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खराब प्रदर्शन करने वाले फंडों से निकलना ही बेहतर
नेहा पांडेय देवरस /  September 07, 2014

अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक और चार्टर्ड एकाउंटेंट अरविंद राव कहते हैं कि यह अपने पोर्टफोलियो पर फिर से गौर करने और उसमें बदलाव करने के लिए एक अच्छा वक्त है। इसकी वजह यह है कि आम बजट 2014-15 में आयकर से संबंधित नए निर्देश जारी कर दिए गए हैं और पूंजी बाजार भी काफी तेजी दर्ज कर चुका है।
विशेषज्ञों ने कहा कि पोर्टफोलियो का पुनर्गठन न सिर्फ संपत्ति आवंटन का पुन: संतुलन है, बल्कि अनचाही निवेश योजनाओं से अलग होना भी है। संपत्ति आवंटन को पूंजी को एक गैर निष्पादित आस्ति श्रेणी से या मुनाफा बुक करके किसी अन्य अच्छा प्रदर्शन कर रही संपत्ति श्रेणी में लगाकर फिर से संतुलित किया जा सकता है। अंजन दास जैसे कुछ उद्यमी नहीं जानते कि पोर्टफोलियो से अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाली म्युचुअल फंड योजनाओं को कैसे हटाया जाए। 35 वर्षीय उद्यमी यह समझने में नाकाम रहे हैं कि पोर्टफोलियो में किसी खास योजना को रखा जाना चाहिए या नहीं। ऐसी स्थिति में मदद के लिए कुछ सलाह दी जा रही हैं :

क्या रिटर्न उम्मीदों के अनुरूप है?
एलआईसी नॉमुरा म्युचुअल फंड के मुख्य परिचालन अधिकारी अनुतोष बोस कहते हैं, 'यदि एक खास म्युचुअल फंड योजना आपके लक्ष्य के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन कर रही है, तो उसे ऐसे ही रहने दीजिए। एक ऐसी स्थिति पर गौर कीजिए कि यदि आप पांच सालों में एक कार खरीदना चाहते हैं और इसके लिए आपको पांच लाख रुपये की जरूरत होगी। यदि आप इसके लिए सालाना 12 फीसदी रिटर्न हासिल करने के लक्ष्य के साथ एक निश्चित रकम निवेश करने का फैसला करते हैं और फंड से इतना रिटर्न हासिल हो रहा है तो यह फंड निवेश के लिहाज से सही है।' हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपको नियमित रूप से रिटर्न पर नजर रखना चाहिए। इसके लिए रिटर्न में एक फीसदी के भी अंतर और अपनी उम्मीदों के बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इक्विटी और संबंधित उत्पादों में अल्पकालिक तौर पर उतार-चढ़ावों पर गौर किया जा सकता है, लेकिन इसमें सालाना आधार पर प्रदर्शन का आकलन कीजिए। आपको अवधि खत्म होने से पहले अपनी पूंजी को छह महीने से एक साल तक की अवधि के लिए ऋण फंड या आवर्ती जमा में लगाना चाहिए। अगर आप ऋण फंडों में किए गए निवेश को तीन साल से कम वक्त में भुना लेते हैं तो इसमें कर का भुगतान करना होगा। बोस का मानना है कि एक फंड के प्रदर्शन की तिमाही आधार पर समीक्षा की जा सकती है, लेकिन पोर्टफोलियो पर एक साल में एक बार या दो बार गौर किया जाना चाहिए।

