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विवादों से नाता, झूठ बोलना नहीं आता
आभास शर्मा /  October 22, 2013

ज्वाला गुट्टïा देश की सबसे लोकप्रिय बैडमिंटन खिलाडिय़ों में से एक हैं। विवादों से उनका पुराना नाता है क्योंकि जरूरत के वक्त चुप रहना उन्हें पसंद नहीं है। बता रहे हैं आभास शर्मा


श्रुति कुरियन कानेतकर ने राष्टï्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेलते हुए बहुत नाम कमाया। वर्ष 2002 से 2008 तक युगल मैचों में अपनी साथी के साथ छह राष्टï्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं जीतीं और उन दोनों को हराना लगभग नामुमकिन सा दिख रहा था। खेलों की दूसरी साझेदारियों की ही तरह इनके बीच भी कुछ गलतफहमियां थीं लेकिन उनका असर खेल पर कभी नहीं पड़ा। दुनिया की सर्वश्रेष्ठï जोडिय़ों के बीच ये दोनों 23वें पायदान पर थीं। हालांकि वर्ष 2009 में चीजें खराब होने लगीं और दोनों खिलाडिय़ों ने एक दूसरे से अलग होने में ही भलाई समझी। श्रुति की दूसरी सहयोगी थीं ज्वाला गुट्टïा। श्रुति कहती हैं, 'हम दोनों साथ में बहुत अच्छे थे लेकिन एक दूसरे के अहम को लेकर कुछ समस्याएं हुईं जिनसे हम उबर नहीं सके।Ó इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं था क्योंकि ज्वाला की पहचान दिमाग के मुताबिक चलने वालों में से थी और वह हरेक चीज में आगे रहने की कोशिश करती थीं।

यही वजह है कि ज्वाला अक्सर विवादों में रहीं। एक जमाने में उनकी साथी रही एक खिलाड़ी बताती हैं, 'आप नहीं जानते कि ज्वाला किस बात पर भड़क जाएंगी। वह बहुत ही प्रतिस्पर्धी हैं। कुछ दिनों तो वह आपको एक इंच भी जगह नहीं देंगी जबकि कुछ दिनों बाद आपके सामने एक ऐसी लड़की होगी जिसे सुर्खियों में बने रहना काफी पसंद है।Ó

हाल में संपन्न हुए इंडियन बैडमिंटन लीग के दौरान ज्वाला ने उस वक्त अपनी नाखुशी खुलकर जाहिर की जब उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि खिलाडिय़ों की नीलामी के वक्त उनकी आधार कीमत रातोरात आधी कर दी गई। उस वक्त उन्होंने कहा, 'मैं डबल्स खिलाड़ी के तौर पर लोकप्रिय हूं। मैं डबल्स खेल की ही विशेषज्ञ हूं इसलिए मेरे आधार मूल्य में कटौती करना गलत है। मुझे बुरा लगा, मेरे साथ धोखा हुआ। मैंने आईबीएल के साथ एक आइकन खिलाड़ी के तौर पर करार किया था इसलिए उसमें कुछ कटौती करना ठीक नहीं है।Ó

ज्वाला आज भले ही युगल खिलाड़ी के तौर पर जानी जाती हों लेकिन उन्होंने अपना जीवन एकल खिलाड़ी के रूप में ही शुरू किया था और 17 साल की उम्र में वर्ष 2000 में राष्टï्रीय जूनियर चैंपियनशिप जीती थी। कोर्ट पर ज्वाला हमेशा से आक्रामक रहीं इसलिए ही जब उनके प्रशिक्षक एस एम आरिफ ने उनसे युगल की ओर ध्यान लगाने को कहा तो वह काफी खुश हुईं। ज्वाला की पहली साथी श्रुति थीं और दोनों ही कोर्ट में एक दूसरे की पूरक के तौर पर खेला करती थीं। तेज तर्रार और मुस्तैद श्रुति कोर्ट को कवर करती तो ज्वाला नेट के आसपास कमान संभालती थीं। दोनों की जोड़ी तो कमाल थी लेकिन फिर भी दोनों के बीच कुछ खिंचाव जरूर था। राष्टï्रीय स्तर की एक पूर्व खिलाड़ी कहती हैं, 'ज्वाला श्रुति से एक बच्चे की तरह व्यवहार करती थीं और यह ज्यादा दिनों तक नहीं चला।Ó

