बिजनेस स?टैंडर?ड - ज्यादा सुधार से क्रियान्वयन पर पड़ता है असर
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ज्यादा सुधार से क्रियान्वयन पर पड़ता है असर
जयदीप घोष और चंदन किशोर कांत / मुंबई September 23, 2014

85 फीसदी खुदरा और 15 फीसदी संस्थागत निवेश वाले पोर्टफोलियो के साथ 50,986 करोड़ रुपये का फ्रैंकलिन टैम्पलन इंडिया (एफटीआईएल) खुदरा क्षेत्र की बड़ी म्युचुअल फंड कंपनियों में से एक है। एफटीआईएल के अध्यक्ष हर्षेंदु बिंदल ने जयदीप घोष और चंदन किशोर कांत को दिए साक्षात्कार में कहा कि म्युचुअल फंड उद्योग को विस्तार करने की दरकार है, लेकिन उन शहरों में जाने का कोई मतलब नहीं बनता जहां 30 एसेट मैनेजमेंट कंपनियां और 10 वितरक हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

शेयर बाजार में सुधार के साथ क्या बड़े व छोटे शहरों से निवेश की रकम के संग्रह में सुधार हुआ है?

निवेश की रकम के संग्रह में सुधार हुआ है, लेकिन हमें देश के सभी हिस्सों से इसमें सुधार की दरकार है। टी-15 व बी-15 की रेखा कृत्रिम है क्योंकि यहां कहीं भी कारोबार का पर्याप्त विस्तार नहीं हुआ है। छोटे शहरों से इसमें बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन ये भ्रामक भी हो सकते हैं। अभी उद्योग के पास 85 फीसदी टी-15 से और 15 फीसदी बी-15 से आता है। बाजार में तेजी के साथ इस अनुपात में बदलाव आएगा। ऐसे में 85 फीसदी में इजाफा होगा। ऐसे में लोग फिर कहेंगे कि बी-15 में गिरावट आ रही है। हमें दूसरे मानकों के आधार पर देखना होगा, मसलन क्या बी-15 शहरों में निवेशकों या वितरकों की संख्या बढ़ रही है। मेरा मानना है कि इसमें सुधार हो रहा है। हमने 10 जिले गोद लिए हैं। हम जागरूकता फैलाने की और उनके बीच वितरण की कोशिश कर रहे हैं।

एफटीआईएल फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान पेश करने से परहेज करता रहा है। नए डेट फंड नियमों का इस पर सबसे कम असर पड़ेगा। ऐसा फैसला क्यों लिया गया?

लंबे समय से हमने एफएमपी पेश नहीं किया है। इसकी कई वजहें हैं। जब नियम में बदलाव होता है और कहा जाता है कि फंड हाउस सांकेतिक प्रतिफल की घोषणा नहीं कर सकते तो उस योजना को बेचना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा अल्पावधि वाली योजनाएं हैं, जो आपकी बिक्री टीम को पर्याप्त मार्जिन के बिना काम पर लगा देता है। संभावना यह है कि अगर डिफॉल्ट होगा तो एएमसी इसे बेहतर बना देगी। एएमसी के पास इतना बड़ा बैलेंस शीट नहीं होता जो ऐसे निवेश की रक्षा कर सके। निश्चित तौर पर योजनाओं के आकार को देखते हुए हमें अपनी बाजार हिस्सेदारी घटानी पड़ी। ऊर्जित पटेल समिति की रिपोर्ट के बाद हमें अहसास हुआ कि आर्बिट्रेज को समाप्त कर दिया जाएगा। चूंकि हमने दो-तीन साल से कोई योजना पेश नहीं की थी, लिहाजा हमें लगा कि हम बेहतर स्थिति में है।

क्या खुदरा बाजार विकसित करने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है?

मेरी राय में हमारे पास रकम के प्रबंधन की विशेषज्ञता है और इसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए, चाहे जिसे भी इसकी दरकार हो। नियमों में बदलाव से पहले एक समय में हम दो बीमा कंपनियों की रकम का प्रबंधन कर रहे थे। एक ओर यह संस्थागत मामला था, लेकिन अंतत: यह खुदरा निवेशकों की रकम थी। जब हम भारत आए तो हम स्पष्ट थे कि यह खुदरा बाजार है। हमने इसमें अपनी जगह बनाई है। अगर आप 10 अग्रणी एएमसी को देखेंगे तो हमारा खुदरा आधार सबसे अच्छा है। 31 अगस्त को हमारा खुदरा व संस्थागत अनुपात 85 : 15 था।

दूसरे शहरों में विस्तार की योजना?

हम फिलहाल 33 शहरों में हैं। मुझे लगता है कि उद्योग के तौर पर हमें विस्तार करना चाहिए। लेकिन हमें लगता है कि चूंकि इक्विटी बाजार बेहतर है, ऐसे में हमें छोटे शहरों पर ध्यान देना चाहिए। हम उस बाजार में जाना चाहेंगे, जहां बढिय़ा वितरण नेटवर्क हो। ऐसे शहर हैं जहां 30 एएमसी हैं, लेकिन सिर्फ 10 वितरक। मुझे नहीं लगता कि ऐसे विस्तार का कोई मतलब बनता है।

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