प्रतिस्पर्धियों का प्रदर्शन कैसा रहा है?
उन्होंने कहा कि आपको एक फंड के प्रदर्शन का आकलन निर्धारित अवधि में उसके प्रतिद्वंद्वी फंडों से तुलना के आधार पर करना चाहिए। पिछली तिमाही के प्रदर्शन के आधार पर आपको समान श्रेणी (जैसे-इक्विटी डायवर्सिफाइड या मिड कैप फंड) के दूसरे फंडों पर गौर करना चाहिए। बोस कहते हैं, 'कभी कभार निवेशक रिटर्न में भारी अंतर देखकर चिंता में पड़ जाते हैं।' यदि आपके फंड या उस श्रेणी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड के सालाना रिटर्न में दो-तीन फीसदी का अंतर होता है तो आप निवेश के लिए दूसरा फंड नहीं चुन सकते। बोस कहते हैं, 'यदि आप सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड में निवेश करते हैं तो पूरी तरह से शिफ्ट मत कीजिए। अपनी पूंजी का एक हिस्सा ही उसमें निवेश कीजिए, क्योंकि आपके फंड में कम रिटर्न एक अपवाद हो सकता है।'
हकीकत में उस श्रेणी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड और आपके फंड के रिटर्न में पांच फीसदी से ज्यादा का अंतर है तो आपको पूरी तरह से शिफ्ट कर जाना चाहिए। राव कहते हैं, 'बाजार ने इस साल जैसा प्रदर्शन किया है, ऐसी स्थिति में एक खास श्रेणी में आपका फंड ही अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया है तो इससे पूरी तरह से अलग होने की जरूरत है।'

कब करें बदलाव?
प्रदर्शन में भारी अंतर की स्थिति में हमेशा ही फंडों में निवेश की अदला-बदली की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि शेयरों का रुझान बदल सकता है। तिमाही आधार पर अपने फंड के प्रदर्शन पर नजर बनाएं रखें। यदि एक फंड तीन तिमाहियों से ज्यादा वक्त से खराब प्रदर्शन कर रहा है तो उसमें किए निवेश में बदलाव पर विचार करना चाहिए।
सालाना अदला-बदली की सिफारिश की जाती है, क्योंकि इक्विटी पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कर में एक साल के अंत में छूट मिलती है। अधिकांश ओपन-एंडेड इक्विटी फंड में बिकवाली पर अधिभार (कोष पर तीन फीसदी तक) लगता है, यदि एक साल से कम अवधि में बिकवाली की गई हो।

आपका निवेश किस प्रकार के फंड में है?
आईएनजी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी रामानाथन के कहते हैं, 'यदि आपका स्वर्ण क्षेत्र के फंड में निवेश है, तो आप इससे बाहर नहीं निकल सकते क्योंकि इस संपत्ति श्रेणी ने बीते दो साल से अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।' ऐसे फंडों में निवेश का मुख्य उद्देश्य पूंजीगत लाभ नहीं है, बल्कि पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करना है।
राव कहते हैं कि निवेशकों को सेक्टर फंडों के प्रति सतर्कता बरतनी चाहिए। वह कहते हैं, 'यदि आपका बिजली क्षेत्र के फंडों में निवेश है, तो आपको इस क्षेत्र के प्रति नजरिए (आउटलुक) के हिसाब से निवेश का आकलन करना चाहिए। यदि आउटलुक अगले साल या ज्यादा वक्त के लिए कमजोर है तो इसमें इसमें बने रहकर रकम क्यों बर्बाद की जाए? आप किसी अन्य क्षेत्र या एक डायवर्सिफाइड फंड में निवेश से बेहतर रिटर्न पा सकेंगे। यदि बीते छह महीनों से एक साल के बीच सेक्टर फंडों में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है, तो ऐसे फंडों से निकल जाना चाहिए।' हालांकि कुछ मानते हैं कि पोर्टफोलियो के जोखिम को करने के लिए एफएमसीजी, दवा और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे सुरक्षित सेक्टरों में छोटे-छोटे निवेश करने चाहिए।

क्या आपने कई फंडों में निवेश किया है?
राव कहते हैं कि फंडों से निकलने की प्रक्रिया फंड पोर्टफोलियो में मजबूती लाने के लिए शुरू करनी चाहिए, क्योंकि अधिकांश निवेशक ज्यादा फंडों में निवेश करते हैं। वह कहते हैं, 'एक श्रेणी की कई योजनाओं से निवेश से निकलकर श्रेणी के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले फंड में निवेश करना चाहिए। मान लीजिए कि आपका फंड ए, फंड एच, फंड एल और फंड एम में निवेश है, जो सभी इक्विटी डायवर्सिफाइड श्रेणी के हैं। इनमें से फंड एच का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है। सभी निवेशकों को फंड एच में समाहित कर दीजिए या आप छोटे फंड निवेशों को बड़े फंडों में ले जा सकते हैं।'

Keyword: Funds, Investers, Investment,
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