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राजमार्ग पर दौड़ेगी पीपीपी की गाड़ी
संजीव मुखर्जी और मानसी तनेजा / नई दिल्ली August 01, 2014

केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्रालय को भले ही सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के आधार पर सड़क परियोजनाएं विकसित करने पर एतराज हो लेकिन राजस्थान सरकार को यह प्रस्ताव काफी आकर्षक लग रहा है। राजस्थान सरकार ने पीपीपी मॉडल के जरिये करीब 20,000 किलोमीटर सड़क बनाने की योजना बनाई है।

इस योजना को अमली जामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राजस्थान विधान सभा ने आज 'राजस्थान राज्य राजमार्ग 2014Ó विधेयक पारित कर दिया, जिसके तहत एक महीने के भीतर राज्य राजमार्ग प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिससे अगले पांच साल में 20,000 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

राजस्थान के लोक निर्माण विभाग मंत्री यूनुस खान ने विधान सभा में यह विधयेक पेश किया था। नए कानून के तहत राज्य सरकार और राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि वह भूमि अधिग्रहण के नियमों और इसके एवज में मुआवजा तय करने की प्रक्रिया और सुरक्षा समेत अन्य मसलों पर फैसले ले सके। पीपीपी मॉडल के तहत विकसित की जाने वाली परियोजनाओं के लिए ज्यादातर निवेश निजी क्षेत्र से आएगा लेकिन केंद्र और राज्य के बजट अनुदान के तहत आवंटित रकम का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को बाजार से रकम जुटाने का भी अधिकार होगा।

इसके अतिरिक्त नियंत्रण क्षेत्र का भी प्रस्ताव है, जिसमें सड़क के किनारे 100 मीटर की पट्टïी शामिल होगी। सड़क के 25 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण की इजाजत नहीं होगी, जबकि बाकी 74 मीटर में निर्माण को राज्य सरकार द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार ही अनुमति दी जाएगी।

नए कानून के तहत प्राधिकरण को यातायात के नियमन का अधिकार होगा और राजमार्ग पर यातायात सुचारु ढंग से चले यह सुनिश्चित करने का जिम्मा भी प्राधिकरण का ही होगी। राजमार्ग पर सुरक्षा को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी प्राधिकरण की होगी।

पिछले कुछ साल के दौरान पीपीपी मॉडल के तहत परियोजनाएं आवंटित करने में केंद्रीय भूतल मंत्रालय को सफलता नहीं मिली है। लेकिन आर्थिक सुस्ती और सख्त भूमि अधिग्रहण नियमों व पर्यावरण मंत्रालय से जरूरी अनुमति मिलने में लगने वाले लंबे समय के कारण सरकार की यह योजना अमली जामा नहीं पहन सकी। इस मॉडल के तहत सरकार को परियोजनाओं की खातिर रकम जुटाने में सफलता नहीं मिली थी।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आर्थिक मंदी के कारण यातायात भी सुस्त पड़ गया है, विशेष तौर पर वाणिज्यिक यातायात। इस वजह से डेवलपरों ने मान लिया कि निर्माण के बाद उनके लिए इसकी लागत निकालना मुश्किल सबब बन सकता है, जिससे उन्होंने ऐसी परियोजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए। भूतल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि जब तक अर्थव्यवस्था फिर से रफ्तार नहीं पकड़ लेती, तब तक केंद्र सरकार परियोजनाओं का आवंटन ईपीसी आधार पर करेगी।

Keyword: PPP, Road, National Highway,,
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