बिजनेस स?टैंडर?ड - 'वापसी' का नया दौर
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'वापसी' का नया दौर
रंजीता गणेशन / मुंबई August 13, 2014

हल्के फुल्के अंदाज वाली हास्य फिल्में करने वाले रितेश देशमुख जैसे एक अदाकार को यह सुनना कि वह अपनी ताजा फिल्म में अपने प्रदर्शन को लेकर काफी चिंतित हैं, काफी अटपटा है। उन्हें इस बात की चिंता थी कि दर्शक उन्हें ऐसी फिल्म में देखकर उनका मजाक उड़ा सकते हैं। लेकिन यह ऐसा इसलिए है क्योंकि इस भूमिका में देशमुख ने न तो वैसे कपड़े ही पहने और न ही वह हंसी मजाक करते हुए दिखाई दिए जिसके लिए वह जाने जाते हैं। एक विलेन में उन्हें एक खलनायक की भूमिका में दिखाया गया है। दरअसल जब निदेशक मोहित सूरी ने देशमुख को यह भूमिका निभाने के कहा तो उनकी प्रतिक्रिया यह थी, 'मेरे लिए हां कहना सबसे आसान है लेकिन क्या आप मुझे यह भूमिका देने को लेकर आश्वस्त हैं।'

दिन भर पत्नी के आदेशों का पालन करने वाले और रात में एक सीरियल किलर की भूमिका निभाने वाले 35 साल के राकेश महाडकर को पर्दे पर उतारना फिल्म उद्योग के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ। इसके बाद आई हास्य फिल्म में तिहरी भूमिका निभाते हुए दिखे। एक अभिनेता के तौर पर एक विलेन में अपनी व्यापक क्षमताओं का प्रदर्शन किया जिसकी उन्हें लंबे समय से जरूरत थी। देशमुख लगातार 10 सालों तक विशेष प्रकार की हास्य फिल्मों में ही नजर आते रहे। एक विलेन का निर्माण करने वाले बालाजी मोशन पिक्चर्स के सीईओ तनुज गर्ग कहते हैं, 'चुनौती एक ऐसे इंसान की भूमिका निभाने की थी जिससे आप नफरत कर सकते हैं लेकिन उसके लिए आपके मन में दुख भी हो। देशमुख ने इस लिहाज से अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और शूटिंग के दौरान इस चरित्र में काफी कुछ बदलाव देखने को मिला।'

अगर फिल्मकारों की राय लें तो सभी उन्हें एक मंझा हुआ अभिनेता मानते हैं। एक मस्ती भरी फिल्म अलादीन में उन्हें निर्देशित कर चुके सुजॉय घोष कहते हैं कि वह बहुत ही ध्यान से सुनते हैं। घोष कहते हैं, 'यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इसलिए उनकी प्रतिक्रियाएं दिखाई देती हैं।' साथ ही यह भी कहा जाता है कि देशमुख अपने निर्देशक पर बहुत भरोसा करते हैं। घोष आगे कहते हैं, 'मैं अभी तक इस बात का अर्थ नहीं समझ पाया हूं लेकिन मेरा मानना है कि यह एक नये तरह का हथकंडा है। इससे आप पूरी तरह उनके प्रति जिम्मेदार हो जाते हैं और ऐसे में आपके पास उनके लिए कुछ बेहतरीन और सर्वश्रेष्ठï सोचने के अलावा कुछ भी शेष नहीं रह जाता है।'

देशमुख ने वर्ष 2003 में तुझे मेरी कसम के साथ फिल्म उद्योग में कदम रखा था। एक व्यस्क हास्य फिल्म मस्ती की सफलता का मतलब था कि उन्हें ऐसी ही फिल्में और भी मिलीं। हालांकि उनके अभिनय को लेकर कोई विवाद नहीं उठा लेकिन उनकी फिल्में जरूर विवादों के घेरे में रहीं। वह कहते हैं, 'पिछले एक दशक से मैं लगातार एक ही तरह की फिल्में करता रहा, इसकी एक वजह यह है कि लोग मेरे पास ऐसी ही भूमिकाएं लेकर आते रहे।' उनकी इस गलती के लिए काफी हद तक उनके दोस्त और निर्देशक साजिद खान भी जिम्मेदार रहे जो यह कहते हैं कि उन्हें देशमुख की आदत लग गई है और उन्हें अपनी पांचों बड़ी फिल्मों में जगह दी।

देशमुख कहते हैं कि अभिनय कभी भी उनके लिए उनके जीवन का लक्ष्य नहीं रहा, हालांकि उन्होंने ली स्ट्रासबर्ग और न्यूयॉर्क में फिल्म इंस्टीट्यूट की कार्यशालाओं में हिस्सा भी लिया। वह कहते हैं, 'वह सिर्फ मौज मस्ती के लिए था और अगर मुझे पता होता कि मुझे फिल्मों में ही आना है तो मैं इसे और अधिक गंभीरता से लेता।' उस वक्त उन्होंने आर्किटेक्चर को अपने पेशे के तौर पर चुना। वह अपनी डिजाइन फर्म इवोल्यूशंस के सह-मालिक हैं और कभी-कभी उसके काम भी करते हैं। फिल्में करने को लेकर उतावलापन न होने और पसंद के मुताबिक फिल्में चुनने की बात करते हुए वह काफी मजबूत और सुरक्षित नजर आते हैं। शायद एक मजबूत पृष्ठïभूमि का होने की बात उनकी मदद करती है।

