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पहली बार सोने ने किया निवेशकों को निराश
सुशील मिश्र / मुंबई November 01, 2013

धनतेरस और दीवाली में समृद्धि का प्रतीक सोना पहली बार निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। पिछले साल दीवाली पर सोना खरीदने वालों को पांच फीसदी से ज्यादा का घाटा हुआ है। दीवाली से दीवाली तक घरेलू बाजार में सोना हमेशा ही ऊपर रहा है, जबकि वैश्विक बाजार में इसके पहले 2008 में भी सोने की कीमतों में गिरावट हुई थी। दीवाली में पहली बार सोना खरा नहीं बल्कि खोटा होने की वजह वैश्विक बाजार में भारी गिरावट को माना जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और आयात शुल्क की मोटी परत के बावजूद सोना पिछले साल की दीवाली के स्तर पर नहीं टिक सका।

भारतीय समाज में धनतेरस और दीवाली को निवेश के हिसाब से सबसे बेहतरीन समय बना जाता था जबकि सोने को निवेश का सबसे बेहतर विकल्प माना जाता रहा है।  सोने में निवेश करने वालों को कभी निराश भी नहीं होना पड़ा है, जबकि पहली बार सोना अपने निवेशकों की उम्मीदों में खोटा साबित हुआ है। पिछली दीवाली को सोना  31,775 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो इस बार धनतेरस के दिन 30 हजार रुपये के नीचे था। इस तरह इस बार सोने में निवेश करने वालों को 5 फीसदी से भी ज्यादा नुकसान हुआ है। अब दीवाली के दिन ही मुहूर्त टे्रङ्क्षडग कारोबार होगा, जिसमें सोना पिछले साल के स्तर को पार कर पाना मुश्किल होगा।

चांदी ने भी निवेशकों की उम्मीदों पानी फेरा है। इस साल चांदी में निवेश करने वालों करीब 20 फीसदी नुकसान हुआ है। पिछले साल दीवाली के दिन चांदी 62,085 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी, जो इस समय 50 हजार के नीचे कारोबार कर रही है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह वैश्विक बाजार में आई गिरावट है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग में कमी और सटोरियों द्वारा बिकवाली किए जाने से सालभर के दौरान वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें करीब 23 फीसदी गिरी हैं। वैश्विक बाजार में कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद घरेलू बाजार में सोने की कीमतें महज 5 फीसदी फीसदी गिरी हैं। इसकी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी को माना जा रहा है।

ऐंजल ब्रोकिंग के बुलियन एवं करेंसी प्रमुख नवीन माथुर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में संवत 2069 में सोने की कीमतों में करीब 400 डॉलर प्रति औंस की गिरावट आई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के माहौल बना हुआ है। आर्थिक तंगी के कारण निवेशक भयभीत हैं जिसके कारण कीमतों में गिरावट आई है। वर्ष 2012 में दीवाली पर सोने की कीमत 1,725.00 डॉलर प्रति औंस थी, जो इस समय 1,334 डॉलर प्रति औंस है। इस साल सोना 1,200 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर तक जा चुका है।

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से परांपरागत ज्वैलर्स खुश हैं। ज्वैलरों का कहना की कीमतें बहुत ज्यादा होने की वजह से उनका कारोबार प्रभावित हुआ है। इस स्तर पर लोग सोना नहीं खरीदना चाह रहे हैं। कीमतों में गिरावट से ग्राहकों के साथ कारोबारियों को भी फायदा होगा, क्योंकि बाजार में खरीदारों की संख्या बढ़ेगी।

मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कुमार जैन का कहना है कि सोने की कीमतों में गिरावट होना कारोबार के लिहाज से अच्छा है। इस बार वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है, लेकिन उसका फायदा घरेलू ग्राहकों को नहीं मिला। क्योंकि रुपये काफी कमजोर हो गया। इस साल रुपये की कीमत में 12.5 फीसदी से भी ज्यादा की गिरावट आई है। पिछली दीवाली को एक डॉलर की कीमत 54.88 रुपये थी, जो इस समय 61.84 रुपये है।

वैश्विक बाजार में भारी गिरावट के बावजूद घरेलू ग्राहकों को इसको खास फायदा नहीं मिला, बल्कि आभूषण उद्योग पहली बार लडख़डाता नजर आ रहा है। संगम चैन लिमिटेड के निदेशक रमन सोलंकी कहते हैं कि पिछले एक साल में सरकार ने पांच बार सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की है। आयात शुल्क 2 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी पहुंच गया है। इसके कारण घरेलू बाजार में कीमतें उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हुई हैं। सरकार की सख्ती की वजह से इस साल सोने का आयात 65 फीसदी तक कम हो गया है। लेकिन रमन कहते हैं कि सोने की कीमतों में बहुत ज्यादा दिनों तक गिरावट का माहौल नहीं रहने वाला है क्योंकि वैश्विक बाजार में सोना निचले स्तर को छू चुका है।

 

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