूरी देने के लिए अभी जीएसपीसी में सीईओ नहीं हैं।
हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े एक अधिकारी ने कहा, जीएसपीसी के पूर्व प्रमुख डी जे पांडियन को गुजरात का मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद से जीएसपीसी में प्रमुख की नियुक्ति नहीं हुई है। रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार नहीं किया गया है और हमें लगता है कि यह सौदा शायद इस साल नहीं हो पाएगा। पिछले महीने पांडियन के मुख्य सचिव बनने के बाद जीएसपीसी में पद खाली है। पांडियन को तेल व गैस क्षेत्र में जीएसपीसी को प्रमुख कंपनी बनाने और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र की पूरी शृंखला में मौजूदगी के लिहाज से अहम माना जाता था।
पूरे गुजरात में प्राकृतिक गैस के पारेषण व वितरण के लिए जीसीएसपी की तरफ से विस्तृत गैस ग्रिड नेटवर्क तैयार करने में पांडियन ने अहम भूमिका निभाई थी। इस परियोजना में जीएसपीसी 50 फीसदी हिस्सेदारी रखेगी जबकि अदाणी समूह 25 फीसदी हिस्सा लेगा। इस परियोजना का वित्त पोषण 70:30 के कर्ज-इक्विटी अनुपात में किया जाएगा। इस टर्मिनल की क्षमता का विस्तार 1 करोड़ टन सालाना तक किया जा सकेगा।
जीएसपीसी व अदाणी ने तीन कंपनियों इंडियन गैस सॉल्यूशंस (आईजीएस), ओएनजीसी और आईओसी से संपर्क साधा है। अगर आईजीएस हिस्सेदारी लेती है तो 2011 में इसके गठन के बाद यह भारत में कंपनी का पहला उद्यम होगा। आईजीएस का गठन बीपी व रिलायंस इंडस्ट्रीज के 50:50 संयुक्त उद्यम के तौर पर हुआ है, जब बीपी ने केजी डी-6 समेत तेल व गैस के 21 उत्पादन साझा अनुबंधों में 30 फीसदी हिस्सेदारी 7.2 अरब डॉलर में खरीदी।
हिस्सेदारी बिक्री के मामले में जांच प्रक्रिया (ड्यू डिलिजेंस) दिसंबर 2013 में पूरी हुई और कंपनियों से 15 जनवरी 2014 की क्षमता के आधार पर वाणिज्यिक प्रस्ताव जमा करने को कहा गया। यह बोली मार्च में खोली जानी थी और सौदा जून 2014 तक पूरा होना था। हालांकि मई में चुनाव के चलते पूरी प्रक्रिया टाल दी गई।
इस सौदे की जानकारी रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा, हिस्सेदारी बिक्री अगले वित्त वर्ष से पहले शायद ही हो पाएगी क्योंकि सरकारी कंपनी होने के नाते ओएनजीसी व आईओसी को कई दौर की मंजूरी की दरकार होगी। बोली में विजयी रहने वालों को इस परियोजना के लिए तीन साल की अवधि में 400 करोड़ रुपये लगाने होंगे। अगस्त 2013 में आठ कंपनियों ने 25 फीसदी हिस्सेदारी के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराया था। चुनी गई कंपनियों के अलावा बोली लगाने वालों में गेल इंडिया, पेट्रोनेट एलएनजी, टॉरंट एनर्जी, जापान की मित्सुई ऐंड कंपनी और टोयोटा टी कॉरपोरेशन शामिल हैं।
कंपनी के अधिकारी के मुताबिक, अनुभव होने के बाद भी पेट्रोनेट एलएनजी को नहीं चुना गया क्योंकि यहां हितों का टकराव हो सकता था। दूसरी ओर आईओसी व ओएनजीसी की पेट्रोनेट एलएनजी में 12.5-12.5 फीसदी हिस्सेदारी है। आईओसी तमिलनाडु के एन्नोर में 50 लाख सालाना क्षमता वाले एलएनजी टर्मिनल की स्थापना भी कर रही है।

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