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कोयला मंत्रालय ने दिया झटका
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली/भुवनेश्वर February 17, 2014

कोयला मंत्रालय ने उच्च स्तरीय अंतर मंत्रालयी समिति की सिफारिशों पर अमल करते हुए आज अदाणी पावर, जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल), रूंगटा माइन्स और टाटा व दक्षिण अफ्रीका की सासोल के संयुक्त उपक्रम सहित 18 कंपनियों को किए गए 10 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया।
इनमें से आठ ब्लॉक 2005 से पहले निजी इस्तेमाल के लिए निजी कंपनियों को आवंटित किए गए 61 ब्लॉकों में से हैं, जिनके लिए बीते महीने उच्चतम न्यायालय ने 1.86 लाख करोड़ रुपये के कथित कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के अंतर्गत सुनवाई के दौरान स्थिति रिपोर्ट तलब की थी। अंतर मंत्रालयी समूह (आईएमजी) ने 7 और 8 फरवरी को इन ब्लॉकों की समीक्षा की।
मंत्रालय ने कंपनियों को भेजे गए निरस्तीकरण से संबंधित पत्र में कहा, 'आईएमजी की सिफारिशों पर विचार किया गया और संबंधित विभाग ने इन्हें स्वीकार कर लिया है। तत्काल प्रभाव से आपकी कंपनी के लिए किए गए ब्लॉक के आवंटन को रद्द कर दिया गया है। यह आवंटन रद्द किए जाने के एवज में आपकी कंपनी कोई अन्य ब्लॉक पाने की हकदार नहीं होगी।'
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से ब्लॉकों के विकास में अनावश्यक देरी की वजह बताने के लिए कहा था। केंद्र ने बाद में अदालत के सामने माना कि 'हम कह सकते हैं कि कुछ गलत हुआ और कुछ सुधार किया जाना जरूरी है।' इसकी समीक्षा कोयला मंत्रालय में अपर सचिव ए के दुबे की अगुआई वाले आईएमजी ने की थी। रद्द किए गए इन ब्लॉकों में दो कोल-टू-लिक्विड (सीटीएल) ब्लॉक-जेएसपीएल को आवंटित रामचांडी और टाटा समूह कंपनियों के गठजोड़ व दक्षिण अफ्रीकी कंपनी सासोल के संयुक्त उपक्रम स्ट्रेटेजिक एनर्जी टेक्नोलॉजी सिस्टम्स (एसईटीएसपीएल) को ओडिशा में मिला ब्लॉक शामिल है।
कोयला मंत्रालय के इस फैसले से टाटा समूह के संयुक्त उपक्रम एसईटीएसपीएल की ओडिशा में प्रस्तावित 45,000 करोड़ रुपये की सीटीएल परियोजना को तगड़ा झटका लगा है। मंत्रालय के फैसले से इस योजना को मुश्किल में डाल दिया है।
आईएमजी का मानना था कि आवंटियों ने महज बैंक गारंटी जमा की थी और इसके लिए कोई मंजूरी हासिल नहीं की थी। अपर सचिव (कोयला) की अगुआई वाले आईएमजी ने आवंटित कोयला ब्लॉकों के विकास का जायजा लेने का आदेश दिया था और जरूरत पडऩे पर आवंटन रद्द करने जैसे कदम उठाने तक की सिफारिश की थी।
कोयला ब्लॉक आवंटित हुए भले ही साढ़े चार साल बीत चुके हैं, लेकिन डेवलपर संभावित लाइसेंस (पीएल) तक हासिल नहीं कर सके। कोयला खदान के विकास के लिहाज से पहला कदम माना जाता है। कोयला मंत्रालय में निदेशक एस के शाही ने एसईटीएसएल के प्रबंध निदेशक को लिखा, 'एसईटीएसएल को किए गए ओडिशा के अर्खपाल श्रीरामपुर के उत्तर में स्थित ब्लॉक के आवंटन को रद्द करने का फैसला किया गया है। कंपनी इस कोयला ब्लॉक का आवंटन रद्द किए जाने के एवज में अन्य ब्लॉक के आवंटन के लिए हकदार नहीं होगी। इस क्रम में 55.34 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी छोडऩी होगी और इसे सरकार के संबंधित खाते में जमा कर दिया जाएगा।'
आईएमजी का निष्कर्ष था कि भूगर्भीय रिपोर्ट, खनन पट्टे के लिए आवेदन, खनन योजना जमा करना, खनन योजना को मंजूरी, वन्य मंजूरी के लिए आवेदन, पर्यावरण प्रबंधन योजना के लिए आवेदन और भूमि अधिग्रहण जैसे काम अभी तक लंबित थे। जून 2013 में कोयला मंत्रालय ने एसईटीएसएल को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था और कोयला ब्लॉक के विकास में अनावश्यक देरी पर चिंता जाहिर की थी। कोयला नियंत्रक के दफ्तर से दिसंबर 2012 में ब्लॉक का क्षेत्रीय मुआयना कराया गया। इसमें आवंटित स्थल पर न तो कोई खनन उपकरण मिला और न ही किसी प्रकार की खनन गतिविधि के संकेत मिले। वहां पर खनन डेवलपर की मौजूदगी की कोई जानकारी मिली और न ही कोई एस्क्रो खाता खोला गया था।

Keyword: Coal ministry, Adani power, JSPL,
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