आरिफ कहते हैं, 'वह अपने स्कूल के दिनों से ही सबसे आगे रहती थी और यहां तक कि मेरे कोचिंग कैंप में भी वह नेतृत्व ही किया करती थी।Ó ज्वाला आरिफ को पिता की तरह मानती हैं और यह बात स्वीकार करती हैं कि उनके जीवन में आरिफ का काफी प्रभाव है। ज्वाला को आरिफ का संरक्षण आठ वर्ष की उम्र से ही मिला और इस दिग्गज प्रशिक्षक ने ज्वाला के जीवन के हर उतार-चढ़ाव देखे हैं। प्रशिक्षक कहते हैं, 'इन सालों के दौरान हमारे बीच कई बार नोकझोंक हुई लेकिन उसने अपने मन में कभी कोई मलाल नहीं रखा। वह हमेशा अपने सिद्घांतों के लिए लड़ती है।Ó

अगर वह गलत होगी तो वह बेहिचक माफी मांग लेगी लेकिन अपनी बात रखने के बाद।

भारतीय पिता और चीनी मां की संतान ज्वाला पहली बार उस वक्त सुर्खियों में आईं जब वर्ष 1996 में उन्होंने केरल के त्रिशूर में आयोजित अंडर-13 राष्टï्रीय चैंपियनशिप जीती थी। चार साल बाद ही वह सीनियर राष्टï्रीय महिला चैंपियन बन गईं। वर्ष 2005 में ज्वाला ने राष्टï्रीय पुरुष चैंपियन चेतन आनंद से शादी कर ली। राष्टï्रीय कैंप के दौरान राष्टï्रीय प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद ने जब आनंद और अन्य खिलाडिय़ों से एक अंतरराष्टï्रीय मैच खेलने के लिए कहा, उस वक्त की यादें ताजा करते हुए एक खिलाड़ी कहते हैं कि ज्वाला ने अपने पति की दिक्कतों को मीडिया के जरिये सबके सामने रखा था।

डबल्स खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने हमेशा इस बात की शिकायत की कि एकल खिलाडिय़ों को प्राथमिकता दी जाती है। मिश्रित युगल में उनके सहयोगी के तौर पर खेलने वाले वी डीजू कहते हैं, 'वह हमेशा सबके लिए बोलती हैं और दूसरों के मसले भी उठाती हैं।Ó पेइचिंग ओलंपिक की यादें ताजा करते हुए डीजू कहते हैं कि ज्वाला उस दौरान काफी केंद्रित और संयमित थीं और उन्हें इसी बात के लिए जाना जाता था। वह कहते हैं, 'ओलंपिक में हार के बाद वह बुरी तरह निराश हो गई थीं।Ó डीजू कहते हैं कि ज्वाला हमेशा ही उन्हें प्रोत्साहित करती हैं और खेल सुधारने के लिए प्रेरित करती हैं। वह कहते हैं, 'युगल के लिहाज से वह एक शानदार खिलाड़ी हैं और उनके साथ खेलने में मजा तो आता ही है साथ ही सीखने के लिए भी काफी कुछ मिलता है।Ó मिश्रित युगल में इन दोनों की जोड़ी वर्ष 2010 की सर्वश्रेष्ठï जोडिय़ों में आठवें पायदान पर थी।

वर्ष 2009 के आसपास उन्हें अश्विनी पोनप्पा के रूप में युगल महिला प्रतियोगिता के लिए नई साथी मिली। वर्ष 2010 में दिल्ली राष्टï्रमंडल खेलों में इस जोड़ी ने स्वर्ण पदक जीता है और ऐसा लगा कि यह एक नई शुरुआत है। पोनप्पा शर्मिली, कम बोलने वाली खिलाड़ी थीं। शायद ही उन्हें किसी ने खेल के अलावा किसी दूसरे मसले में देखा हो। डीजू की ही तरह ज्वाला उनके लिए भी संरक्षक की ही भूमिका में थीं।

ज्वाला अपने व्यवहार में अक्सर अतिवादी हो जाती हैं। जब वह किसी से खुश होंगी तो उस पर प्यार ही प्यार बरसाएंगी और जब वह आलोचना करेंगी तो भी वह किसी भी हद तक जा सकती हैं। पोनप्पा के साथ भी उनकी जोड़ी मार्च, 2013 में टूट गई हालांकि इसी वर्ष अगस्त से दोनों एक बार फिर से एक दूसरे के साथ आ गईं। राष्टï्रीय स्तर के एक खिलाड़ी कहते हैं, 'वह अपने  निरंकुश व्यवहार की वजह से अक्सर आप पर हावी हो जाती हैं और अश्विनी को शायद यह बात महसूस हुई हो कि उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।Ó

श्रुति की ही तरह पोनप्पा को भी ज्वाला की सार्वजनिक आलोचनाएं झेलनी पड़ीं, हालांकि ज्वाला ने उन्हें काफी हद तक प्रोत्साहित भी किया। ज्वाला ने एक बार अपनी साथी के लिए कहा था कि श्रुति देश की सबसे बेहतरीन खिलाडिय़ों में से एक हैं।

