बिजनेस स्टैंडर्ड - उद्यमियों की मांग उठाएंगे पवार
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उद्यमियों की मांग उठाएंगे पवार
संजय जोग / मुंबई November 06, 2013

महाराष्ट्र में हर महीने एक लाख यूनिट या इससे ज्यादा बिजली की खपत करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं को मामूली राहत मिली है, जो बिजली दरें कम किए जाने की मांग कर रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता शरद पवार औद्योगिक उपभोक्ताओं के पक्ष में खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा है कि 9 रुपये प्रति यूनिट बिजली की दरें अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा है। पवार ने औद्योगिक उपभोक्ताओं को यह भी आश्वासन दिया है कि वे इस मसले को मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण व उप मुख्यमंत्री अजित पवार के सामने उठाएंगे।

उद्योग संगठनों ने तर्क दिया है कि राज्य सरकार की महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी (महावितरण) की ओर से तय की गई दरें अन्य राज्यों की तुलना में 2 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट ज्यादा हैं। महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग के उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में बिजली दरें  8.82 रुपये प्रति यूनिट के सर्वोच्च स्तर पर हैं। उसके बाद दिल्ली (6.64 रुपये), तमिलनाडु (6.04 रुपये), झारखंड (5.82 रुपये), कर्नाटक (5.56 रुपये), छत्तीसगढ़ (5.46 रुपये) और ओडिशा (4.95 रुपये) का स्थान है।

महावितरण के कुल 22.1 मिलियन उपभोक्ताओं में 3.12 लाख औद्योगिक उपभोक्ता हैं। इसमें से 12,000 उपभोक्ता ज्यादा बिजली की खपत करने वाले हैं। महावितरण ने इन ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं से करीब 10,000 करोड़ रुपये सालाना ज्यादा शुल्क प्राप्त करता है, जिसका इस्तेमाल कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने में होता है। महावितरण ने राज्य सरकार से किसानों के कुल 8000 करोड़ रुपये बिजली बकाये में से 3,800 करोड़ रुपये भुगतान किए जाने की मांग की है।

विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के एनर्जी सेल के चेयरमैन आरबी गोयनका ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बाचतीत में कहा, 'मौजूदा हालात में बिजली दरें अवहनीय स्तर तक बढ़ा दी गई हैं। ऐसे में उद्योगों के लिए इतनी महंगी बिजली का इस्तेमाल करना कठिन होगा और उन्हें कारोबार समेटना पड़ेगा, क्योंकि पड़ोसी राज्यों में बिजली बहुत सस्ती है। महाराष्ट्र के उद्योग पड़ोसी राज्यों के उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगे।Ó

महावितरण के एक अधिकारी ने कहा कि महावितरण औद्योगिक उपभोक्ताओं को रात के वक्त बिजली दरों में 2.50 रुपये प्रति यूनिट छूट देता है। बहरहाल उद्योग संगठनों का कहना है कि इस छूट के बावजूद बिजली दरें बहुत ज्यादा हैं।

पवार की ओर से समर्थन ऐसे वक्त में आया है, जब चव्हाण सरकार के कई मंत्रियों ने हाल की बैठक में आशंका जताई थी कि बिजली दरें बहुत ज्यादा होने की वजह से निवेश प्रभावित हो सकता है और मौजूदा उद्योग भी उन राज्यों का रुख कर सकते हैं, जहां बिजली दरें कम हैं। इसके चलते चव्हाण को इस मसले पर कैबिनेट की उप समिति गठित करनी पड़ी थी।

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