बिजनेस स्टैंडर्ड - कोयले पर फिर घिरे प्रधानमंत्री
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कोयले पर फिर घिरे प्रधानमंत्री
रुचिका चित्रवंशी और बी दशरथ रेड्डïी / नई दिल्ली/हैदराबाद 10 16, 2013

कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की लपटें अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक पहुंचने लगी हैं। विपक्षी दलों ने पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख के उस बयान पर प्रधानमंत्री को घेर लिया है, जिसमें पारेख ने कहा है कि अगर वह कोयला घोटाले के षड्यंत्रकर्ता हैं तो प्रधानमंत्री का नाम भी प्राथमिकी में होना चाहिए। प्रधानमंत्री के बचाव में कांग्रेस भी कुछ खास तर्क नहीं दे पाई और इससे उनका पक्ष अधिक कमजोर हो गया है।

घोटाले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को इस मामले की 14वीं प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें इसने पारेख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को आरोपी बनाया है।

पारेख के बयान से राजनीतिक गलियारे में भूचाल आया और विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री से इस घोटाले में उनकी भूमिका पर सफाई मांगी। प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)ने प्रधानमंत्री पर चौतरफा हल्ला बोलते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री व प्रधानमंत्री कार्यालय की जवाबदेही बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसलिए हम इस मामले की उचित जांच की मांग करते हैं।Ó भाजपा ने कहा कि पारेख बेहद विश्वसनीय साख वाले अधिकारी हैं इसलिए प्रधानमंत्री को आवंटन में अपनी भूमिका स्पष्टï करनी ही होगी।

हालांकि सीबीआई के वरिष्ठï सूत्रों ने बताया कि उसने यह आरोप सबूतों के आधार पर तय किए हैं ना कि अफवाहों पर। उच्चतम न्यायालय इस मामले की जांच पर नजर रख रहा है। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि कुछ व्यक्तियों के खिलाफ मामला दायर करने और अन्य के खिलाफ नहीं करने के अपने फैसले के बारे में एजेंसी सबूत और वजह अदालत को बताएगी। बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए गए साक्षात्कार में पारेख ने सीबीआई के आरोपों को चुनौती देते हुए कहा, 'इस फैसले में कुछ भी गलत नहीं है। यह सही और उचित फैसला था। मुझे नहीं समझ आ रहा कि सीबीआई इसे साजिश क्यों समझ रही है।Ó उन्होंने कहा, 'अगर यह साजिश है तो इसमें तीन प्रमुख भागीदार हैं। कुमार मंगलम बिड़ला, जिन्होंने कंपनी का प्रतिनिधित्व किया, मैं जिसने मामले की जांच कर सिफारिश की और प्रधानमंत्री, जिन्होंने कायेला मंत्री के तौर पर इस बारे में अंतिम फैसला किया।Ó

सीबीआई के अधिकारी इस बात पर अड़े हुए हैं कि उन्होंने सबूतों का आकलन किया है और सोच समझकर ही प्राथमिकी दर्ज की है। वरिष्ठï सूत्रों ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। पारेख को ईमानदार आईएएस अधिकारी बताते हुए भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा, 'अब समय आ गया है कि पारेख अपना पक्ष रखें। अभी तक उन्होंने इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा है, उन्हें अपनी सफाई देनी चाहिए। उन्हें सार्वजनिक स्तर पर यह बताना चाहिए कि उस समय  फैसले कैसे किए गए। उन्हें यह सब बताना चाहिए कि किस तरह कांग्रेस मुख्यालय से प्रधानमंत्री कार्यालय में चिट आ रही थीं और कैसे प्रधानमंत्री कार्यालय से कोयला मंत्रालय को कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए निर्देशित किया जा रहा था।Ó सिन्हा ने कहा, 'हम सभी जानते हैं कि इस घोटाले के दौरान प्रधानमंत्री कोयला मंत्री थे और प्रत्येक आवंटन उनके हस्ताक्षर के बाद ही हुआ है।Ó

सिन्हा ने कहा कि अंतिम मंजूरी देने वाले व्यक्ति की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही है और इसका बोझ सिफारिशें करने वालों पर डाला जा रहा है। कांग्रेस का बचाव भी बहुत कमजोर रहा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, 'मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की देखरेख में हो रही है और इस पर अटकलें लगाने से परहेज करना चाहिए। सरकार जांच में सहयोग कर रही है।Ó इस बीच, सीबीआई ने हिंडाल्को के दिल्ली कार्यालय मेंं छापेमारी के दौरान 25 करोड़ रुपये की राशि जब्त की। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि इस धन का कोई हिसाब किताब नहीं था।
   
   अब समय आ गया है कि पारेख अपना पक्ष रखें। उन्हें सार्वजनिक स्तर पर यह बताना चाहिए कि उस समय फाइलों पर कैसे फैसले किए गए।  

यशवंत सिन्हा, वरिष्ठï नेता, भाजपा

अगर यह षड्यंत्र है तो इसमें तीन प्रमुख भागीदार हैं। कुमार मंगलम बिड़ला, जिन्होंने कंपनी का प्रतिनिधित्व किया, मैं जिसने मामले की जांच कर सिफारिश की और प्रधानमंत्री, जिन्होंने इस पर अंतिम फैसला लिया।
पी सी पारेख, पूर्व कोयला सचिव

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