बिजनेस स्टैंडर्ड - नहीं उत्खनन तो ब्लॉक करो वापस
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नहीं उत्खनन तो ब्लॉक करो वापस
सुरजीत दास गुप्ता और शाइन जैकब / नई दिल्ली 10 28, 2013

पेट्रोलियम मंत्रालय ने मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को तगड़ा झटका देते हुए उससे केजी-डी6 के पांच ब्लॉकों को तत्काल छोडऩे का आदेश दिया है। ब्लॉकों को छोडऩे के बाद सरकार अब प्राथमिकता के आधार पर इसकी नीलामी करेगी। 

मंत्रालय ने आरआईएल के कार्यकारी निदेशक पी एम एस प्रसाद और बीपी ग्रुप कंपनीज के क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं कंट्री प्रमुख शशि मुकुंदम को संबोधित अपने 23 अक्टूबर के फैसले में कहा कि उन्हें तत्काल प्रभाव से अपने 7,645 वर्ग किलोमीटर में फैले केजी-डीडब्ल्यूएन-98/3 या केजी-डी6 ब्लॉक के 6,198.88 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को छोडऩा होगा। 805 अरब घन फुट भंडार वाले इन पांच ब्लॉकों में डी4, डी7, डी8, डी16 और डी23 के प्राकृतिक गैस भंडारों का कुल मूल्यांकन 10 अरब डॉलर है, जो केजी-डी6 ब्लॉक में 80 फीसदी से ज्यादा का योगदान करते हैं।

हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) द्वारा आरआईएल से इन ब्लॉकों को खाली कराने के लिए की जा रही मशक्कत के पीछे वजह यह है कि कंपनी 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर गैस की बिक्री को अव्यावहारिक बताते हुए न तो क्षेत्र विकास योजना (एफडीपी) जमा नहीं कर रही थी और न ही ड्रिल स्टेम टेस्टिंग (डीएसटी) ही उपलब्ध करा रही थी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने भी अपनी लेखा जांच रिपोर्ट में यही बात उठाई थी और केजी-डी6 क्षेत्र की समीक्षा की मांग की थी।

60 फीसदी हिस्सेदारी के साथ आरआईएल केजी-डी6 ब्लॉक की परिचालक है, जबकि बीपी और कनाडा की नीको रिसोर्सेज के पास क्रमश: 30 फीसदी और 10 फीसदी हिस्सेदारी है।

23 अक्टूबर के पत्र के मुताबिक खोज का समय जुलाई 2008 में खत्म हो गया था, इसलिए आरआईएल को विकास और खोज क्षेत्रों सहित केजी-डी6 का 1,446.12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अपने पास रखना चाहिए। कंपनी डी1, डी3, डी26, डी2, डी6, डी19, डी22, डी42, डी34, डी29, डी30 और डी31 जैसे क्षेत्रों को अपने पास रख सकती है। संपर्क करने पर आरआईएल के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर इस घटनाक्रम की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि हालांकि उत्पादन साझेदारी करार के मुताबिक गैस की कीमत 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू मार्च 2014 तक स्वीकृत है, लेकिन डीजीएच पुरानी कीमत पर विकास योजना के मूल्यांकन और पांच ब्लॉकों को अव्यावहारिक घोषित करने पर जोर दे रहा था।

आरआईएल पहले ही डीजीएच को बता चुकी थी कि कंपनी 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू के मूल्यांकन पर सहमत नहीं है और वास्तविक उत्पादन शुरू होने पर यह कीमत बढ़ सकती है। कंपनी केजी-डी6 के 70 फीसदी हिस्से को छोडऩे पर सहमत थी, लेकिन डीजीएच ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

यह फैसला मोइली के 9 अक्टूबर को उस प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद आया है, जिसमें अनुमानित 805 अरब घन फुट भंडार को प्राथमिकता के आधार पर नीलाम करने का सुझाव दिया गया था। हालांकि परिचालक कंपनी को राहत देते हुए तीन अन्य खोज (डी29, डी30 और डी31) अपने पास रखने, फिर से डीएसटी कराने और इसके आधार पर इसकी व्यवहार्यता की घोषणा करने की अनुमति दी गई थी। 345 अरब घन फुट प्राकृतिक गैस के भंडार वाले इन तीन ब्लॉकों का मूल्यांकन लगभग 4 अरब डॉलर है।

मोइली ने कहा कि इस डीएसटी के आधार पर इस मामले को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के सामने रखा जाएगा। हालांकि उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही सरकार इन ब्लॉकों नई उत्खनन लाइसेंसिंग नीति के अंतर्गत रख दे, लेकिन नई परिचालक कंपनी को आरआईएल के बुनियादी ढांचे पर निर्भर रहना पड़ेगा।

  • मंत्रालय का फरमान, केजी-डी 6 ब्लॉक का 80 फीसदी क्षेत्र तत्काल छोड़े कंपनी
  • आरआईएल लंबे से समय से इनके विकास को बता रही थी अव्यावहारिक
  • सीएजी ने भी रिपोर्ट में कंपनी पर खड़े किए थे सवाल और केजी-डी6 की समीक्षा की मांग की थी
  • ब्रिटेन की बीपी और कनाडा की नीको रिसोर्सेज की भी है इसमें हिस्सेदारी
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