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शिवसेना बगैर बढ़ा सरकार का आकार
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली November 09, 2014

सत्ता संभालने के करीब 6 माह बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए आज 21 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सरकार में अब मंत्रियों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। नए मंत्रियों में 4 को कैबिनेट का दर्जा मिला है जबकि तीन को स्वतंत्र प्रभार वाला राज्यमंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही 14 को राज्य मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर (उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए सोमवार को भरेंगे नामांकन), जेपी नड्डा (हिमाचल प्रदेश), वीरेंद्र सिंह (हरियाणा) और मंत्रिमंडल के विस्तार के ठीक पहले शिवसेना छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुरेश प्रभु को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मंत्रियों को विभागों का आवंटन मंगलवार को किया जा सकता है।

हालांकि इस मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही भाजपा और शिवसेना के बीच दूरियां और बढ़ती नजर आईं। नाटकीय घटनाक्रम के तहत शिवसेना की ओर से मंत्री पद के लिए नामित अनिल देसाई को दिल्ली से वापस बुला दिया गया। देसाई मंत्री पद की शपथ लेने के लिए अपनी पत्नी के साथ दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंच चुके थे। दरअसल, भाजपा की ओर से महाराष्ट्र में शिवसेना की किसी भी शर्त को माने जाने से इनकार करने के बाद पार्टी ने देसाई को वापस मुंबई बुला लिया। हालांकि इससे पहले सुरेश प्रभु ने शिवसेना से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इससे दोनों दलों के बीच खटास और बढ़ी है। इस बीच, उद्धव ठाकरे ने मुंबई में कहा कि भाजपा यदि राष्टï्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का समर्थन स्वीकार करती है तो शिवसेना महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठेगी।

मंत्रिमंडल में बड़ी संख्या में पेशेवरों, खासकर कारोबार से जुड़े लोगों को जगह मिली है। तेेलुगू देशम पार्टी ने वाई एस चौधरी को नामित किया था, जो बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े कंपनी समूह का परिचालन करते हैं। झारखंड से सांसद और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सिन्हा निवेश बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। नोएडा से सांसद महेश शर्मा पेशे से चिकित्सक हैं और हेल्थकेयर संस्थान चलाते हैं। सुरेश प्रभु पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेट हैं और उन्हें जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ के तौर पर भी जाना जाता है। प्रभु कई निवेश बैंकिंग फर्मों के सलाहकार भी हैं। मनोहर पर्रिकर ने आईआईटी से इंजीनियरिंग की है और एक सलाहकार कंपनी भी चलाते थे। राजीव प्रताप रूड़ी पेशेवर पायलट हैं। हालांकि इन्हें किस सोच के साथ मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है यह अभी स्पष्टï नहीं है क्योंकि अभी विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है। पिछले मंत्रिमंडल पर जहां अरुण जेटली की छाप नजर आई थी, वहीं इस बार मंत्रिमंडल के विस्तार में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का स्पष्टï प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है। दरअसल, शाह ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए मंत्रियों के चयन में अहम भूमिका निभाई है।

पश्चिम बंगाल से बाबुल सुप्रियो को मंत्री बनाया गया है जबकि वरिष्ठï सांसद चंदन मित्रा को दरकिनार किया गया। बिहार में कभी लालू प्रसाद के करीबी रहे रामकृपाल यादव को भी राज्य मंत्री बनाया गया है। रामकृपाल ने लालू की बेटी मीसा भारती को लोकसभा चुनावों में शिकस्त दी थी। भाजपा इनके जरिये बिहार में अन्य पिछड़े वर्ग को अपने पाले में करने की जुगत में है। बिहार से मोदी के कट्टर समर्थक गिरिराज सिंह को भी मंत्री बनाया गया है। पार्टी के मुस्लिम चेहरा मुख्तार अब्बास नकवी को भी मंत्री बनाया गया है। लेकिन बिहार में लोकसभा चुनाव हारने वाले शाहनवाज हुसैन को मंत्री पद नहीं मिल सका। उत्तर प्रदेश से पार्टी ने फतेहपुर अमर सिंह को हरा कर सांसद बनीं साध्वी निरंजन ज्योति को राज्य मंत्री बनाया है।

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले वीरेंद्र सिंह को जाट होने का फायदा मिला और पार्टी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया है। सांवरलाल जाट को भी राजस्थान कोटे से राज्य मंत्री बनाया गया है। राजस्थान में भाजपा के जितने सांसद हैं, उसके मुताबिक मंत्रिमंडल में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है। केरल और ओडिशा जैसे राज्य, जहां भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है पार्टी ने वहां से किसी को मंत्री नहीं बनाया है।

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