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मंत्रिमंडल को और प्रभावी बनाएंगे ये दिग्गज
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली November 09, 2014

प्रशासनिक कौशल के महारथी पर्रिकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय करने वाले मनोहर गोपालकृष्ण पर्रिकर एक टेक्नोक्रेट हैं और उन्हें साफ-सुथरी छवि व प्रशासनिक कौशल के लिए जाना जाता है। वह तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले पर्रिकर गोवा में भाजपा के शुरुआती सदस्यों में शामिल हैं। राज्य में अवैध खनन को लेकर उन्होंने कांग्रेसनीत सरकार के खिलाफ अभियान शुरू किया और इसी ने कांग्रेस को राज्य में पटखनी देने में उनकी मदद की। पर्रिकर मोदी के करीबी माने जाते हैं। बेबाकी और विकास संबंधी कदमों को लेकर पर्रिकर ने अलग पहचान बनाई है। अवैध खनन के मामले में उनकी लोक लेखा समिति की विवादास्पद रिपोर्ट के बाद न्यायमूर्ति एम बी शाह आयोग की जांच हुई।

नड्डा को मिला कुशल रणनीति का लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के विश्वासपात्र व कुशल रणनीतिकार जगत प्रकाश नड्डा का केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रवेश उनकी योग्यता का नतीजा है। विनम्र स्वभाव वाले और कॉलेज के जीवन में प्रख्यात छात्र नेता रहे नड्डा बड़ी चुनौतियों का समाधान करने वालों में गिने जाते हैं। वह भाजपा अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार थे, लेकिन इस साल के शुरू में इस पद की दौड़ में पिछडऩे के बाद उन्होंने शाह को पूरा समर्थन दिया। पार्टी के सभी अहम फैसलों में मोदी और शाह के अतिरिक्त नड्डा भी शामिल होते हैं। कहा जा रहा है कि वह पार्टी और सरकार के बीच एक संपर्क की भूमिका निभाएंगे। मई 2010 से वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। अप्रैल 2012 में नड्डïा राज्यसभा के लिए चुने गए और विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्य रहे हैं।

कैबिनेट में फिर हुई सुरेश प्रभु की वापसी

अटल बिहारी वाजपेई सरकार के कैबिनेट में सेवाएं देने के बाद शिवसेना नेता और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे सुरेश प्रभु एक बार फिर राजग सरकार में शामिल हो गए। वाजपेयी सरकार में विद्युत मंत्रालय के कामकाज को नई दिशा देने के लिए उन्होंने काफी वाहवाही बटोरी थी। बैंकर से नेता बने 61 वर्षीय प्रभु कोंकण क्षेत्र के रहने वाले हैं। विद्युत क्षेत्र में बदलाव के लिए बने सरकारी पैनल के प्रमुख नद पर उन्हें नियुक्त किए जाने से ही संदेश मिल गया था कि मोदी उन्हें काफी पसंद करते हैं। प्रभु को ब्रिसबेन में होने वाली जी-20 की शिखर बैठक में प्रधानमंत्री की सहायता के लिए मोदी का 'शेरपाÓ भी नियुक्त किया गया है। प्रभु कोंकण क्षेत्र की राजापुर लोकसभा सीट से 1996 से 2009 के बीच चार बार सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2009 में वह लोकसभा चुनाव हार गए थे।

जाट नेता बीरेंद्र सिंह पर वक्त हुआ मेहरबान

हरियाणा के कद्दावर जाट नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह के साथ किस्मत ने कई बार दगा किया लेकिन इस बार वक्त उन पर मेहरबान रहा और वह राजग सरकार में मंत्री बनने में सफल रहे। 2004 में वह हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में थे, लेकिन बाजी भूपेंद्र सिंह हुड्डïा के हाथ रही। 2010 में मनमोहन सरकार में भी अंतिम क्षणों में वह मंत्रिमंडल में शामिल होने से रह गए। अपने लंबे राजनीतिक करियर में सिंह को हुड्डïा और इंडियन नैशनल लोकदल के ओम प्रकाश चौटाला जैसे जाट नेताओं की छाया में रहने को मजबूर होना पड़ा था। लेकिन इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा दांव खेला और कांग्रेस के साथ अपना चार दशक का रिश्ता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। दांव सफल रहा और राज्य में भाजपा की सरकार बनी।

