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टाटा रियल्टी-यूनिटेक भूमि सौदे की होगी जांच
एजेंसियां / नई दिल्ली August 17, 2014

सीबीआई ने 2007 में टाटा रियल्टी और यूनिटेक के बीच कथित तौर पर हुए 1,700 करोड़ रुपये के भूमि सौदे की जांच के लिए आरंभिक पूछताछ (पीई) दर्ज की है। इस सौदे के बारे में अंदेशा है कि यह यूनिटेक की दूरसंचार परियोजना के वित्त पोषण के लिए किया गया था। सीबीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को जांच के बारे में सूचित किया गया है कि भूमि सौदे के वास्तविक उद्देश्य का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। सीबीआई ने यह भी कहा है कि वह टाटा टेलीसर्विसेज को दोहरी प्रौद्योगिकी वाले स्पेक्ट्रम के आबंटन की भी जांच करेगी।

सूत्रों ने कहा कि 2जी घोटाले की पूर्व की जांच के दौरान इन पहलुओं पर गौर नहीं किया गया था। अब इन पहलुओं की व्यापक जांच की जाएगी, जिसके बाद उच्चतम न्यायालय को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। टाटा रियल्टी के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को 'किसी आरंभिक पूछताछ की जानकारी नहीं' है। उन्होंने कहा, 'हम पूर्व में इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। हम दोहराते हैं कि हमने सभी सरकारी एजेंसियों द्वारा पूछे गए सवालों का विस्तृत जवाब दिया है और सभी प्राधिकरणों के साथ उनकी जांच में पूरा सहयोग किया है। हम नैतिकता एवं कारोबारी व्यवहार के उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।Ó वहीं यूनिटेक ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि क्या टाटा रियल्टी द्वारा दिए गए अग्रिम का उपयोग यूनिटेक द्वारा रीयल एस्टेट परियोजनाओं या 2जी दूरसंचार स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाले से जुड़े दूरसंचार लाइसेंस के लिए तो नहीं किया गया। सीबीआई एसएफआईओ से पहले ही रिपोर्ट की एक प्रति मांग चुकी है, जिसमें संदेह जताया गया है कि 2007 में टाटा और यूनिटेक के बीच हुए भूमि सौदे का उद्देश्य यूनिटेक के दूरसंचार लाइसेंस के वित्त पोषण के लिए हो सकता है।

स्वान टेलिकॉम के लाइसेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन के संबंध में रिलायंस टेलिकॉम के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का निर्देश देने के लिए रिलायंस टेलीकाम द्वारा उच्चतम न्यायालय में संपर्क करने के बाद भी आगे जांच की जरूरत महसूस हुई। आरोप है कि स्वान टेलिकॉम वास्तव में रिलायंस टेलिकॉम का मुखौटा थी। चूंकि जांच एजेंसी रिलायंस टेलिकॉम की याचिका पर जवाब देने की तैयारी कर रही है, सीबीआई ने पाया कि टाटा के खिलाफ अभी तक कोई जांच नहीं की गई है और यह जानकारी उच्चतम न्यायालय को उपलब्ध कराई जा चुकी है।

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