ज्वाला की निजी जिंदगी में भी परेशानियों और विवादों की कोई कमी नहीं है और यही वजह है कि अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी वह अक्सर अखबारों की सुर्खियों में दिखती हैं। सर्वश्रेष्ठï 15 युगल खिलाडिय़ों में शुमार होने के बावजूद आनंद की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह ज्वाला हैं। इस जोड़े को बेहतर तरीके से जानने वाले एक खिलाड़ी कहते हैं, 'ज्वाला की लोकप्रियता काफी है और दोनों के बीच काफी समस्याएं हैं।Ó

शादी के पांच साल बाद ही वर्ष 2011 से दोनों अलग हो गए। इस बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के साथ उनके संबंधों को लेकर अफवाहों का बाजार काफी गर्म रहा। ज्वाला ने कड़े शब्दों में इससे इनकार किया लेकिन अजहरुद्दीन उनके कई मैचों के दौरान उपस्थित रहे और इसी दौरान उन्होंने बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मीदवारी भी पेश की।

मार्च, 2013 में बैडमिंटन खिलाड़ी ने एक तेलुगू फिल्म के लिए आइटम नंबर करने के लिए हामी भी भर दी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका ध्यान पूरी तरह बैडमिंटन की ओर है और यह आइटम नंबर करने का फैसला उन्होंने सिर्फ एक दोस्त के कहने पर किया। यही लगभग वही दौर था जब पोनप्पा के साथ उनकी साझेदारी मुश्किल भरे दौर से गुजर रही थी। उनकी सम्मोहक छवि की वजह से निर्माता उनकी ओर आकर्षित हुए, लेकिन उनकी मानें तो उन्होंने इसके बाद कोई नया काम अपने हाथ में नहीं लिया।

खिलाड़ी भी इत्तफाक नहीं रखते कि ज्वाला का ध्यान खेल के अलावा दूसरी चीजों की ओर भटक रहा है। लेकिन कोर्ट के बाहर उनकी गतिविधियों की वजह से भी उन पर लोगों की नजरें लगी हुई हैं। बैडमिंटन एसोसिएशन के एक अधिकारी कहते हैं कि ज्वाला की ओर लोग खुद ही आकर्षित होते हैं और खेल के लिए हर तरह की लोकप्रियता अच्छी नहीं होती है। वह कहते हैं कि साइना नेहवाल आमतौर पर चुप रहकर अपने खेल से लोकप्रियता अर्जित करती हैं जबकि ज्वाला खुलकर बोलने वालों में से हैं।

चोट से उबरकर ज्वाला ने आईबीएल में हिस्सा लिया जहां उनकी स्पष्टï टिप्पणियों की वजह से बैडमिंटन एसोसिएशन ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया। खिलाडिय़ों की पूरी बिरादरी उनके साथ थी और आरिफ ने भी अधिकारियों की अनुचित कार्रवाई के लिए उनका काफी विरोध किया। आरिफ कहते हैं, 'उसने कुछ भी गलत नहीं किया। वह असली ज्वाला थी जिसने उस चीज के लिए आवाज उठाई जो उसे सही लगी।Ó

अपने बयान के बारे में ज्वाला कहती हैं, 'उसमें क्या गलत है? अपनी बात कहने का मतलब आजीवन प्रतिबंध होता है? यह सच में बहुत गलत है। मैंने वही कहा जो सच था, मैं झूठ नहीं बोल सकती थी।Ó दिल्ली उच्च न्यायालय ने बैडमिंटन एसोसिएशन के फैसले को पलट दिया और ज्वाला पोनप्पा के साथ जर्मन और फ्रेंच ओपन में खेलेंगी। एक दूसरे का समर्थन करने और राहत व्यक्त करने के लिए दोनों खिलाडिय़ों ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्वीटर की मदद ली।

ज्वाला ने ट्वीट किया, 'हर दिन जब भी मैं आप सभी को मेरा समर्थन करते हुए देखती हूं मुझे इससे काफी बल मिलता है और मैं काफी मजबूत महसूस करती हूं। आप सभी का शुक्रिया।Ó वह काफी मजबूत, शक्तिशाली, स्पष्टïवादी हैं और अपनी बात कहने से कभी नहीं शर्माती हैं। उनकी ये खूबियां कभी उनके पक्ष में तो कभी खिलाफ भी काम करती है। एक बात जो उनके बारे में सच है वह यह है कि ज्वाला एक पहेली से कम नहीं हैं।

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