बिजनेस स?टैंडर?ड - दूध की कीमतों पर रहेगा दबाव
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दूध की कीमतों पर रहेगा दबाव
सोहिनी दास / अहमदाबाद 11 20, 2013

दूध का खुदरा भाव पिछले 4-5 वर्षों के दौरान 60 से 70 फीसदी बढ़ा है, लेकिन उद्योग के सूत्रों का मानना है कि आगे इसकी कीमतें और बढ़ेंगी। डेयरियों का कहना है कि दूध उत्पादन की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए उन्हें ज्यादा मूल्य संवर्धित उत्पादों के उत्पादन पर ध्यान देना होगा। डेयरियों का कहना है कि किसानों को ज्यादा दूध उत्पादन की खातिर प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें दूध की अच्छी कीमत देनी पड़ती है।

दिल्ली की स्टर्लिंग एग्रो इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक कुलदीप सलुजा ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों के दौरान कीमतों में बढ़ोतरी तेज रही है। हालांकि इसमें बढ़ोतरी मुख्य रूप से किसानों को ज्यादा कीमत चुकाने से हुई है, ताकि उन्हें दुग्ध उत्पादन से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। हालांकि आगे कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है और यह महंगाई के रुख का अनुसरण कर सकती हैं।Ó डेयरी कंपनियों का दावा है कि वर्ष 2009 के आसपास किसान दूध उत्पादन से दूरी बनाने लगे थे, क्योंकि चारे की ऊंची लागत और अन्य खर्च की वजह से यह उनके लिए फायदेमंद नहीं रह गया था। शायद उन्हें फिर से दूध उत्पादन से जोडऩे का एकमात्र तरीका दूध की ज्यादा खरीद कीमत देना था।

देश की सबसे बड़ी डेयरी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस समय कंपनी की औसत खरीद कीमत करीब 500 रुपये प्रति किलोग्राम फैट है। पिछले 4 वर्षों में जीसीएमएमएफ की खरीद कीमत में 68 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद पिछले दो वर्षों के दौरान खेड़ा जिले में कम से कम 50 फार्म (पचास से ज्यादा पशु वाले) बंद हो गए हैं।

जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी ने कहा, 'किसानों की उत्पादन लागत बहुत अधिक है। कैटलफीड, हरे चारे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। तरल दूध की खुदरा कीमत का करीब 80 फीसदी हिस्सा किसानों को मिलता है।Ó

बहुत से लोगों का मानना है कि दूध की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आने वाले समय में यह गरीब परिवारों की पहुंच से दूर हो जाएगा, जिससे दूध की मांग घट सकती है। देश में दूध की मांग 2021-22 तक 20-21 करोड़ टन होने का अनुमान है। वर्ष 2011-12 में दूध उत्पादन 12.8 करोड़ टन था। सूरत की सुमुल डेयरी के प्रबंध निदेशक जयेश देसाई ने कहा कि न केवल दूध की खरीद कीमत बल्कि डीजल की कीमतें भी डेयरियों के लिए चिंता का विषय हैं। डीजल के महंगा होने से दूध के संग्रहण और वितरण के लिए परिवहन लागत में इजाफा हो रहा है।

डेयरियों की कुल लागत में पैकेजिंग लागत का हिस्सा करीब 5 फीसदी है और इससे भी उन पर दबाव बढ़ रहा है। दूध को नरम पैकेजिंग सामग्री में पैक किया जाता है। यह पलिथाइलीन फिल्म का एक ग्रेड होता है, जिसकी कीमत 70-80 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अब 140 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इस साल अक्टूबर में दूध की कीमतें बढ़ाते समय जीसीएमएमएफ ने कहा था, 'वर्तमान खाद्य मुद्रास्फीति करीब 18 फीसदी है, जबकि अमूल दूध की कीमतें पिछले एक साल में महज 10 फीसदी बढ़ी हैं।Ó

इसी वजह से डेयरियां मूल्य संवर्धित उत्पादों और स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) के निर्यात पर ज्यादा ध्यान देने लगी हैं। पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक देवेंद्र शाह ने इस बात को स्वीकार किया कि दूध से मिलने वाले मुनाफे पर दबाव है और इसे दूर करने का एक तरीका एसएमपी का निर्यात है।

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