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'बातें हुईं बहुत, अब अमल और सुधार की है जरूरत'
श्यामल मजूमदार और मनोजित साहा / मुंबई October 09, 2014

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख से मौजूदा आर्थिक हालात सहित कई विषयों पर श्यामल मजूमदार और मनोजित साहा के साथ बातचीत के विशेष अंश।

नई सरकार के आने से उद्योग जगत में उल्लास पर क्या कहेंगे?

मुझे यह उल्लास तार्किक ही लगता है। तिमाही वृद्घि बढ़ी है, मुद्रास्फीति अपेक्षाकृत कम है, जिंसों के दाम घट रहे हैं, चालू खाता सहज स्तर पर है, स्वर्ण आयात घटा है और डीजल पर सब्सिडी लगभग खत्म हो गई। हम डीजल कीमतों के विनियंत्रित होने का इंतजार कर रहे हैं। असल में चुनाव बाद हमें डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद है।

किसी आशंका के बादल?

अनिश्चितता ने बहुत नुकसान किया, जो निश्चित ही दूर होनी चाहिए। वक्त आ गया है कि सरकार फैसले ले। मिसाल के तौर पर कोयले के बारे में किसी को कोई अंदाजा नहीं कि क्या होने जा रहा है। कोल इंडिया का कहना है कि वह नए ब्लॉक का काम हाथ में नहीं ले सकती क्योंकि इसके लिए उसके पास मानव संसाधन का अभाव है। कंपनी कई महीनों से बिना चेयरमैन के काम कर रही है। ये कोई बड़े फैसले नहीं हैं। गैस कीमतों का फैसला भी दो बार टल गया। इससे बिजली से लेकर उर्वरक जैसे क्षेत्रों का भविष्य अधर में है। बीएसएनएल दूसरी एयर इंडिया बनती जा रही है। फैसले लिए जाने चाहिए, चाहे जैसे लिए जाएं।

मेक इन इंडिया पर आपकी राय?

वनिर्माण को मजबूती देने की यह अच्छी पहल है लेकिन हमें जमीन अधिग्रहण और श्रम जैसी चुनौतियां भी लगातार झेलनी पड़ रही हैं। कारोबार की राह आसान बनाने की प्रधानमंत्री की बातों को अब अमली जामा पहनाने की जरूरत है। इसमें सिंगल विंडों मंजूरी के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए आसान नियमों की भी दरकार होगी।

बड़े सुधार की उम्मीद कब है?

ये सुधार जटिल हैं। श्रम सुधारों और जीएसटी का भाजपा शासित राज्य अब भी विरोध कर रहे हैं। जीएसटी को सिरे चढ़ाना वित्त मंत्री के लिए बड़ी चुनौती होगी। बजट की ही बात करें तो 58,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य दूर की कौड़ी नजर आ रहा है।

क्या आपको लगता है कि मकानों के दाम घटेंगे?

आपको मकान की कीमतों का लोगों की तनख्वाहों और उन्हें खरीदने की क्षमता से तुलना करनी चाहिए। जमीन की ऊंची कीमतों के चलते मकान महंगे हैं। हमें मकानों के लिए ज्यादा जमीन निकालनी होगी और इस क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करना होगा।

आपने हमेशा सरकार के साथ काम किया है। क्या आप नई सरकार के साथ किसी भूमिका में काम करेंगे?

मेरी कमजोरी यही है कि मैं ना नहीं कह सकता। यही वजह है कि मैं कई समितियों में नजर आता हूं। मुझे नहीं लगता कि नई सरकार ने ज्यादा समितियां गठित की हैं। वैसे, मुझसे अब तक संपर्क नहीं किया गया है।

Keyword: HDFC, bank, deepak parekh,,
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