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देवयानी पर दर्ज हुआ मामला, स्वदेश लौटीं भारतीय राजनयिक
बीएस/एजेंसियां / नई दिल्ली January 10, 2014

अमेरिका में कानूनी अड़चनों का सामना कर रहीं भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागडे पर अमेरिकी ग्रैंड जूरी ने वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने का अभियोग लगाया है। इस बीच खोब्रागडे वापस भारत लौट आई हैं। मगर उनके खिलाफ मामला चलता रहेगा। भारत के दबाव के बाद अमेरिका ने खोब्रागडे को जी-1 वीजा जारी किया, जिसके बाद उनकी भारत वापसी की राह खुल गई। भारत रवानगी से पहले अपना पक्ष रखते हुए खोब्रागडे ने खुद को पूरी तरह बेकसूर बताया।

इस पूरे घटनाक्रम में खोब्रागडे की स्वदेशी रवानगी के मद्देनजर भारत सरकार ने उनके स्तर के ही एक वरिष्ठï  अधिकारी को अमेरिकी दूतावास से हटाने के लिए कहा है। सरकार ने इसके लिए 48 घंटे की मोहलत दी है। उधर भारत-अमेरिका संबंधों में इस घटना के बाद नया मोड़ आने के बावजूद अमेरिकी राष्टï्रपति बराक ओबामा ने भारत के साथ संबंधों को विशेष बताते हुए उन्हें आगे ले जाने का भरोसा जताया।

इस मामले के केंद्र में रहीं खोब्रागड़े की नौकरानी ने भी पहली बार सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि भारतीय राजनयिक के घर में काम करते हुए, उसे काफी कष्टï झेलना पड़ा। देश के प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पूरे प्रकरण को सरकार की हार बताया है। पार्टी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि खोब्रागडे को वापस लाना हमारी पराजय है क्योंकि उनके खिलाफ मामला कायम रहेगा।

अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा ने जिला न्यायाधीश शीरा शींडलिन को लिखे पत्र में कहा कि 39 वर्षीय खोब्रागडे के खिलाफ आरोप बने रहेंगे और यदि वह राजनयिक छूट के बिना अमेरिका आती हैं तो उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। भरारा ने कहा कि ग्रैंड जूरी ने राजनयिक पर उनकी नौकरानी संगीता रिचर्ड के वीजा आवेदन से जुड़ी वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के लिए दो मामलों में अभियोग लगाया है।

भरारा ने अपने पत्र में कहा,'अभियोग के लिए अभी किसी अभियोग पत्र की जरूरत नहीं है। हम जानते हैं कि प्रतिवादी (खोब्रागडे) को हाल ही में राजनयिक छूट मिली है।' उन्होंने कहा, 'इसलिए ये आरोप तब तक बने रहेंगे, जब तक वह अदालत में आकर इन आरोपों का सामना नहीं करतीं। फिर चाहे वह ऐसा राजनयिक छूट हटने के बाद करें या बिना छूट के अमेरिका लौटकर।'

उधर भारत वापसी के लिए विमान में सवार होते समय खोब्रागडे ने कहा, 'मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और आधारहीन हैं। मैं इनके गलत साबित होने की उम्मीद करूंगी।' खोब्रागडे ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि इस प्रकरण से उनके परिवार पर कोई स्थायी असर न पड़े। यहां खास तौर पर इशारा उनके बच्चों की ओर था, जो अभी भी अमेरिका में ही हैं।

देवयानी को 'इंडिया-यूएस हेडक्वार्टर्स एग्रीमेंट' के तहत 8 जनवरी को पूर्ण राजनयिक छूट प्रदान की गई थी। 9 जनवरी को अमेरिका ने भारत से अनुरोध किया कि वह खोब्रागडे की राजनयिक छूट खत्म कर दे। मगर भारत ने इस अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया। वर्ष 1999 बैच की विदेश सेवा अधिकारी खोब्रागडे को अपनी नौकरानी के वीजा आवेदन में झूठी घोषणाएं करने के आरोप में 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था।

खोब्रागडे के वकील डेनियल अर्शाक ने कहा कि चूंकि उन्हें राजनयिक छूट मिल चुकी है, इसलिए वह देश के बाहर यात्रा कर सकती हैं और वह भारत लौट रही हैं। खोब्रागडे पर जो अभियोग लगाया गया है, वह 21 पन्नों का है। इसमें खोब्रागडे पर आरोप लगाया गया है कि वह अपनी नौकरानी को अमेरिकी कानून के तहत तय किया गया वेतन या शोषणात्मक कार्य स्थितियों से सुरक्षा नहीं देना चाहती थीं। अमेरिकी कानून के तहत आने वाले ये अनिवार्य नियम विदेशी राजनयिकों और सरकारी अधिकारियों के बीच अच्छी तरह प्रचारित हैं।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा का मानना है कि भारत के साथ रिश्ते 'बहुत महत्त्वपूर्ण' हैं और इन्हें आगे मजबूत किया जाना चाहिए। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्ने ने इस बाबत कहा, 'यह बहुत महत्त्वपूर्ण संबंध हैं और इसके साथ सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक संबंधों सहित कई संबंध जुड़े हैं। राष्ट्रपति का मानना है कि इस रिश्ते को मजबूत करने के प्रयास जारी रखने की जरूरत है।' ओबामा और केरी की बैठक में भारत पर चर्चा के प्रश्न पर उन्होंने कहा, 'यह एक नियमित बैठक थी। इसके ज्यादा अर्थ न निकालें।'

Keyword: diplomacy, devyani,
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