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उत्तराखंड में बन रही है एमएसएमई नीति
शिशिर प्रशांत /  October 20, 2013

उत्तराखंड सरकार छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए एक एमएसएमई नीति तैयार कर रही है। राज्य सरकार 40,000 ऐसे उद्यमों को प्रोत्साहन और करों में छूट दे सकती है और नई इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कदम उठा सकती है। पिछले साल ही सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएई) के लिए एक अलग विभाग स्थापित किया गया था।

एमएसएमई विभाग ने बिजनेस चैंबरों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। राज्य एमएसएमई सचिव अजय प्रद्योत कहते हैं, 'हम एक नीति पर विचार कर रहे हैं जिसके तहत हम नई इकाइयों को प्रोत्साहन देंगे और उन सभी उद्यमों को दोबारा पटरी पर लाएंगे जो जून में आई बाढ़ के बाद तबाह हो गए थे।Ó

नई एमएसएमई नीति उस वक्त लागू की जाएगी जब 2008 में पहाड़ी क्षेत्र संवर्धन नीति (भाजपा सरकार द्वारा लागू) पहले ही प्रभाव में है। यह नीति लागू होने के  पहले चार साल में सालाना एमएसएमई इकाइयों की स्थापना से पता चलता है कि पहाड़ी क्षेत्र प्रोत्साहन नीति के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस समय से और जून 2012 के बीच 3,000 से अधिक छोटी इकाइयां (ज्यादातर सूक्ष्म) स्थापित हुईं, जिन पर करीब 400 करोड़ रुपये लागत आई और 12,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला।

 नई एमएसएमई नीति के तहत दिए जाने वाले प्रोत्साहन पहाड़ी क्षेत्र उद्योग संवर्धन नीति के समान ही होंगे। हालांकि इसकी एक प्रमुख विशेषता सिंगल विंडो एक्ट का क्रियान्वयन होगा, जो इस साल प्रभाव में आया है। एमएसएमई विभाग में अतिरिक्त सचिव एस सी नौटियाल कहते हैं, 'सभी मंजूरी सिंगल विंडो सिस्टम के तहत दिए जाएंगे।Ó नीति के तहत सरकार पूंजी सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन देगी जो उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों के लिए विशेष एकीकृत औद्योगिक संवर्धन नीति के तहत भी उपलब्ध है। नौटियाल ने कहा कि इन प्रोत्साहनों में स्टांप शुल्क, बिजली बिल में छूट, परिवनह एवं पूंजी सब्सिडी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नई पॉलिसी में 20 पर्चेज प्रीफरेंस भी देगी।

नई नीति का मकसद पहाड़ी क्षेत्रों की तबाह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। एमएसएमई प्रवर्धन इकाई इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) के अध्यक्ष पंकज गुप्ता कहते हैं, 'अगर हम वाकई नई एमएसएमई नीति लाना चाहते हैं तो नई इकाइयों के लिए हमें एक बेहतर बुनियादी ढांचा नीति तैयार करनी होगी।

हमें उनमें छत वाली फैक्टरी देनी चाहिए, जिसमें सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सुझाव दिया है कि नीति में सरकार की भूमिका प्रक्रिया आसान कराने वाली होनी चाहिए। विकास, बुनियादी संरचना, संकुल विकास और प्रतिस्पद्र्धा बढ़ाने पर सरकार का मुख्य जोर होना चाहिए।Ó

सीआईआई ने वेंडर पार्क साथ ही परंपरागत क्षेत्रों जैसे वाहन एवं कल-पुर्जे, खाद्य प्रसंस्करण, एफएमसीजी, सूचना-प्रौद्योगिकी और इनसे चलने वाली सेवाएं भी शामिल करने का सुझाव दिया है।

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