बिजनेस स्टैंडर्ड - 22 नदियों में खनन को मंजूरी
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22 नदियों में खनन को मंजूरी
शिशिर प्रशांत / देहरादून October 23, 2013

उच्चतम न्यायालय ने 22 नदियों में खनन को मंजूरी दे दी है, जिसमें उत्तराखंड की कोसी भी शामिल है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बुधवार को यह घोषणा की।
बहुगुणा ने यह भी कहा कि सरकार नजर रखेगी कि इन 22 नदियों से रेत व अन्य छोटे खनिजों की खुदाई पारदर्शी तरीके से हो और कोई गैर कानूनी गतिविधि न होने पाए। बहुगुणा ने कहा, 'शिकायतों को ध्यान में रखते हुए हम कोसी और अन्य नदियों में किसी भी अवैध खनन गतिविधि को रोकने के लिए विशेष खनन दस्ते तैनात करेंगे।Ó

सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा 22 नदियों में कथित अवैध खनन की शिकायत और पर्यावरण संबंधी चिंता को लेकर इनमें खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
22 नदियों में खनन की अनुमति ऐसे समय में मिली है, जब सरकार पर अवैध खनिकों और बालू माफिया के प्रति नरम रुख अपनाने के आरोप लग रहे हैं। उत्तराखंड में नदियों के किनारे अवैध खनन को रोकने के लिए पहले ही विशेष विजिलेंस माइनिंग फोर्स का गठन किया गया है।

खनन बल देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसे संवेदनशील जिलों में खनन गतिविधियों के नियमन का काम करेगा, जहां हाल के दिनों में खनन माफिया के सक्रिय होने की शिकायतें आई हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार ने खनन कारोबार में निजी क्षेत्र को लाने के लिए राज्य कैबिनेट की उपसमिति गठित की है, जिससे निजी कारोबारियों के खुले टेंडर के जरिये ठेके दिए जा सकें। लेकिन बुधवार को हुई बैठक में उपसमिति कोई फैसला नहींं कर सकी। सरकार को अभी नई खनन नीति लागू करनी है, जो इस साल मार्च में पेश की गई थी।

राजस्थान में रेत खनन पर रोक से ठप पड़ा निर्माण
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक यहां रेत खनन पर रोक लग गई है। ऐसे में रेत के अभाव में निर्माण कार्य ठप पड़ गया है।

रेत न मिलने से सबसे ज्यादा असर मेट्रो परियोजना पर पडऩे की आशंका है। मेट्रो के पहले चरण में मानसरोवर से चांदपोल तक निर्माण कार्य चल रहा है। यदि रेत खनन पर लंबे समय तक रोक लगी रही तो आने वाले समय में निर्माण कार्य के लिए रेत मिलना मुश्किल होगा। हालांकि मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि उनके पास दो सप्ताह के लिए रेत का स्टॉक है। इसलिए फिलहाल उनके सामने कोई समस्या नहीं है, लेकिन बाद में कुछ परेशानियां हो सकती हैं।

जयपुर में इस समय 9 परियोजनाओं में 6 हजार आवास बनने हैं। दूसरे चरण में भी 10 प्रोजेक्ट शुरू होने हैं। डेवलपरों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में रेत पर रोक से हुई समस्याओं से सबक लेकर इसका स्टॉक करना शुरू कर दिया था, लेकिन यह स्टॉक सिर्फ एक सप्ताह के लिए है, उसके बाद समस्या पैदा हो सकती है।

वहीं निजी बिल्डरों की हालत ज्यादा खराब है क्योंकि निजी बिल्डर मैटेरियल का ज्यादा स्टॉक नहीं रखते हैं। जयपुर में इस समय करीब 1500 छोटे-बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें आवासीय परियोजनाएं ज्यादा हैं। इन परियोजनाओं पर जल्द ही असर पडऩा तय है। बिल्डरों का कहना है कि महंगी दरों पर रेत खरीदकर निर्माण कार्य जारी रखते हैं तो इसका असर उसकी लागत पर पड़ेगा।

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