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डाइची को ऐसे मनाया मकोव ने
राजेश भयानी / मुंबई April 07, 2014

रविवार को मैराथन बोर्ड बैठक के बाद सन फार्मास्युटिकल के लिए रैनबैक्सी के अधिग्रहण का मार्ग प्रशस्त हुआ। बोर्ड द्वारा इस सौदे पर मुहर लगाने से पहले दोपहर में शुरू हुई इस बैठक में छह घंटे तक गहन मंथन हुआ। इस चर्चा में जिस शख्स ने अहम भूमिका निभाई, वह थे इजरायल मकोव। यह सिर्फ रविवार को हुई बैठक नहीं थी, सन फार्मास्युटिकल के 75 वर्षीय चेयरमैन ने डाइची के लिए राजी करने की पूरी प्रक्रिया में बेहद अहम भूमिका निभाई और सुनिश्चित किया कि जापान की दिग्गज कंपनी सौदे पर दस्तखत होने तक अपने रुख पर कायम रहे।

वर्ष 2012 में दिलीप सांघवी के एमडी बनने के बाद इजरायल की दिग्गज कंपनी टेवा फार्मास्युटिकल के पूर्व अध्यक्ष और सीईओ मकोव को कंपनी का चेयरमैन बनाया गया था। मकोव की नियुक्ति के इस चतुर फैसले का अब जाकर मिला, जो वैश्विक दवा उद्योग का एक बड़ा नाम हैं और उन्हें बड़े सौदे कराने के मामलों में एक माहिर खिलाड़ी माना जाता है। सौदे की प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि मकोव खुद एक यहूदी हैं और जापान के निवेश बैंकिंग क्षेत्र में यहूदियों का वर्चस्व है। इसलिए उन्होंने अपने संपर्कों का अच्छा इस्तेमाल किया है।

सूत्रों ने कहा कि रैनबैक्सी के परिचालन नियंत्रण से निकलने को लेकर डाइची खासी उत्सुक थी, क्योंकि भारतीय कंपनी में चल रहे नकारात्मक घटनाक्रमों को लेकर शेयरधारकों की तरफ से खासे विरोध का सामना करना पड़ रहा था। यूएस एफडीए के साथ रैनबैक्सी को हुई समस्याओं के चलते उसके शेयर मूल्य पर भी खासी मार पड़ी थी। हालांकि कंपनी भारत में अपनी मौजूदगी को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहती थी।

इसलिए यह सौदा हो गया। इस लिहाज से मकोव के संपर्क खासे कारगर रहे। सन फार्मा इन हालात में डाइची के साथ संपर्क में आई और जापानी कंपनी को शेयर सौदे की पेशकश की गई। यह पेशकश दोनों के लिए फायदेमंद लगी, क्योंकि डाइची के अधीन रैनबैक्सी का प्रबंधन रैनबैक्सी के परिचालन को मजबूती देने के बजाय यूएस एफडीए के साथ जूझने में ज्यादा व्यस्त रहा। सन फार्मा के लिए दूसरी बाधा डाइची को मनाना थी। मकोव ने खुद डाइची को मनाने वाली टीम की अगुआई की और सन की विश्वसनीयता व सफल कारोबार के बारे में बताया।

Keyword: pharma, medicine, sun, ranbaxy,
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