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ऑयल इंडिया: गैस कीमतें बढऩे से होगी मजबूती
उज्ज्वल जौहरी / नई दिल्ली March 16, 2014

ऑयल इंडिया जैसी तेल एवं गैस कंपनियों पर काफी समय से दबाव बना हुआ है और अब उन्हें तेल एवं गैस उत्पादन और सब्सिडी बोझ को लेकर चिंता सता रही है। हालांकि अल्पावधि में इस तरह की चिंता से दबाव बना रह सकता है, लेकिन ऑयल इंडिया के लिए सकारात्मक बात यह भी है कि गैस कीमतों में वृद्घि, डीजल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, घटते सब्सिडी बोझ और अन्वेषण एवं उत्पादन गतिविधियों में तेजी से उसे काफी हद तक मदद मिलेगी। विश्लेषकों का मानना है कि गैस कीमतों में वृद्घि के लाभ का असर मौजूदा समय में ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों की शेयर कीमतों पर नहीं दिखा है। इस वजह से ऑयल इंडिया के लिए विश्लेषकों का कीमत लक्ष्य 575-600 रुपये के दायरे में बना हुआ है जिसका मतलब है 481 रुपये के मौजूदा बाजार भाव से 19-24 फीसदी की तेजी।

बिक्री की चिंता

ऑल असम स्टूडेंट्ïस यूनियन द्वारा 1 मार्च से शुरू की गई हड़ताल की वजह से असम में तेल एवं गैस उत्पादन में व्यवधान पैदा हुआ। 6 मार्च तक ऑयल इंडिया का औसतन क्रूड उत्पादन 9000 टन से घट कर 5000 टन पर रह गया, जबकि गैस उत्पादन आधा घट कर 3.5 एससीएम रह गया। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुमानों के मुताबिक हड़ताल की वजह से प्रतिदिन 20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि इस समस्या को दूर कर लिया गया है और अब इस बारे में स्थिति स्पष्टï होने का इंतजार किया जा रहा है कि ऑयल इंडिया को कितना नुकसान उठाना पड़ सकता है, लेकिन बार बार इस तरह की समस्याएं चिंता का विषय हैं।

कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के विश्लेषक का मानना है कि असम में हड़ताल और अन्य अवरोधों की वजह से विकास एवं उत्पादन गतिविधियों में बाधाओं से न सिर्फ उस दौरान (हड़ताल के समय) बिक्री में कमी आई बल्कि इससे मध्यावधि के लिए बिक्री में सामान्य वृद्घि के हमारे अनुमान के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है। एंटीक के विश्लेषकों का मानना है कि यदि यदि मौजूदा सुस्त उत्पादन स्तर 15 दिन तक बना रहता है तो वित्त वर्ष 2014 के लिए तेल एवं गैस उत्पादन घट कर 35.6 लाख मीट्रिक टन/2.6 अरब घन फुट रह जाएगा जो हमारे 36.3 लाख मीट्रिक टन/2.65 अरब घन फुट के अनुमान से कम है। साथ ही ईपीएस प्रभाव 1.4 रुपये प्रति शेयर या 2.5 फीसदी रहेगा। वहीं यदि इस तरह की दिक्कतें (हड़ताल) सामने नहीं आतीं हैं तो कंपनी 39-40 लाख टन सालाना क्रूड उत्पादन का लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकती है।

सब्सिडी जोखिम

सरकार की सख्त वित्तीय स्थिति ने यह आशंका बढ़ा दी है कि अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को वित्त वर्ष 2014 में भारी सब्सिडी (ऐम्बिट कैपिटल अनुमान के मुताबिक 65,000-70,000 करोड़ रुपये की कुल अंडर-रिकवरी के लगभग 45-50 फीसदी) को वहन करना पड़ सकता है। हालांकि इस संदर्भ में ओएनजीसी के लिए यह प्रतिशतता 80 फीसदी से अधिक है। बिजली और उर्वरक क्षेत्र के लिए गैस कीमत के संदर्भ में स्पष्टïता के अभाव ने अपस्ट्रीम कंपनियों के योगदान को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है, क्योंकि एपीएम गैस कीमतें दोगुनी हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर स्थिति पूरी तरह से अगले 3-4 महीने में स्पष्टï होगी।

डीजल कीमत वृद्घि

डीजल कीमत में नियमित रूप से वृद्घि से राहत मिली है। ऐम्बिट के आकलन के अनुसार अंडर-रिकवरी अनुमान वित्त वर्ष 2014 में 1,32,900 करोड़ रुपये से घट कर वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2016 में 1,06,800 करोड़ रुपये और 84,300 करोड़ रुपये रह गया है। अपस्ट्रीम भागीदारी वित्त वर्ष 2014 के 48 फीसदी से बढ़ कर अनुमानित तौर पर वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2016 में 57 फीसदी रहने के बीच ऑयल इंडिया का सब्सिडी बोझ वित्त वर्ष 2014 के 63,800 करोड़ रुपये से घट कर वित्त वर्ष 2015 में 60,900 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2017 के लिए 48,000 करोड़ रुपये रह गया है।

गैस कीमत वृद्घि से मदद

अप्रैल 2014 से गैस कीमतें बढऩे की संभावना के साथ विश्लेषक तेल एवं गैस अपस्ट्रीम कंपनियों पर सकारात्मक बने हुए हैं। एंटीक के विश्लेषकों का मानना है कि गैस कीमतों में प्रत्येक 1 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की वृद्घि से ऑयल इंडिया की ईपीएस 4.8 रुपये प्रति शेयर बढऩे का अनुमान है। एलकेपी सिक्योरिटीज के चिराग धैफुले का मानना है कि गैस कीमत में 1 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की वृद्घि से वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2016 में ऑयल इंडिया की आय में 8 और 7.8 फीसदी की वृद्घि के अनुमान को मजबूती मिलेगी।

ऐम्बिट के विश्लेषकों को 3 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के गैस सब्सिडी बोझ के समायोजन के बाद भी ऑयल इंडिया की शुद्घ प्राप्तियां वित्त वर्ष 2014 के 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ कर वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2016 में 5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर पहुंच जाने का अनुमान है।  धैफुले को गैस प्राप्तियां 6 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर रहने का अनुमान है।

Keyword: oil india,
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