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जेईई परीक्षा, कोचिंग पर निर्भरता
एम सरस्वती और कल्पना पाठक / मुंबई November 16, 2014

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) के जरिये होने वाली परीक्षा के नए मानक अमल में आए 18 महीने का समय बीत चुका है। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने ये बदलाव इसलिए किए थे ताकि बच्चे कोचिंग संस्थानों के बजाय कक्षा 12 की पढ़ाई और उसमें अपने प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान दें। लेकिन हकीकत में इन बदलावों के बाद इन कोचिंग संस्थानों की अहमियत और अधिक बढ़ गई है क्योंकि अब वे कक्षा 12 में परीक्षा परिणाम सुधारने की कोचिंग भी देने लगे हैं। आकाश एजुकेशनल सर्विसिज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आकाश चौधरी ने कहा कि वे 8-10 नए केंद्रों की शुरुआत हर साल करते हैं। वर्ष 2014-15 के सत्र के लिए उन्होंने बेहद व्यवस्थित योजना और तालमेल के साथ कुल 26 नए केंद्र शुरू किए हैं।

अप्रैल 2013 से ही आईआईटी प्रवेश परीक्षा दो हिस्सों में आयोजित की जाने लगी है। एक है मेन और दूसरा एडवांस। आईआईटी के लिए आवेदन करने वाले बच्चे पहले मेन के लिए आवेदन देते हैं और इसमें सफल होने वाले आगे जेईई एडवांस परीक्षा में शामिल होते हैं। जेईई मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले बच्चों में से केवल शीर्ष 150,000 ही एडवांस परीक्षा में बैठने की पात्रता रखते हैं। यह परीक्षा मुख्य परीक्षा के कुछ सप्ताह बाद होती है।

जेईई एडवांस के जरिये आईआईटी में दाखिले के लिए किसी छात्र को अपने कक्षा 12 बोर्ड में भी शीर्ष 20 फीसदी में शामिल होना जरूरी है। वर्ष 2012 तक कक्षा 12 में 60 फीसदी अंक हासिल करने वाला बच्चा आईआईटी में दाखिले का पात्र होता था। देश में कुल 32 बोर्ड हैं और उनका परीक्षा तथा मूल्यांकन का तरीका भी अलग-अलग है। एक ओर जहां जेईई मेन की देखरेख सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन करेगा वहीं जेईई एडवांस का प्रबंधन आईआईटी के हाथ में होता है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिला जेईई की मुख्य परीक्षा को आधार मानकर किया जाता है। इतना ही नहीं डीम्ड विश्वविद्यालय भी एक दायरा तय करके जेईई मुख्य परीक्षा के परिणाम का इस्तेमाल अपने यहां दाखिला देने के लिए कर सकते हैं।

चौधरी ने कहा कि पिछले साल की तुलना में उनके यहां विद्यार्थियों का नामांकन 30-35 फीसदी तक बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'जेईई मुख्य परीक्षा लागू होने के बाद अनेक संस्थानों ने इन अंकों को शामिल करना शुरू कर दिया है। इसलिए पहले राज्य स्तरीय परीक्षा में बैठने वाले छात्र भी अब जेईई मुख्य परीक्षा में शिरकत करते हैं।' उन्होंने बताया कि अब बच्चों को अपनी कक्षा 12 की तैयारियों की भी फिक्र रहती है। आकाश एजुकेशनल सर्विसिज ने साल भर में अपने शुल्क में 5-10 फीसदी का इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी बाजार और जरूरत को ध्यान में रखकर की गई है।

छात्र कक्षा 10 के बाद ही कोचिंग संस्थान का रुख कर लेते हैं। उनके कोर्स का शुल्क अलग-अलग केंद्रों पर अलग-अलग है। किसी छोटे शहर में यह शुल्क 80,000 रुपये हो सकता है जबकि महानगर में यह दो लाख से 2.7 लाख रुपये तक कुछ भी हो सकता है। कुछ कोचिंग संस्थान जहां मिलाजुला पाठ्यक्रम चला रहे हैं वहीं चौधरी का कहना है कि उनका संस्थान केवल स्कूलों से इतर अध्यापन ही कराएगा। चौधरी कहते हैं, 'हमने अतीत में भी एकीकृत मॉडल अपनाया लेकिन उससे कोई खास फायदा नहीं हुआ। उलटा भ्रम की स्थिति बन गई।'

