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ऑयल इंडिया: परिदृश्य में आ रहा सुधार
उज्ज्वल जौहरी /  October 19, 2014

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सरकारी तेल एवं गैस कंपनियों के लिए वरदान साबित हो रही है। तेल कीमतों में गिरावट वर्ष 2010 सबसे निचले स्तर के आसपास है। कीमतों में नरमी से न सिर्फ अंडररिकवरी में बड़ी कमी आई है बल्कि इससे कार्यशील पूंजी में भी बदलाव आया है। अंडररिकवरी बढ़ गई थी, क्योंकि तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के खुदरा पेट्रोलियम उत्पाद उत्पादन की लागत से नीचे पहुंच गए। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ सार्वजनिक क्षेत्र की सभी तेल एवं गैस कंपनियों को मिला है और अपस्ट्रीम कंपनियों ऑयल इंडिया और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) पर इसका अधिक सकारात्मक असर दिखा है। इससे बड़ी मात्रा में सब्सिडी (अंडररिकवरी) बोझ को सहन करने में मदद मिलेगी।
डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि ओएनजीसी और ऑयल इंडिया तेल सब्सिडी में कमी की प्रमुख लाभार्थी होंगी, क्योंकि उन्हें लगभग 65 फीसदी तेल सब्सिडी (शेष सरकार द्वारा वहन की जाएगी) के वित्त पोषण में मदद मिलेगी। ऑयल इंडिया के लिए अन्य लाभ भी हैं।
ऑयल इंडिया अपना गैस उत्पादन 2.4 अरब घन मीटर से बढ़ा कर 4 अरब घन मीटर किए जाने की संभावना तलाश रही है। इससे दीर्घावधि में कंपनी के परिदृश्य में सुधार आएगा। संभावित गैस कीमत वृद्घि से त्वरित लाभ मिलेगा। सरकार द्वारा इस संबंध में तुरंत निर्णय लिए जाने की संभावना है। इस वजह से यह शेयर अपनी खोई हुई चमक फिर से हासिल कर सकता है।
डीजल मूल्य निर्धारण में सुधार भी सकारात्मक है और ब्रेंट क्रूड जून के 115 डॉलर प्रति बैरल की ऊंचाई से 24 फीसदी गिर कर 84-85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है जिससे लाभ को मजबूती मिली है। ओएमसी को कई वर्षों तक नुकसान झेलने के बाद प्रति लीटर डीजल पर 3 रुपये से कुछ अधिक का मुनाफा हासिल होने का अनुमान है। हालांकि सरकार डीजल कीमतों में कटौती कर सकती है, लेकिन तेल एवं गैस कंपनियों द्वारा बिक्री पर शून्य अंडररिकवरी काफी हद तक सकारात्मक है।
डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि डीजल सब्सिडी समाप्त होने से शुद्घ क्रूड प्राप्तियां वित्त वर्ष 2016 तक 24 फीसदी बढ़ कर 58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकती हैं। उनका मानना है कि अधिक प्राप्तियों की वजह से वित्त वर्ष 2014-2020 के दौरान ऑयल इंडिया के नकदी प्रवाह में सालाना 70 करोड़ डॉलर (यानी वित्त वर्ष 2014 के दौरान 160 फीसदी) का सुधार आएगा।
बेहतर प्राप्तियों, ऊंची गैस कीमतों और उत्पादन में सुधार से ऑयल इंडिया की आय एवं पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) को मजबूती मिलने की संभावना है। विश्लेषकों को कंपनी के आरओई में 500 आधार अंक की वृद्घि और गैस उत्पादन वित्त वर्ष 2014-17 के दौरान सालाना 6.8 फीसदी तक बढऩे का अनुमान है।
यदि 50:50 के अनुपात में सब्सिडी विभाजन की व्यवस्था को सरकार द्वारा स्वीकृत किया जाता है तो कंपनी को इसका फायदा मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सब्सिडी विभाजन के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो सब्सिडी बोझ में 20 फीसदी की कमी देखी जा सकती है। हालांकि उत्तर-पूर्व में किसी तरह की गड़बड़ी की वजह से उत्पादन और विस्तार में व्यवधान का जोखिम पैदा हो सकता है।

Keyword: Oil india, Crude oil, OMC,
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