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भारत-अमेरिकी संबंधों में तनातनी के केंद्र में देवयानी
साहिल मक्कड़ / नई दिल्ली December 20, 2013

पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने 2008 में जब पाकिस्तान का दौरा किया था तो वहां के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुहम्मद मिलन सुमरू ऐसे पहले शख्स थे जिन्होंने देवयानी खोब्रागडे के बारे में उनसे पूछताछ की थी। उस समय देवयानी कम जानी-मानी भारतीय राजनयिक थीं, जो उस देश में भारतीय दूतावास को सेवाएं दे रही थीं। जाहिर तौर पर उन्होंने पाकिस्तानियों को खासा प्रभावित किया था और वहां के प्रधानमंत्री तक का ध्यान अपनी ओर खींचा था। लेकिन 39 वर्षीय खोब्रागडे हमेशा ही साहसी, जोखिम लेने वाली और बेहतर काम करने वाली महिला रही हैं। उन्हें जब (2007-10) पाकिस्तान में तैनात किया गया था, उस समय वहां आंतरिक गतिरोध काफी ज्यादा था और बम धमाके आम घटनाएं हो गई थीं।

सरकार ने एक साल तक उस देश में सेवा के बाद उन्हें घर लौटने का विकल्प दिया। उन्होंने इनकार कर दिया और वहां पर अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा करने पर जोर दिया। उनके पिता और महाराष्ट्र कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी उत्तम खोब्रागडे ने कहा, 'उसने हमेशा ही चुनौतीपूर्ण स्थानों पर तैनाती के लिए कहा। उसने पाकिस्तान में भी सबको अपने काम से प्रभावित किया था।' उनके साहसी स्वभाव को देखते हुए जब वह अपने ऐसे अनुभव की बात करती हैं जिससे वह रोने को मजबूर हो गई थीं, तो स्वाभाविक तौर पर यह चिंता की बात है। वह रातोंरात चर्चा में आ गईं, जब न्यूयॉर्क के पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और कथित तौर पर उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया, कपड़े उतारकर तलाशी ली और अपनी मेड संगीता रिचर्ड को कम वेतन देने के आरोप में उन्हें सलाखों के पीछे नशेडिय़ों के साथ रखा गया। हालांकि खोब्रागडे ने खुद को निर्दोष बताया और जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया।

खोब्रागडे 1999 में भारतीय विदेश सेवा से जुड़ीं और अभी तक उन्होंने पाकिस्तान, इटली व जर्मनी में भारतीय मिशनों में राजनीतिक इकाई में अपनी सेवाएं दीं। उनकी आखिरी तैनाती न्यूयॉर्क में थी जहां बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में स्थानांतरित किए जाने से पहले तक उन्होंने उप महावाणिज्य दूत के रूप में सेवाएं दीं। गिरफ्तारी के बाद अजीब से हालात पैदा हो गए हैं, भारत ने देश में तैनात अमेरिकी कर्मचारियों के राजनयिक दर्जे की समीक्षा, अमेरिकी दूतावास को आयात के लिए दी जा रही कुछ रियायतें वापस लेने और नई दिल्ली में अमेरिकी दूूतावास के पास से बैरीकेड हटाने जैसे कई अप्रत्याशित कदम उठाए। जमानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड को फोन पर दी पहली प्रतिक्रिया में कहा, 'मैं आपके समर्थन से अभिभूत हूं और इसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।'

हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब खोब्रागडे ने खुद को चर्चा में पाया है। उनका नाम आदर्श घोटाले से जुड़े होने को लेकर भी चर्चा में आया था, जिसमें उन पर एक हाउसिंस सोसाइटी में सपत्ति होने के बावजूद दूसरी सोसाइटी में संपत्ति खरीदे का आरोप था जो मुंबई के नियमों के विरुद्ध था। राजनीति में जाने की इच्छा रखने वाले उनके पिता ने कहा, 'उसने कुछ भी गलत नहीं किया। हमने आरक्षित कोटा के अंतर्गत संपत्ति खरीदी थी। मैंने उसके नाम पर आवेदन किया और उसके बैंक खातों से ही भुगतान किया। हमने ओशीवारा की संपत्ति बेच दी और आदर्श में एक अन्य संपत्ति खरीदी क्योंकि इसकी लोकेशन अच्छी थी।'

 खबरों के मुताबिक उनके नाम की कई संपत्तियां दर्ज हैं, जिस पर उन्होंने कहा कि उनमें से अधिकांश 'विरासत' में मिली संपत्तियां हैं। एक राजनयिक के पास इतनी संपत्तियां कैसे आईं, इस पर खोब्रागडे कहते हैं कि वह अपनी बड़ी बेटी से काफी प्यार करते हैं। देवयानी ने रोम विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले दर्शन के प्रोफेसर प्रकाश सिंह राठौर से विवाह किया। देवयानी की उनसे जर्मनी में मुलाकात हुई थी। उनकी दो बेटियां सात वर्षीय अमाया सिंह खोब्रागडे और चार वर्षीय शाइरा सिंह खोब्रागडे हैं।

पोतियों को अपना उपनाम देने पर पूर्व आईएएस अधिकारी ने कहा, 'मेरी बेटी अपने माता-पिता का खासा ध्यान रखती है और उसने अपनी दो बेटियों को मेरे परिवार का नाम दिया है।'  खोब्रागडे मेधावी छात्रा रही थीं और पहले प्रयास में ही सिविल सेवा को उत्तीर्ण कर लिया था। सिविल सिवा के प्रशिक्षण के दौर के साथी रहे तुषार बेहरा उन्हें जिंदादिल और मुखर शख्सियत के तौर पर याद करते हैं। भले ही खोब्रागडे समाचार पत्रों में आने वाली खबरों के साथ अपने फेसबुक स्टेटस को लगातार अपडेट करती रहती हैं, लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइट पर उनके मित्रों की संख्या खासी कम है।

Keyword: diplomacy, devyani,
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