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हरियाणा: चुनाव बाद नए सिरे से जुड़ेंगी गठबंधन की गांठ!
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली October 14, 2014

हरियाणा चुनाव से एक दिन पहले राजनीतिक दल चुनाव के बाद अपने भविष्य को लेकर चिंता कर रहे हैं। वर्ष 2017 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और तब तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और गठबंधन में उसके साझेदार शिरोमणि अकाली दल के पास समझौते व गठजोड़ को दुरुस्त करने के लिए पर्याप्त वक्त है। हरियाणा चुनाव के दौरान गठबंधन में तमाम गाठें पड़ चुकी हैं, क्योंकि अकाली दल को 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा के चुनाव में इंडियन नैशनल लोक दल (आईएनएलडी) और भाजपा में से एक को चुनना था। उसने भाजपा की तुलना में आईएनएलडी को तरजीह दी।
यदि भाजपा का हरियाणा चुनाव में अकेले उतरने का दांव कामयाब रहता है तो पार्टी शिरोमणि अकाली दल से अलग होने और 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने का फैसला भी कर सकती है।
भले ही भाजपा का कोई भी नेता खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर शिरोमणि अकाली दल के रुख को लेकर खासी चिंता है क्योंकि उसने केंद्र में सहयोगी होने के बावजूद भाजपा के बजाय आईएनएलडी के साथ जाना उचित समझा।
भाजपा को हरियाणा के कम से कम 30 विधानसभा क्षेत्रों पर अकाली दल के कार्यकर्ताओं से जूझना पड़ रहा है। इनमें विशेषकर अंबाला और कालांवाली (जहां अकाली दल ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं), कुरुक्षेत्र, करनाल, डबवाली, पंचकूला, यमुनानगर, जगाधरी, लाडवा, रानिया, ऐलनाबाद शामिल हैं, जहां सिखों की बड़ी आबादी निवास करती है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने हरियाणा में खासा प्रचार किया है। भले ही यह संख्या सीटें जिताने के लिहाज से कम हो, लेकिन इससे गठबंधन पर दबाव बढ़ा है। अगर चुनाव में आईएनएलडी हरियाणा में विजेता के रूप में उभरती है तो भाजपा अपनी हार के लिए अकाली दल को जिम्मेदार ठहरा सकती है और आलाकमान से गठबंधन पर फिर से विचार करने की मांग की जा
सकती है।
अभी तक कोई भी भाजपा नेता चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाओं पर टिप्पणी करने को तैयार नहीं है, लेकिन वे हालात पर करीब से नजर रखे हुए हैं।
दूसरी तरफ कांग्रेस की कोई मजबूरी नहीं है। वह आईएनएलडी या अकाली दल किसी के भी साथ नहीं जा सकती और कांग्रेस भरोसा जाहिर कर रही है कि वह दो बार की सत्ताविरोधी लहर से उबरकर तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रहेगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कुछ दिन पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्कार में बताया था, 'हमें राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने का पूरा भरोसा है। कांग्रेस शासन के लिए हालात बेहद सकारात्मक हैं।'
मई में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य की 10 सीटों में से महज एक सीट मिली थी, जबकि भाजपा को 7 और आईएनएलडी को दो सीट हासिल हुई थीं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नौ सीटें जीतने में कामयाब रही थी। हुड्डा कहते हैं कि हरियाणा में कांग्रेस शासन के दौरान राज्य प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश के मामले में देश में शीर्ष पर पहुंच गया था।
उन्होंने कहा, 'हम अधिकांश मानदंडों पर गुजरात से कहीं आगे हैं। हम 10 साल के कांग्रेस के शासन के दौरान राज्य को 14वें पायदान से शीर्ष पर ले आए हैं।'

Keyword: Haryana, Election, Political parties,
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