मंत्रिमंडल में युवा और अनुभव का तालमेल

रूड़ी दूसरी बार केंद्र में संभालेंगे मंत्री पद

राजनीतिक लिहाज से महत्त्वपूर्ण महाराष्ट्र में पार्टी प्रभारी के रूप में बड़ी भूमिका अदा करने के बाद विमानन क्षेत्र और राजनीति से जुड़े युवा भाजपा नेता राजीव प्रताप रूड़ी की केंद्रीय मंत्रिमंडल में बतौर मंत्री यह दूसरी पारी होगी। बिहार की सारन सीट पर लोकसभा चुनाव में राजद प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी को परास्त करने वाले रूड़ी को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने संकेत दे दिया है कि वह अगले साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर काफी गंभीर है।  52 वर्षीय रूड़ी रानीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण राजपूत वर्ग से आते हैं और बिहार में सत्ता हासिल करने के लिए इस समुदाय के वोट भाजपा के लिए काफी अहमियत रखेंगे। वर्ष 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें पहली बार वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया था। दो साल बाद उन्हें नागर विमानन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। रूड़ी के पास अब भी कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस है और वह अक्सर कॉमर्शियल विमान उड़ाते रहते हैं।

राठौड़ का राजनीति में अचूक निशाना

निशानेबाजी रेंज पर कामयाबी की बुलंदियों को छूने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राजनीति में भी सही निशाना साधते हुए सांसद के रूप में पहले कार्यकाल में ही नरेंद्र मोदी सरकार में राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राठौड़ ने 2004 एथेंस ओलंपिक की डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर सुर्खियां बंटोरी थी। इस साल की शुरुआत में जयपुर ग्रामीण से लोकसभा चुनाव जीतकर उन्होंने राजनीति के मैदान में भी सफल पदार्पण किया। उन्होंने पिछले साल सितंबर में भारतीय सेना में कर्नल के ओहदे से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेते हुए भाजपा की सदस्यता ली थी। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्रशिक्षित राठौड़ 23 साल तक भारतीय सेना में रहे। ओलंपिक रजत के अलावा उन्होंने मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल 2002 में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेल 2006 में फिर खिताब जीता। इसके अलावा 2004 विश्व निशानेबाजी चैम्पियनशिप और 2006 में काहिरा में विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीते।

विवादों में रहने वाले गिरिराज भी आए

तेजतर्रार और कई बार विवादास्पद बयान के लिए सुर्खियों में रहनेवाले गिरिराज सिंह को भी मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली। भूमिहार समुदाय ने बिहार में भाजपा का समर्थन किया था और मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं होने से यह समुदाय निराश महसूस कर रहा था। नवादा से भाजपा के 62 वर्षीय सांसद ने लोकसभा चुनावों के दौरान यह कहकर पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी थी कि मोदी से नाखुश मुसलमानों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए। इस पर पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी को उन्हें फटकार लगानी पड़ी थी लेकिन पहली बार सांसद चुने गए सिंह मोदी के लंबे समय से वफादार रहे हैं। जिस समय पार्टी में मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने की चर्चाएं चल रही थीं और पार्टी में इसे लेकर दो राय उभर रही थीं , तभी से सिंह मोदी के प्रति पूर्ण निष्ठा प्रदर्शित करते आए हैं।

राजनीति के अच्छे पारखी कुंडारिया

राजकोट के सांसद एवं पटेल संप्रदाय के शक्तिशाली व्यक्ति मोहनभाई कुंडारिया को राज्य राजनीति का अच्छा अनुभव है। वह राजकोट से 5 बार विधायक रह चुके हैं। मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के समय उन्होंने गुजरात के लिए भरपूर कार्य किया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे मोहनभाई कुंडारिया गुजरात में पटेल समुदाय के नेता के तौर पर और ग्रामीण विकास में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। कुंडारिया पिछले लोकसभा चुनाव में उस वक्त विवाद में आ गए थे जब छात्रों की पीठ पर चलते हुए उनकी तस्वीरें कैमरों में कैद हुई थी। इस पर उन्होंने कहा था कि छात्रों ने उनसे ऐसा करने का आग्रह किया था। वह गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के करीबी हैं।  इस बार मोदी लहर में वह राजकोट लोकसभा सीट से चुने गए।

सुप्रियो ने भी साधे राजनीति के सुर

गायक के तौर पर बाबुल सुप्रियो को भले ही उतनी लोकप्रियता नहीं मिली हो, जिसकी उन्हें इच्छा थी, लेकिन उनका राजनीतिक करियर शुरुआती दौर में ही उड़ान भरने लगा है। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में 44 वर्षीय सुप्रियो को भी बतौर मंत्री शामिल किया गया है। सुप्रियो पश्चिम बंगाल में भाजपा के दो सांसदों में से एक हैं। लोकसभा चुनाव में जब उन्हें आसनसोल से भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था, तब उनकी जीत की संभावनाएं बहुत अधिक नहीं लग रही थी, लेकिन मोदी के विकास एजेंडे के साथ उन्होंने कड़ा चुनाव प्रचार अभियान किया और मोदी की रैलियों के बूते चुनाव में जीत का परचम लहराने में सफल रहे। मई में ही सरकार में शामिल किए जाने वाले नेताओं में उनका भी नाम चला था, लेकिन उन्हें आज हुए विस्तार में मंत्रिमंडल में जगह मिली।

