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मौसम विभाग ने घटाया मॉनसून का अनुमान
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली August 12, 2014

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पिछले 45 दिनों के दौरान कमजोर मॉनसून के कारण 2014 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अनुमान को सामान्य से काफी नीचे कर दिया है, जबकि पहले मॉनसून सामान्य से मामूली कम रहने का अनुमान जाहिर किया गया था। विभाग ने कहा है कि बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की 87 फीसदी रहेगी, जबकि जून के अनुमान में बारिश एलपीए की 93 फीसदी रहने की बात कही गई थी। मौसम विभाग ने अप्रैल में अनुमान जताया था कि बारिश एलपीए की 95 फीसदी रहेगी। एलपीए पिछले 50 वर्षों की औसत बारिश है।

एलपीए की 96 से 104 फीसदी बारिश को सामान्य माना जाता है। बारिश का एलपीए 89 सेमी है। यह अनुमान में चार फीसदी घट-बढ़ हो सकती है। केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने संवाददाताओं को बताया, 'अपने जून की तुलना में अनुमान घटाया है, क्योंकि इस सीजन के पहले 45 दिनों में बारिश 40 फीसदी से ज्यादा कम रही है।' बाद में यह कमी घटी है और 11 अगस्त तक बारिश सामान्य से 17 फीसदी कम है। इस साल बारिश की सबसे खराब स्थिति उत्तर-पश्चिमी भारत में रहने के आसर हैं, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे मुख्य खाद्यान्न उत्पादक राज्य आते हैं। मौसम विभाग ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश एलपीए की 76 फीसदी रहने का अनुमान है। विभाग एलपीए की 25 फीसदी से कम बारिश को सूखा मानता है। वर्तमान अनुमान से पता चलता है कि उत्तर-पश्चिमी भारत में मॉनसून सामान्य से 24 फीसदी रहने की संभावना है। एक सुखद पहलू यही है कि उत्तर-पश्चिम भारत में ज्यादातर कृषि भूमि के लिए सिंचाई की अच्छी सुविधाएं हैं, जिससे कम बारिश के असर को खत्म करने में मदद मिल सकती है।

इंटरनैशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) के निदेशक (दक्षिण-एशिया) पी के जोशी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'उत्तर-पश्चिम भारत में एलपीए की 76 फीसदी बारिश से कृषि उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पडऩे के आसार हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में सिंचाई की अच्छी सुविधाएं हैं। केवल भू-जल के स्तर पर असर पड़ सकता है और उसकी भी अगले साल भरपाई हो सकती है।' जोशी का मानना है कि कम बारिश से वर्ष 2014-15 में खाद्यान्न उत्पादन पर ज्यादा से ज्यादा 5-10 फीसदी असर पड़ेगा और इससे निपटा जा सकता है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा, 'ऐसा लगता है कि कम बारिश से कृषि उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन मोटे अनाज पर कुछ असर पड़ सकता है।'

अन्य क्षेत्रों को लें तो मध्य भारत में बारिश एलपीए की 89 फीसदी रहने का अनुमान है,जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में यह एलपीए की 87 फीसदी रहने की संभावना है। इस साल पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून एलपीए का करीब 93 फीसदी रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि इस साल देश के किसी भी हिस्से में सामान्य बारिश नहीं होगी। क्षेत्रवार अनुमान में 8 फीसदी घटत-बढ़त की मॉडल चूक हो सकती है। हालांकि सिंह ने कहा कि अनुमान को घटाने का यह मतलब नहीं है कि सूखे के आसार बढ़ गए हैं। लेकिन अगस्त के शेष दिनों और सितंबर के अनुमान यह दर्शाते हैं कि मॉनसून में सुधार आएगा।

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