बिजनेस स?टैंडर?ड - सावजी ढोलकिया ने तोहफों से खुश कर दिया
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सावजी ढोलकिया ने तोहफों से खुश कर दिया
विनय उमरजी और कल्पेश दामोर / अहमदाबाद October 24, 2014

पिछले कुछ दिनों से सूरत के हीरा निर्यातक सावजी ढोलकिया के पास नौकरी के आवेदनों की भरमार हो गई है। हर रोज उनके पास 35-40 लोगों के आवेदन आ रहे हैं जो उनके साथ काम करना चाहते हैं। रातोरात ढोलकिया एक ऐसे नियोक्ता बन गए हैं जिनकी पूछ बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि पिछले रविवार को हरि कृष्णा एक्सपोर्ट के 50 वर्षीय संस्थापक और साझेदार (निर्माण एवं प्रबंधन) ने अपने 1200 कर्मचारियों को उनकी वफादारी के बदले दीवाली के तोहफे के तौर पर फ्लैट, कारें और गहने दिए। दरअसल वह उन कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहते थे जिन्होंने कंपनी की वृद्धि और उसके दायरे को बढ़ाने में मदद की थी। करीब 491 कर्मचारियों को कार का तोहफा मिला और 207 कर्मचारियों को फ्लैट खरीदने के लिए धन और 570 कर्मचारियों को गहने दिए गए। हरेक कर्मचारी को 4 लाख रुपये का उपहार मिला। आप चाहे इसे परोपकार या कर्मचारी प्रबंधन कहें लेकिन ढोलकिया के लिए यह मानवता से जुड़ी बेहतरीन सीख है।

ढोलकिया की कहानी भी किसी सपने से कम नहीं है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के अमरेली गांव के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले ढोलकिया 13 साल की उम्र में सूरत आए थे। उन्होंने चौथी कक्षा के बाद स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी। उनके एक चाचा सूरत में हीरा कारोबार से जुड़े थे। ढोलकिया उनके लिए काम करने लगे। उस वक्त और अब भी यह आलम है कि हीरा उद्योग बेहद उथल-पुथल के दौर से गुजरो रहा है और कई छोटे कारोबारी, जो सौराष्ट्र के किसान हैं, फिर से खेती के काम को अपना लेते हैं। जब हालात थोड़े बेहतर नजर आते हैं तब वे फिर से हीरा कारोबार से जुड़ जाते हैं।

वक्त बीतने के साथ ही ढोलकिया के दो भाई हिम्मत और तुलसी ने भी उनके साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया। ढोलकिया चार भाइयों में से दूसरे नंबर पर हैं। उनका एक ही बेटा है जो न्यूयॉर्क में व्यापार प्रबंधन की पढ़ाई कर रहा है। ढोलकिया बंधुओं ने 1984 में अपना हीरे का कारोबार शुरू किया। सात साल बाद उनके छोटे भाई घनश्याम भी उससे जुड़ गए। उन्होंने मुंबई में अपना एक दफ्तर खोला। कंपनी ने अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों में हीरे का निर्यात शुरू किया।

पहले वर्ष में ही कंपनी का निर्यात 1 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। ढोलकिया कहते हैं, 'हमारे कर्मचारियों ने 6,000 करोड़ रुपये के निर्यात को संभव बनाया। हमने हमेशा अपने कर्मचारियों को प्रेरित करने में भरोसा जताया और इस बार कर्मचारियों की वफादारी और उनकी विश्वसनीयता से जुड़ा अभियान चलाया ताकि ऐसे 1,200 कर्मचारियों की पहचान की जा सके जिन्होंने हमारी वृद्धि में योगदान दिया है।' कंपनी ने इस वफादारी अभियान के लिए करीब 50 करोड़ रुपये अलग रखे थे। ऐसा पहली बार नहीं है जब ढोलकिया ने कर्मचारियों पर ऐसी उदारता दिखाई हो। पिछले साल भी 6,500 कर्मचारियों वाली इस कंपनी ने अपने 72 कर्मचारियों को कार का तोहफा दिया था। ढोलकिया कहते हैं, 'कार का तोहफा देना कोई नई बात नहीं है। हमने 18 साल पहले भी तीन कर्मचारियों को मारुति कार का तोहफा दिया था जो बाद में हमारे कारोबार में साझेदार बन गए। हम उन्हें अपने कर्मचारी नहीं बल्कि अपने शेयरधारक के तौर पर देखते हैं।' बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की पहचान करना भी एक मुश्किल काम है।

ढोलकिया अपने इन-हाउस सॉफ्टवेयर के जरिये कर्मचारियों के प्रदर्शन पर निगाह रखते हैं जिसका इस्तेमाल कंपनी पिछले पांच सालों से करती आ रही है। वह खुद भी अपने कर्मचारियों का हौसला बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। हीरा प्रसंस्करण और कटाई जैसे उद्योग में कर्मचारियों को खुश रखना अहम है क्योंकि कारोबार में सक्षम श्रमिकों का होना जरूरी है। ढोलकिया इस बात को बखूबी समझते हैं।

उनके कर्मचारियों को भी इस बात का अंदाजा है कि ढोलकिया उनमें कितनी दिलचस्पी लेते हैं। एक ऐसे कर्मचारी के मुताबिक, जो कंपनी के साथ वर्ष 2005 से जुड़े हैं, ढोलकिया अपने कर्मचारियों की हौसला अफजाई करने के लिए किसी भी हद चले जाते हैं ताकि कर्मचारी अपने काम को पूरी लगन के साथ करें। संस्थापक और अध्यक्ष ढोलकिया, कंपनी के सुझाव पर हर रोज गौर करते हैं ताकि कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान निकाला जाए।

उनकी इन्हीं कोशिशों की वजह से उन्हें उद्योग में सम्मान मिलता है। जेम्स ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने उनकी रेटिंग एक थ्री-स्टार निर्यात कंपनी के तौर पर की है। सूरत डायमंड एसोसिएशन ने भी अपने कर्मचारियों के हौसले बुलंद रखने के लिए ढोलकिया के तरीकों की काफी तारीफ की है। इस संगठन का मानना है कि ऐसी पहल से ज्यादा लोग इस उद्योग से जुड़ेंगे। इस संगठन के अध्यक्ष दिनेश नवादिया का कहना है, 'ऐसे वक्त में जब युवा हीरा उद्योग से दूर हो रहे हैं, इन कदमों से इस क्षेत्र में ज्यादा आकर्षित होंगे।'

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