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ई-कॉमर्स से जो जुड़े हैं, वे बढ़े हैं
राम प्रसाद साहू और शीतल अग्रवाल / मुंबई October 12, 2014

भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा आधार है, लेकिन बिजनेस टु कंज्यूमर (बी2सी) ई-कॉमर्स बाजार मौजूदा समय में महज 13 अरब डॉलर का होने का अनुमान है। हालांकि मुख्य रूप से युवा उपयोगकर्ताओं की आबादी, कम डिवाइस एवं एक्सेस लागत के साथ साथ इंटरनेट की तेज स्पीड और स्मार्टफोन की बढ़ती पैठ से ग्राहक आधार में तेजी आने और इंटरनेट के चलन के लिए परिवेश अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि ई-कॉमर्स रिटेलिंग या ई-टेलिंग की बाजार वैल्यू वर्ष 2020 तक 60 अरब डॉलर होगी। भारत में मौजूदा समय में लगभग 25 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और इनमें महज 10वां हिस्सा ही (2.5 करोड़) ऑनलाइन खरीदार है। अगले 6 वर्षों में यह आंकड़ा बढ़ कर दोगुना हो जाने का अनुमान है। हालांकि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और खरीदारों का मौजूदा आकार चीन जैसे देशों की तुलना में छोटा है जिससे घरेलू ई-कॉमर्स सेगमेंट को वर्ष 2013 में 80 फीसदी की दर से बढऩे में मदद मिली।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि पिछले तीन वर्षों में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या दो गुना होने के पीछे डिजिटल माध्यम में बदलाव अहम वजह है। वर्ष 2013 में स्मार्टफोन की बिक्री सालाना आधार पर 200 फीसदी बढ़ कर 5 करोड़ यूनिट पर रही और 'कैश ऑन डिलीवरी' जैसी नवीनतम व्यावसायिक प्रणालियों की पेशकश स्थानीय लोगों की पसंद के अनुरूप है। हालांकि मौजूदा ई-कॉमर्स का 70 फीसदी हिस्सा ऑनलाइन ट्रेवल सेगमेंट का है और क्लासीफाइड (ओएलएक्स, क्विकर) और री-टेलिंग (फ्लिपकार्ट, स्नैपडील) में तेजी को देखते हुए अन्य सेगमेंटों में भी इजाफा होने का अनुमान है। मजबूत संभावनाओं को देखते हुए कई बड़ी भारतीय ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कोष की व्यवस्था कोई समस्या नहीं है और इन कंपनियों को अपने परिचालन का विस्तार करने में मदद मिलनी चाहिए।

हालांकि भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में कुछ ही कंपनियां मौजूद हैं। हालांकि ज्यादातर विश्लेषकों ने इन्फो एज, जस्ट डायल और ब्लू डार्ट जैसे नामों पर जोर दिया है। उनके अनुसार ये कंपनियां भारतीय ई-कॉमर्स में तेजी का लाभ उठा सकती हैं। मेकमाईट्रिप अन्य विकल्प है, लेकिन यह अमेरिकी बाजारों में सूचीबद्घ है। हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इनमें से ज्यादातर कंपनियों के लिए मूल्यांकन श्रेष्ठ है और इन शेयरों में गिरावट इन्हें खरीदने के लिहाज से अच्छा अवसर साबित हो सकती है।

ब्लू डार्ट एक्सप्रेस

संगठित एयर एक्सप्रेस बाजार में कंपनी की 49 फीसदी की बाजार हिस्सेदारी है और इसका लगभग 18 फीसदी राजस्व ई-कॉमर्स सेगमेंट से आता है। अगले पांच वर्षों के दौरान 50-60 फीसदी की उद्योग वृद्घि को देखते हुए ऑनलाइन कॉमर्स सेगमेंट में अच्छी तेजी आने का अनुमान है। हालांकि कंपनी का एबिटा मार्जिन लगभग 12 फीसदी पर है और ई-कॉमर्स राजस्व में इसकी बड़ी भागीदारी है। इसके मजबूत ग्राहक आधार, व्यापक नेटवर्क और मूल कंपनी डीएचएल एक्सप्रेस से तकनीकी समर्थन से कंपनी को एक्सप्रेस सर्विस सेगमेंट और खासकर तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स व्यवसाय से अच्छी बढ़त मिलनी चाहिए। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि ई-कॉमर्स कंपनी के लिए विकास का प्रमुख वाहक होगा, लेकिन यह शेयर वित्त वर्ष 2016 के ईपीएस अनुमानों के 59 गुना पर कारोबार कर रहा है। मूल्यांकन में मुख्य रूप से इस साल अप्रैल से तेजी आई है। इसे देखते हुए निवेशक इस शेयर की खरीदारी से पहले बड़ी गिरावट का इंतजार कर सकते हैं।

