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प्रधानमंत्री भी शामिल हों जांच के दायरे में : पी सी पारेख
बी दशरथ रेड्डी /  October 16, 2013

भ्रष्टाचार और षडयंत्र के आरोपों से घिरे पूर्व कोयला सचिव प्रकाश चंद्र पारेख यह चाहते हैं कि अगर कोयला ब्लॉक आवंटन में हिंडाल्को को शामिल करने का फैसला होता है तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय था और उन्होंने ही अंतिम फैसला लिया था। बी दशरथ रेड्डी के साथ उनके साक्षात्कार के कुछ अंश :


कोयला सचिव के तौर पर आप अपने कदमों को कैसे सही ठहराएंगे जब केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने आपके कार्यकाल के दौरान ही हिंडाल्को को आवंटित किए गए कोयला ब्लॉक के मामले में एफआईआर दर्ज किया है?

हिंडाल्को भी उतनी ही योग्य कंपनी थी जितनी कि सरकारी कंपनी नेयवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन सक्षम थी। उस वक्त हिंडाल्को को नेयवेली के साथ एक संयुक्त उपक्रम बनाने का फैसला किया गया था। यह दोनों कंपनियों के लिए उचित था। मुझे भी लगता है कि इसमें कुछ गलत नहीं था। अगर सीबीआई को लगता है कि इसमें कुछ गलत था और हमने ऐसा करते वक्त कोई षडयंत्र किया है तो सबके खिलाफ जांच कराई जानी चाहिए। इस षडयंत्र में बिड़ला और मेरे अलावा भी कई जो लोग भी इसका हिस्सा थे वह चाहे प्रधानमंत्री ही क्यों न हों, उनके खिलाफ भी जांच होनी चाहिए। बिड़ला ने आवंटन के लिए प्रतिनिधित्व किया। मैंने सिफारिश की। प्रधानमंत्री ने इस पर गौर किया और फिर इस पर फैसला किया।

मीडिया में सीबीआई के सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आ रही हैं कि हिंडाल्को को आवंटन में शामिल करने का फैसला बिड़ला के साथ आपकी बैठक के बाद ही किया गया। क्या आप मानते हैं कि यह भले ही षडयंत्र न हो लेकिन इस प्रक्रिया में खामी थी क्योंकि स्क्रीनिंग कमिटी भी नेयवेली लिग्नाइट के लिए ही थी भले ही हिंडाल्को उस कथित कोयला ब्लॉक के लिए पहली आवेदक कंपनी थी?
ऐसा जरूरी नहीं है क्योंकि स्क्रीनिंग कमिटी आवंटन के लिए सिफारिश करती है लेकिन यह हमेशा अनिवार्य नहीं होता है। सरकार इससे अलग भी फैसला ले सकती है चाहे वह सचिव या मंत्री स्तर के फैसले के जरिये ही किया जाए। अगर सरकार को लगता है कि फैसले की समीक्षा की जानी चाहिए तो ऐसा हमेशा संभव है। स्क्रीनिंग कमिटी कोई फैसला लेने वाली संस्था नहीं है। फैसला हमेशा मंत्री ही करते हैं।

क्या आप मानते हैं कि सीबीआई ने इस मामले में गलत फैसला लिया है?

मेरा मानना है कि सीबीआई शायद नेकनीयती से किए गए सही फैसले और अवैध तरीके से किए गलत फैसले में अंतर करना भूल गई। अगर सीबीआई ने सावधानी से इस मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखा होता तो उनके इस निष्कर्ष पर पहुंचने का कोई आधार नहीं है कि हिंडाल्को के कोयला ब्लॉक आवंटन में षडयंत्र किया गया था। उन्होंने तो यह भी नहीं कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन में हिंडाल्को योग्य कंपनी नहीं थी या यह फर्जी पार्टी थी या इसमें खदान खोलने की क्षमता नहीं थी। पहले अगर यह आवंटन नेयवेली को होना था जो बाद में हिंडाल्को के नाम कर दिया गया, सिर्फ इस बात से ही फैसला गलत नहीं हो सकता है। मैंने अपने कार्यकाल के दौरान एक ब्लॉक में दो से ज्यादा तीन और चार योग्य कंपनियों को शामिल किया और उन्हें संयुक्त उपक्रम बनाने को कहा। यह कोई विशेष मामला नहीं था।

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