कठेरिया साधेंगे एक तीर से दो निशाने

राम शंकर कठेरिया दो बार आगरा से सांसद रह चुके हैं। वह भाजपा के पंजाब मामलों के प्रभारी भी रह चुके हैं। वह एक शिक्षक हैं एवं साथ ही भाजपा के गैर-भ्रष्टाचार अभियान का हिस्सा भी हैं। दलितों में भाजपा के विकास के पीछे उनका काफी बड़ा हाथ रहा है। कठेरिया भी दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। माना जा रहा है कि दलित नेता कठेरिया के मंत्री बनने से भाजपा को उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पंजाब में भी फायदा मिलेगा। वह पंजाब में पार्टी के प्रभारी हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पंजाब में भी फायदा मिलेगा। वह पंजाब में पार्टी के प्रभारी हैं। लोकसभा सदस्य के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में कठेरिया कई समितियों के सदस्य रहे।  वह शहरी विकास पर समिति, याचिका समिति तथा ग्रामीण विकास पर परामर्श समिति में शामिल रहे हैं। वह कई किताबें भी लिख चुके हैं।

शामिल हुए कम मशहूर चेहरे भी

साध्वी ज्योति को मिला भाजपा मजबूत करने का इनाम

मोदी सरकार में मंत्री बनीं 'साध्वी निरंजन ज्योति' अपने धार्मिक प्रवचनों के लिए पहचानी जाती हैं। उन्होंने भाजपा को उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े वर्ग के बीच मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। लोकसभा चुनाव में वह उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से जीतकर लोकसभा पहुंची हैं। माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी से भाजपा को कश्यप और निषाद समुदायों का समर्थन मिला। वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित होने से पहले वर्ष 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

सांवर लाल शिक्षा के साथ राजनीति का भी गुण

अजमेर के सांसद सांवर लाल जाट कॉमर्स में डॉक्टरेट हैं। राजनीति में आने से पहले वह राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे। उन्होंने राजनीति में अपनी शुरुआत 1990 में जीत के साथ की थी। इसके बाद वह 1993, 1998 और 2003 का विधानसभा चुनाव भी जीत गए। उन्होंने 2003 से 2008 तक सिंचाई मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 2013 में उन्होंने सिंचाई और जल संसाधन मंत्री के रूप में वसुंधरा राजे के कैबिनेट में योगदान किया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट को हराकर 16 वें लोकसभा चुनाव में अपनी जगह बनाई।

सांपला ने तय किया प्लंबर से मंत्री तक का सफर

किसी जमाने में प्लंबर के काम से गुजर बसर करने वाले विजय सांपला का जीवन कड़े संघर्ष की कहानी है। सांपला को पंजाब में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। सांपला ने पंजाब की होशियारपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। भाजपा ने 2012 में पंजाब विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर लड़ा था लेकिन हरियाणा में विधानसभा चुनाव में मिली शानदार सफलता से ऐसी अटकलें हैं कि भाजपा पंजाब में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने या फिर अकेले मैदान में उतरने की योजना बना सकती है।

मोदी आज करेंगे विस्तारित मंत्रिमंडल की पहली बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को विस्तारित कैबिनेट की पहली बैठक की अध्यक्षता करेंगे और उसके बाद मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। एक सरकारी सूत्र ने बताया, 'सोमवार शाम साढ़े पांच बजे कैबिनेट की बैठक होगी और उसके बाद पूरी मंत्रिपरिषद की बैठक होगी।' केंद्रीय कैबिनेट में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर और तीन अन्य को शामिल किए जाने के बाद यह बैठक होगी। मंत्रिपरिषद में रविवार को  21 नए सदस्यों को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मई में कार्यभार संभालने के बाद मंत्रिमंडल में यह पहला फेरबदल था। पर्रिकर को  रक्षा मंत्रालय का कार्यभार मिलना तय माना जा रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली अभी तक इसे अतिरिक्त प्रभार के तौर पर संभाल रहे थे। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की संख्या 45 से बढ़कर 66 हो गई है। प्रधानमंत्री सहित 27 कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि 13 स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री हैं। मंत्रिपरिषद में भी 26 राज्य मंत्री हैं। इस बीच मोदी ने आज अपने नए मंत्रियों को बधाई दी और ट्वीट किया, 'उन सभी साथियों को बधाई देता हूं, जिन्होंने आज शपथ ली है। भारत की विकास यात्रा में उनके साथ काम करने के लिए बेहद उत्साहित हूं।'

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