बिजनेस स?टैंडर?ड - अतार्किक बनता देश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 04, 2022 09:52 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

अतार्किक बनता देश
संपादकीय /  November 23, 2014

विवादास्पद धर्मगुरु रामपाल सिंह जतिन जो अब खुद को केवल रामपाल कहते हैं, को गत सप्ताह हरियाणा के हिसार जिले में उनके आश्रम की जब्ती के बाद हिरासत में ले लिया गया। रामपाल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष न्यायिक अवमानना के मामले में पेश होने से बच रहे थे। अदालत ने हरियाणा पुलिस को आदेश दिया था कि उनको 21 नवंबर तक अदालत में पेश किया जाए। इससे पहले पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच बहुत लंबे समय तक संघर्ष चला जिसमें रामपाल के संस्थान से जुड़े कुछ लोगों की मौत भी हुई। हरियाणा पुलिस को रामपाल के आश्रम से हथियार भी बरामद हुए हैं। तब से मीडिया में रामपाल की अतियों की कई चर्चाएं सामने आई हैं। लेकिन अगर अंधी विचारहीनता को पनपने दिया गया तो कानून व्यवस्था को इस तरह धता बताने वाली ऐसी घटनाएं सामने आएंगी।

अदालती नोटिस से बचने की कोशिश के बावजूद रामपाल देश के अन्य धार्मिक नेताओं से अलग नहीं हैं। ऐसे ही अनेक अन्य नेताओं की तरह वह एक भूतपूर्व इंजीनियर हैं, वर्ष 2000 तक वह औपचारिक तौर पर राज्य सिंचाई विभाग में कनिष्ठï अभियंता थे। उनकी जीवनशैली भी अनेक अन्य धार्मिक गुरुओं की तरह बहुत धन वैभव के प्रदर्शन वाली नहीं रही। रामपाल ने आध्यात्मिक सलाहकार का काम वर्ष 2000 में शुरू किया। उनका आश्रम अब 12 एकड़ में फैला हुआ है, उनके पास लक्जरी कारों का बेड़ा है और वह किसी तरह के कर्ज में भी नहीं हैं। स्पष्टï है कि रामपाल एक ऐसे उद्योग में हैं जहां जोखिम भी ज्यादा है और प्रतिफल भी। एक अनुमान के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रामपाल के करीब ढाई लाख अनुयायी हैं। उनकी लोकप्रियता की कई वजहें हो सकती हैं। एक वजह तो यह है कि वह जाति विरोधी हैं। एक अन्य शक्तिशाली संगठन डेरा सच्चा सौदा की तरह रामपाल के आश्रम को भी जाति व्यवस्था की कट्टïरता से मदद मिली। डेरा सच्चा सौदा भी रामपाल के अनुयायियों की तरह हिंसा में शामिल रहा है। रामपाल पर वर्ष 2006 में हत्या का जो मुकदमा चल रहा है उस हिंसा में उनके अनुयायी शामिल थे और उसी मामले में रामपाल अदालत में पेश होने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे मामलों में हमेशा हिंसा किसी अन्य पारंपरिक धार्मिक समूह के साथ संघर्ष में ही भड़की।

कुल-मिलाकर देखा जाए तो हमारा देश धार्मिक प्रगतिविरोध के सवालों का सामना करने से बचता रहा है। यह समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है। यह उनको भी प्रभावित करता है जो सरकार में उच्च पदों पर आसीन हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इनके खिलाफ थे लेकिन उनके उत्तराधिकारियों को दोषी ठहराया जा सकता है। इंदिरा गांधी को ऐसे आध्यात्मिक लोगों को प्रश्रय देने के लिए जाना जाता है। इंदिरा के पुत्र राजीव गांधी ने सन 1989 के चुनाव प्रचार की शुरुआत ही देवराहा बाबा से आशीर्वाद लेकर की थी। देवराहा बाबा यमुना किनारे एक ऊंचे स्थान पर बैठते और लोगों के सर को अपने पैर से छूकर उनको आशिष देते।

ऐसी हरकतों में कमी आती नहीं दिख रही है। बल्कि ऐसी चीजों को बढ़ावा मिल रहा है और ऐसे संकेत हैं कि नई सरकार के कार्यकाल में इनमें और इजाफा होगा। विश्व हिंदू कांग्रेस में सत्ताधारी भाजपा से संबंधित संगठन विश्व हिंदू परिषद ने घोषणा की कि पृथ्वीराज चौहान की पराजय के 800 साल बाद अंतत: हिंदुओं को दिल्ली की गद्दी मिल गई है। पिछली सरकारों को अलग बताते हुए विहिप के नेता अशोक सिंघल ने बताया कि कैसे पहले कई मौकों पर धार्मिक मान्यताओं को कानून और तर्क की कसौटी पर पीछे धकेल दिया गया। अगर ऐसी बातों को वैधता प्रदान की गई तो संभव है कि हम तर्कहीनता की ओर बढ़ते जाएंगे।

Keyword: Religious Leaders, Rampal, Haryana,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कच्चे तेल में तेजी से रुपये पर और बढ़ेगा दबाव
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.