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टायर कंपनियों के लिए मजबूत दिख रहा परिदृश्य
राम प्रसाद साहू / बेंगलूर June 22, 2014

रबर कीमतें पांच वर्ष के निचले स्तर पर आने से टायर कंपनियों के शेयरों में पिछले सप्ताह अच्छी मजबूती दर्ज की गई। टायर कंपनियों के शेयरों में तेजी इस उम्मीद से आई है कि कम कीमतों से मार्जिन बढ़ेगा और रीप्लेसमेंट सेगमेंट से मांग मजबूत होगी जिसका कुल बिक्री में 60 फीसदी से अधिक का योगदान है। एक साल पहले 254 रुपये प्रति किलोग्राम की ऊंचाई को छूने के बाद रबर की कीमतें 43 फीसदी तक गिर कर 145 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ चुकी हैं। रबर कीमतों में गिरावट के अलावा इस सेक्टर को मांग एवं कच्चे माल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पिछले दो वर्षों के दौरान मूल्य निर्धारण ताकत से भी मदद मिली है।

विश्लेषकों का मानना है कि अधिक आपूर्ति की स्थिति, कम मांग और अधिक उत्पादन से यह सुनिश्चित होगा कि चालू वित्त वर्ष के लिए रबर कीमतें इन्हीं स्तरों के आसपास रहेंगी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में प्रमुख उत्पादक देशों में मजबूत रबर उत्पादन अनुमान और अपेक्षाकृत सुस्त वैश्विक उठाव से रबर कीमतों में मौजूदा स्तरों से बहुत ज्यादा वृद्घि की संभावना नहीं है। यह सब टायर शेयरों के लिए अच्छी खबर है जिन्हें जून तिमाही में कुछ बढ़त मिलनी चाहिए।

संपूर्ण वाहन क्षेत्र के संदर्भ में भी, इस्पात कीमतों को छोड़ कर, सभी अन्य कच्चे माल, चाहे यह एल्युमीनियम हो, सीसा या रबर, मार्च तिमाही में कीमतों में तिमाही आधार पर गिरावट दर्ज की गई और रबर की कीमतें साल के निचले स्तर पर आ गईं। हालांकि रीप्लेसमेंट सेगमेंट में मांग लगातार मजबूत बनी रहेगी, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि ओईएम सेगमेंट में रिकवरी चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आ सकती है जिससे टायर कंपनियों को मदद मिलेगी।

अपोलो टायर्स

कंपनी के मार्च 2014 तिमाही के वित्तीय परिणाम को राजस्व (सालाना आधार पर 6.3 फीसदी तक की वृद्घि) और मार्जिन (2.56 फीसदी तक की वृद्घि) दोनों मोर्चों पर यूरोपीय व्यवसाय से मदद मिली। राजस्व में 68 फीसदी का योगदान रखने वाले भारतीय परिचालन में 6 फीसदी की बिक्री वृद्घि दर्ज की गई, वहीं यूरोपीय सहायक इकाई ने 13 फीसदी की वृद्घि दर्ज की। बिक्री वृद्घि के अलावा अनुकूल विनिमय दर से भी यूरोपीय राजस्व को सालाना आधार पर 45 फीसदी तक बढ़ाने में मदद मिली। यूरोपीय व्यवसाय का मजबूत मार्जिन घरेलू मार्जिन में गिरावट की भरपाई करने में सफल रहा है। यूरोप में मजबूत बिक्री वृद्घि को देखते हुए कंपनी पूर्वी यूरोप में 50 करोड़ यूरो की लागत से एक नई इकाई लगाने की योजना बना रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में घरेलू बाजार में ओईएम बिक्री, खासकर ट्रक टायरों की बिक्री में तेजी वित्त वर्ष 2015 की दूसरी छमाही में दर्ज की जा सकती है। अपोलो टायर्स के राजस्व में ट्रक टायरों का योगदान दो-तिहाई का है। इंडिया इन्फोलाइन रिसर्च के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के लिए मार्जिन में इजाफा होगा, क्योंकि अधिक मार्जिन वाले रीप्लेसमेंट बाजार की भागीदारी बढऩे से कच्चे माल की कीमतों को मजबूती मिलेगी। रीप्लेसमेंट बाजार की भागीदारी मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 2 फीसदी तक बढ़ कर 76 फीसदी पर रही। इस शेयर पर नजर रख रहे 26 विश्लेषकों में से ज्यादातर (77 फीसदी) 195 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ अपोलो के शेयर पर सकारात्मक बने हुए हैं। हालांकि 203 रुपये के मौजूदा स्तर से इस शेयर में तेजी की सीमित गुंजाइश है, लेकिन वाहन सेक्टर में किसी भी तरह के सकारात्मक बदलाव से इसकी रेटिंग में बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।

एमआरएफ

वाहनों की सुस्त बिक्री के बावजूद मार्च तिमाही में एमआरएफ राजस्व में सालाना आधार पर 13.5 फीसदी की वृद्घि दर्ज करने में सफल रही है। कंपनी को रीप्लेसमेंट बाजार में तेजी आने से बड़ी मदद मिली है। इस सेगमेंट का कंपनी के राजस्व में 70 फीसदी का योगदान है। हालांकि वाहन निर्माताओं द्वारा नए टायरों की मांग में कमी से अल्पावधि में दबाव पड़ सकता है, लेकिन विश्लेषकों को कंपनी द्वारा आगामी तिमाहियों में 6-8 फीसदी की राजस्व वृद्घि दर्ज किए जाने का अनुमान है।

कंपनी के लिए सकारात्मक बात यह है कि उसकी दोपहिया से लेकर वाणिज्यिक वाहनों तक, लगभग 25 फीसदी की बाजार भागीदारी के साथ पूरी वाहन श्रृंखला में उपस्थिति है। एमआरएफ की प्रमुख चिंता परिचालन मार्जिन को लेकर है जो 2.78 फीसदी घट कर 12.5 फीसदी रह गया। कच्चे माल (कार्बन ब्लैक, टायर कोर्ड आदि) की कीमतों में तेजी, कर्मचारी और अन्य खर्च में वृद्घि की वजह से उसके परिचालन मार्जिन पर प्रभाव पड़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि रबर कीमतों में नरमी के बावजूद अधिक खर्च की वजह से अगली कुछ तिमाहियों में कंपनी का मार्जिन सुस्त बना रह सकता है। मौजूदा कीमत पर यह शेयर अपने एक वर्षीय आय अनुमानों के 13 गुना पर कारोबार कर रहा है। इस शेयर पर नजर रख रहे 8 विश्लेषकों में से 6 ने इसे 'खरीदारी' और 2 ने 'बनाए रखें' की रेटिंग दी है।

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