आकाश, एएनटीएचई नामक छात्रवृत्ति परीक्षा भी कराता है जो इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों के लिए होती है। इसके अलावा चौधरी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अन्य स्थानों पर भी केंद्र ऐसे छात्रवृत्ति कार्यक्रम कराते रहते हैं। ऐसे कार्यक्रमों की भी मांग है जिनमें स्कूली शिक्षा को आईआईटी की तैयारी से जोड़ दिया गया हो। विशेषज्ञों का कहना है कि इन साझा पाठ्यक्रमों में स्कूलों के दैनिक सबक के अलावा विस्तार से आईआईटी की तैयारी भी कराई जाती है और ये खासे लोकप्रिय हैं।

राव आईआईटी में योजना और नीति उपाध्यक्ष चंदन दीक्षित कहते हैं, 'एकीकृत पाठ्यक्रम अधिक रोचक हैं और जिन कॉलेजों में ऐसी व्यवस्था नहीं है वहां बहुत सीटें खाली रह जाती हैं क्योंकि छात्र उन कॉलेजों का रुख कर लेते हैं जहां ऐसी व्यवस्था रहती है।' दीक्षित ने यह भी कहा कि एकीकृत पाठ्यक्रम का शुल्क आमतौर पर 10 से 15 फीसदी अधिक होता है। तीन विषयों की पढ़ाई का शुल्क जहां करीब 3.5 लाख रुपये है वहीं चार विषयों के लिए यह करीब 4.5 लाख रुपये तक हो जाती है।

उन्होंने कहा कि उन्हें नामांकन में 25 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है और अब बड़ी संख्या में बच्चे उन संस्थानों में शिक्षा हासिल करने के लिए आ रहे हैं जो जेईई एडवांस के लिए भी प्रशिक्षण दिलाते हैं। राव आईआईटी अकादमी में छात्रवृत्ति परीक्षण भी होता है जिसके तहत सभी योग्य छात्रों को 50 फीसदी तक की छात्रवृत्ति दी जाती है।

राजस्थान का कोटा शहर आईआईटी-जेईई कोचिंग का गढ़ है और वहां छात्रों का आना बदस्तूर जारी है। कोटा स्थित बंसल क्लासेज प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी पी के बंसल का कहना है जेईई परीक्षा के पैटर्न में बदलाव के बाद उन शहरों से बच्चों का कोटा आना कम हुआ है जहां अच्छे स्कूल और कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं। उनके मुताबिक ऐसा कक्षा 12 के प्रदर्शन पर जोर बढ़ाये जाने के कारण हुआ है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी अनेक ऐसे बच्चे हैं जो बढिय़ा संस्थानों के अभाव में प्रशिक्षण के लिए कोटा का रुख कर रहे हैं। कोटा के अलावा बीसीपीएल के 19 केंद्र हैं और वह वर्ष 2015-16 के दौरान 5 नए शिक्षण केंद्र शुरू करने जा रहा है। बंसल ने यह भी कहा कि जेईई कोचिंग की मांग अब देश के अन्य इलाकों से भी आ रही है। कुछ कोचिंग संस्थानों का मानना है कि परीक्षा के इस नए तरीके ने उन पर निर्भरता बढ़ा दी है।

बिजनेस मैनेजमेंट रेजोनेंस एडवेंचर्स के अध्यक्ष मनोज शर्मा कहते हैं कि उन्हें कोटा में अपने संस्थान में होने वाले नामांकन में किसी तरह की कमी नहीं महसूस हुई। उन्होंने कहा कि इस बदलाव के बाद अब बच्चे और उनके माता-पिता हमसे यह भी कह रहे हैं कि हम बोर्ड परीक्षा की तैयारी भी कराएं। यह बात उनको कोचिंग संस्थानों पर और अधिक निर्भर कर रही है। 

Keyword: education, JEE, IIT,,
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