सच कहा जाए तो देशमुख ने इसके पहले भी कुछ गंभीर भूमिकाएं अदा कीं, खासतौर पर रामगोपाल वर्मा की फिल्म नाच और रण में, लेकिन इनकी ओर लोगों का ध्यान ही नहीं गया। तब से लेकर अब तक इतने सालों में अभिनेता की क्षमता के अलावा यह बदलाव आया है कि उन्होंने अपनी फिल्मों का चुनाव करते वक्त दर्शकों का खयाल रखना शुरू कर दिया। वह कहते हैं, 'एक बार एक फिल्म चल जाने के बाद लोग आपको उस भूमिका में पसंद करने लगते हैं और वे कहते हैं कि आपको इस भूमिका देखना अच्छा लगता है।'

ये दिन उनके लिए काफी व्यस्तता भरे हैं, खासतौर पर तब जब वे एक हफ्ते से भी ज्यादा समय तक कोशिश करने के बावजूद वह विदेश के लिए रवाना होने से कुछ घंटे पहले ही फोन पर साक्षात्कार के लिए उपलब्ध हो सके। उन्होंने वर्ष 2012 में उन्होंने अभिनेत्री जेनेलिया डिसूजा से शादी की और जल्द ही वह एक बच्चे के पिता बनने वाले हैं। करीब दो साल पहले शुरू हुआ उनका प्रोडक्शन हाउस मुंबई फिल्म कंपनी महेश लिमये की येलो जैसी मराठी फिल्में बना रही है जिसने तीन राष्टï्रीय पुरस्कार जीते। साथ ही उनकी कंपनी ने बालक पालक फिल्म बनाई जो सेक्स शिक्षा पर बनाई गई। इन दिनों कंपनी एक हिंदी फिल्म पर भी काम कर रही है।

एक निर्माता के तौर पर देशमुख को बहुत ही उदारवादी माना जाता है। लिमये कहते हैं कि संवादों और भूमिकाएं तय करने के लिहाज से वह बहुत स्वतंत्रता देते हैं लेकिन फिल्म का प्रचार करने के दौरान वह कुछ नए विचार भी पेश करते हैं। वह प्रेस कॉन्फ्रेंसों में नजर आते हैं और अपनी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन पर पेश करने की कोशिश करते हैं। क्षेत्रीय समाचार पत्रों में पहली फिल्म येलो के पूरे पेज के विज्ञापन देखने को मिले।

हाल ही में उन्होंने अपनी कंपनी द्वारा बनाई गई मराठी फिल्म लाई भारी में अभिनय करके मराठी फिल्मों में भी कदम रख दिया जो काफी कुछ तमिल फिल्मों से मेल खाती है। फिल्म के रिलीज होने से पहले एक फिल्म पत्रकार ने उन्हें मराठी मानुष का सलमान खान बता दिया। इस अभियान में सलमान खान को भी शामिल किया गया। इस फिल्म को लेकर बने माहौल की वजह से दर्शकों ने समीक्षा की ओर गौर करने के बजाय पहले ही दिन फिल्म देखने की ओर जोर दिया। देशमुख कहते हैं कि फिल्म अपनी मातृभाषा और महाराष्ट्र की जमीन से जुड़े होने के गौरव की वजह से बनाई गई थी। देशमुख आने वाले समय में राजनीति में उतरने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं करते हैं।

अभिनेता के स्वर्गीय पिता विलासराव देशमुख दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे जिन्हें 2008 के हमलों के बाद रामगोपाल वर्मा और उन्हें ताज महल पैलेस होटल ले जाने को लेकर उभरे विवाद के बाद इस्तीफा देना पड़ा। इस अभिनेता को पहचान मिलने में समय लगा और धैर्य रखना सिखाने का श्रेय वह अपने पिता को देते हैं। वह कहते हैं, 'आपको इंतजार करना होगा और सब कुछ समय की बात है। आप समय से पहले नहीं बोल सकते हैं और अगर आप बोलते हैं तो आपके शब्दों की अहमियत कम हो जाती है।' देशमुख कहते हैं कि वह आने वाले समय में भी प्रयोग करते रहेंगे लेकिन फिलहाल उनके पास बंगिस्तान, बैंक चोर और हाउसफुल 3 जैसी कॉमेडी फिल्में हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि वह एक विलेन की अपनी भूमिका तक ही सीमित रहेंगे, जवाब में वह कहते हैं कि आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।

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