इन्फो एज

इन्फो एज कई क्लासीफाइड वेबसाइटों की मालिक है जिनमें नौकरी डॉटकॉम, 99एकड़ डॉटकॉम, जोमेटो डॉटकॉम, जीवनसाथी डॉटकॉम मुख्य रूप से शामिल हैं। नौकरी डॉटकॉम और 99एकड़ डॉटकॉम अपने संबंधित क्षेत्रों में दिग्गज हैं और समूह के राजस्व में इनका अहम योगदान है। आर्थिक बहाली नौकरी डॉटकॉम और 99एकड़ डॉटकॉम के लिए शुभ संकेत है।

नौकरी डॉटकॉम के लिए प्रतिस्पर्धा लोअर-टु-मिड सेगमेंटों में कम है जहां इसका अच्छा दबदबा है, लेकिन इसे मैजिकब्रिक्स, कॉमनफ्लोर्स, इंडियाप्रॉपर्टी और हाउसिंग.को.इन से तगड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है जो चिंताजनक है और विश्लेषकों की मानें तो वित्त वर्ष 2017 में 99एकड़ डॉटकॉम को भरपाई के स्तर पर पहुंचने में कठिनाई आ सकती है। वहीं जोमेटो और मेरिटनेशन अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन इन्हें लगातार निवेश की जरूरत है।

जीवनसाथी डॉटकॉम तीसरे नंबर की कंपनी है और वह मौजूदा समय में नुकसान में चल रही है। प्रबंधन ने इस वेबसाइट के कायाकल्प पर फिलहाल कोई बड़ा निवेश करने की योजना नहीं बनाई है। विश्लेषकों का कहना है कि इन्फो एज का राजस्व और शुद्घ लाभ वित्त वर्ष 2014-17 के दौरान 23 फीसदी और 29 फीसदी की दर से बढ़ सकता है। इन्फो एज की पॉलिसीबाजार डॉटकॉम, माइडाला डॉटकॉम, हैप्पीलीअनमैरिड डॉटकॉम जैसे उद्यमों में बड़ी हिस्सेदारी है जिससे मध्यावधि से दीर्घावधि में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये कोष जुटाने की अच्छी गुंजाइश बरकरार है।

जस्ट डायल

जस्ट डायल भारत में वॉइस मीडियम पर प्रमुख स्थानीय सर्च इंजन है, हालांकि इसके ऑनलाइन (वेबसाइट) और मोबाइल एप्लीकेशन सर्च प्लेटफॉर्म अभी भी शुरुआती अवस्था में ही हैं। इंटरनेट के जरिये सर्च की संख्या जस्ट डायल के लिए बढ़ रही है और इसने विकास का अच्छा अवसर प्रदान किया है। कंपनी ने हाल में सर्च प्लस लॉन्च किया है जो ऑफलाइन लेनदेन वाले सर्च के लिए अहम है। उदाहरण के लिए, उपयोगकर्ता स्थानीय रेस्तरां की तलाश कर सकता है और टेबल/फूड का ऑर्डर बुक कर सकता है।

ऑफरों की पेशकश हालांकि शुरुआती स्तर में है और भविष्य में यह जस्ट डायल के इंटरनेट और मोबाइल व्यवसाय की वृद्घि में अहम भूमिका निभाएगी। हालांकि प्रतिस्पर्धी सर्च इंजनों (गूगल प्लस, आस्कमी, गेटइट आदि), वर्टिकल वेबसाइटों (जोमेटो, बुकमाईशो आदि) से मिल रही प्रतिस्पर्धा एक प्रमुख जोखिम है। विश्लेषकों को कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2014-17 के दौरान 30-32 फीसदी की सीएजीआर से बढऩे का अनुमान है।

Keyword: internet, B2C, e commerce,,
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