बिजनेस स्टैंडर्ड - इन्फोसिस पर पुनर्खरीद का दबाव
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इन्फोसिस पर पुनर्खरीद का दबाव
बीएस संवाददाता / बेंगलूर August 05, 2014

आईटी कंपनी इन्फोसिस में बतौर मुख्य कार्याधिकारी विशाल सिक्का को महज 5 दिन ही हुए हैं लेकिन अभी से उन पर कंपनी के कुछ अल्पांश शेयरधारकों की ओर से दबाव शुरू गया है। ये अल्पांश शेयरधारक किसी समय कंपनी में अहम पदों पर रह चुके हैं। इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी टी वी मोहनदास पई और वी बालाकृष्णन और पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष डी एन प्रह्लाद ने कंपनी के निदेशक मंडल को पत्र लिखकर कहा है कि वह शेयर पुनर्खरीद पर तत्काल विचार करे। उनका मानना है कि कंपनी का यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धी कंपनियों और इन्फोसिस के शेयरों के मूल्यांकन के बीच जो अनावश्यक असमानता है, उसे दुरुस्त किया जा सकता है।

हालांकि सिक्का इस तथ्य से वाकिफ हैं कि वह एक प्रतिष्ठिïत कंपनी में हैं। इससे पहले ऐपल में स्टीव जॉब्स की जगह सीईओ बनने वाले टिमोथी डी कुक नेे भी 14 अरब डॉलर की पुनर्खरीद की पेशकश की थी। उस समय कुक पर भी पुनर्खरीद के लिए शेयरधारकों का दबाव था। तीन पूर्व अधिकारियों ने कंपनी बोर्ड को लिखे पत्र में कहा है कि 11,200 करोड़ रुपये (कंपनी की कुल नकदी का करीब 40 फीसदी) की पुनर्खरीद से शेयरधारकों के बीच कंपनी और उसके नए सीईओ के प्रति भरोसा बढ़ेगा। इस पत्र की एक प्रति बिजनेस स्टैंडर्ड के पास भी है, जिसकी उसने समीक्षा की है।

पई इन्फोसिस के मुख्य वित्त अधिकारी थे जबकि पूर्व सीएफओ बालाकृष्णन ने पिछले साल ही कंपनी से इस्तीफा दिया था। दिलचस्प है कि बतौर सीएफओ पई और बालाकृष्णन ने कभी भी शेयरधारकों की पुनर्खरीद मांग का पक्ष नहीं लिया। इस बारे में भेजे गए ईमेल के जवाब में इन्फोसिस के एक प्रवक्ता ने कहा, 'इन्फोसिस के बोर्ड और प्रबंधन को शेयरधारकों और निवेशकों से कई विषयों पर अनुरोध और सुझाव मिलते रहते हैं। इस पर निर्णय का अधिकार निदेशक मंडल और प्रबंधन के पास है।' उन्होंने कहा, 'इस मामले में हमें केवल तीन अल्पांश निवेशकों से आग्रह मिला है। हमारे शेयरधारकों पर किसी घटना का असर पड़ता है तो हम प्राथमिकता के तौर पर तत्काल नियामकीय संस्था को इस बारे में सूचित करते हैं।' पत्र में इन्फोसिस के बोर्ड के लिए सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। पत्र में बोर्ड पर पूंजी ह्रास का आरोप लगाया गया है। उसमें कहा गया है कि इन्फोसिस बोर्ड के बीते समय में रूढि़वादी नजरिये के कारण शेयरधारकों की पूंजी पर असर पड़ा है जो कंपनी के हित में नहीं है।

पत्र में कहा गया है कि जब तक संस्थापक सदस्य कंपनी के बोर्ड में थे तब तक इस तरह का प्रस्ताव नहीं आया लेकिन अब प्रबंधन में पूरी तरह बदलाव हो चुका है और संस्थापक सदस्य कंपनी छोड़ चुके हैं। ऐसे में शेयरधारकों की चिंता बढ़ी है जिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। पत्र लिखने वाले पूर्व अधिकारियों ने कहा है कि कंपनी की इक्विटी पर रिटर्न में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने सलाह दी है कि पुनर्खरीद को 52 हफ्ते के उच्चतम भाव 3,850 रुपये प्रति शेयर के आधार पर करनी चाहिए। 1993 में सूचीबद्घ होने के बाद से कंपनी ने कभी भी पुनर्खरीद की पेशकश नहीं की है।

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