बिजनेस स्टैंडर्ड - बौद्घिक संपदा पर भी होगी बात
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बौद्घिक संपदा पर भी होगी बात
नयनिमा बसु / नई दिल्ली September 24, 2014

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान बौद्घिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़े मुद्दों से निपटने संबंधी संवाद व्यवस्था की शुरुआत भी हो सकती है। यह मसला लंबे समय से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में तनाव का सबब है ऐसे में यह प्रधानमंत्री के दौरे की बेहद अहम उपलब्धियों में से एक होगी।

आईपीआर में संवाद व्यवस्था को मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की मुलाकात के बाद जारी किए जाने वाले संयुक्त वक्तव्य में भी स्थान मिल सकता है। एक वरिष्ठï अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस व्यवस्था को भारत-अमेरिका व्यापार नीति मंच लागू करेगा जिसकी बैठक आगामी नवंबर में होनी है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के बाद अमेरिकी कारोबारी प्रतिनिधि (यूएसटीआर) माइकल फ्रॉमैन के भारत आने की उम्मीद है। वह यहां उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) निर्मला सीतारामन के साथ मिलकर उक्त संवाद व्यवस्था को लागू करने की दिशा में पेशकदमी करेंगे।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस दिशा में सकारात्मक बातचीत होने की उम्मीद है। ओबामा के साथ मुलाकात के दौरान मोदी उन्हें 2015 तक व्यापक आईपीआर नीति लाने की योजना से अवगत करा सकते हैं। इसके जरिये देश के पेटेंट कानूनों को मजबूत बनाया जाएगा। आईपीआर और पेटेंट से संबंधित मसले जिनमें अनिवार्य लाइसेंसिंग और पेटेंटों को हमेशा के लिए देने की बात शामिल है, जैसे मसलों पर भी दोनों नेता बात कर सकते हैं।

29 सितंबर को ओबामा वॉशिंगटन में मोदी के लिए एक निजी रात्रिभोज दे रहे हैं। इसमें यूएसटीआर के फ्रॉमैन और अमेरिकी वाणिज्य सचिव पेनी प्रिट्जकर शामिल हैं। 30 सितंबर को जब दोनों नेता द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे तब इन तमाम मसलों पर विस्तार से बातचीत होगी। उल्लेखनीय है कि इस माह के आरंभ में सरकार की योजनाओं का खुलासा करते हुए सीतारामन ने कहा था कि नई नीति देश के आईपीआर और पेटेंट कानूनों को एक ढांचे के तहत ला देगी। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया था कि देश में आईपीआर का माहौल अच्छा है और वह विश्व व्यापार संगठन के समझौतों के अनुरूप है।

अमेरिकी उद्योग जगत खासतौर पर दवा कंपनियां अपने लॉबीइंग संगठन बिग फार्मा की मदद से अमेरिकी प्रशासन पर लगातार यह दबाव बनाती रही हैं कि वह आईपीआर नीति में बदलाव करने के लिए भारत के खिलाफ सख्त कदम उठाए। अमेरिका सर्वोच्च न्यायालय के गत वर्ष अप्रैल के फैसले से खासतौर पर नाखुश था जिसमें उसने स्विस दवा कंपनी नोवार्तिस की कैंसर दवा ग्लिवेक का पेटेंट आवेदन खारिज कर दिया था।

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