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पंजाब विश्वविद्यालय की बढ़ी आभा
वीनू संधू /  October 16, 2013

आमतौर पर सुर्खियों से दूर रहने वाला पंजाब विश्वविद्यालय टाइम्स हायर एजुकेशन वल्र्ड यूनिवर्सिटी की हाल ही में घोषित रैंकिंग के मुताबिक देश का सर्वश्रेष्ठï विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय के बारे में विस्तार से बता रही हैं वीनू संधू

चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित कम्युनिटी रेडियो स्टेशन हर सुबह आठ बजे चालू हो जाता है। एक पल में विश्वविद्यालय शहर के सेक्टर 14 और 25 में 2.2 वर्ग किलोमीटर में फैले अपने कैंपस में रहने वाले लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। विश्वविद्यालय की स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन स्टडीज की तीन मंजिला इमारत में चलने वाले चैनल पर दिन भर स्थानीय बैंडों का संगीत चलता रहता है और स्थानीय लेखकों व विशेषज्ञों के साक्षात्कारों का प्रसारण किया जाता है। साथ ही इस चैनल के माध्यम से कम चर्चित प्रतिभाओं को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाता है। ब्रेल लिपि में उपलब्ध होने वाली किताबों को नहीं पढ़ा जाता है और इससे उच्च शिक्षा के लिए प्रयास कर रहे नेत्रहीन छात्रों को फायदा होता है, इसके साथ ही उन्हें मुफ्त में ऑडियो लाइब्रेरी भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। ऐसी पहलों के जरिये विश्वविद्यालय समाज के प्रति अपने कर्तव्यों की पूर्ति कर रहा है जिसकी मदद से विश्वविद्यालय आज इस मुकाम तक पहुंचा है।

पंजाब विश्वविद्यालय की कहानी इस क्षेत्र के लोगों, उनके अशांत इतिहास और उनकी उत्तरजीविता की भावना के साथ गुथी हुई है। इस कहानी को जान कर ही इस विश्वविद्यालय की सफलता की कहानी को समझा जा सकता है। हाल ही में पंजाब विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन वल्र्ड यूनिवर्सिटी की देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची में जगह मिली है। यह कहानी करीब एक सदी पहले शुरू हुई थी। तब से उसने लंबा सफर तय किया है। भारत सरकार ने 1857 में तीन विश्वविद्यालयों कलकत्ता, मद्रास और बंबई की स्थापना की थी।

पंजाब विश्वविद्यालय के जीवन-वृतांत दि फाइट ऑफ दि फीनिक्स के लेखक और रसायन विभाग के प्रोफेसर (सेवानिवृत्त) डी वी एस जैन याद कहते हुए बताते हैं, 'लगभग एक दशक बाद दूसरे विश्वविद्यालयों की मांग उठने लगी, इस बार लाहौर की बारी थी।Ó लेकिन कई साल तक सरकार इसके लिए पैसा नहीं होने की बात करती रही। इसलिए लोगों ने खुद ही पैसा जुटाने का फैसला किया और इसे विश्वविद्यालय को दिया। स्थानीय राजा, चिकित्सक, वकील, छात्र, दुकानदार सभी एक जुट हो गए। विश्वविद्यालय की शुरुआत करने वाले और इतिहास विभाग के प्रमुख राजीवलोचन कहते हैं, 'राशन की दुकानों के बाहर गुल्लकें रख दी गई थीं, जिनमें लोगों ने पैसा जमा किया। जब ये गुल्लकें खोली गईं तो उनमें 10,000 रुपये निकले थे।Ó वह कहते हैं कि इस प्रकार 1882 में इस संस्थान का जन्म हुआ, शुरुआत में यहां प्राचीन शिक्षा को बढ़ावा दिया गया लेकिन जल्द ही यहां विज्ञान जैसे ज्यादा व्यावहारिक विषय पढ़ाए जाने लगे।Ó पंजाब विश्वविद्यालय भारत का पहला शिक्षण विश्वविद्यालय था, बाकी अन्य परीक्षा विश्वविद्यालय थे जहां डिग्रियां तो दी जाती थीं लेकिन पढ़ाने के लिए विभाग नहीं थे।
जब विभाजन हुआ तो सीमा के दोनों तरफ के लोगों की तरह विश्वविद्यालय भी बंट गया। यहां तक कि पुस्तकालय की किताबों को 'भारत और पाकिस्तानÓ की श्रेणी में बांट दिया गया था। भारत में विश्वविद्यालय कई शहरों में बंट गया, जिसका मुख्यालय सोलन में था और अध्यापन विभाग अमृतसर, होशियारपुर, जालंधर और कैंप कॉलेज दिल्ली में थे, जिन्हें पास के शरणार्थी शिविरों से अपने नाम मिले थे। देश के मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी होशियारपुर शाखा के छात्र थे। उन्होंने बाद में यहां पर अर्थशास्त्र में अध्यापन भी किया। चर्चा यह भी है कि इस शक्तिशाली पूर्व छात्र के होने से विश्वविद्यालय को इस शीर्ष श्रेणी को हासिल करने में मदद मिली। (इत्तफाक से ऐसा कम ही देखने को मिलता है, जब प्रधानमंत्री और विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज दोनों ही एक ही विश्वविद्यालय से हों)। लेकिन आज शीर्ष विश्वविद्यालयों की कतार में शामिल होने के पीछे सिर्फ प्रधानमंत्री ही एकमात्र वजह नहीं हैं।
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विश्वविद्यालय ने विशेष रूप से विज्ञान के क्षेत्र में तमाम प्रतिभाएं तैयार की हैं। स्वतंत्रता के बाद औद्योगिक रसायन के क्षेत्र में उसके शोध ने औद्योगिक क्रांति के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। फिलहाल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में करीब 140 शोध छात्र हैं। भौतिक विज्ञान विभाग ने इसे टाइम्स की सूची में जगह दिलाने में अहम योगदान दिया है। भौतिकी संकाय के चार सदस्यों और 12-14 शोध छात्र उस शोध का हिस्सा रहे जिसने गॉड पार्टिकल पर शोध की अगुआई की, जिसने ब्रिटेन के पीटर हिग्स और बेल्जियम के फ्रैंकॉइस इंग्लर्ट को 2013 का नोबेल पुरस्कार दिलाया था। लगभग 20 साल से काम कर रही भौतिकी विभाग की चेयरपर्सन मंजीत कौर ने कहा, 'ये उन सालों की मेहनत है जब हम बिना ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश लिए काम कर रहे थे। लेकिन वह मेहनत रंग लाई है।Ó
विश्वविद्यालय के कुलपति ए के ग्रोवर कहते हैं, 'वैज्ञानिक अनुसंधान को आम तौर पर कई दशकों के बाद मान्यता मिलती है।Ó इसके पहले भौतिक विज्ञानी ग्रोवर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में स्कूल ऑफ नैचुरल साइंसेज में प्रोफेसर थे। कुछ का मानना है कि विश्वविद्यालय को ज्यादा संगठित और तार्किक तरीके से पेश करने में कुलपति अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए शोधों के उदाहरणों की सूची में संस्थान ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों को पीछे छोड़ दिया। विश्वविद्यालय को इस सूची में 84.7 अंक मिले, जो इस सूची में एशिया में शीर्ष पर काबिज यूनिवर्सिटी ऑफ तोक्यो से आगे था। सभी दस्तावेज यूरोप के सीईआरएन में तैयार किए गए जिस प्रयोगशाला ने 'गॉड पार्टिकलÓ की खोज की और इसका श्रेय विश्वविद्यालय के शोध छात्रों को दिया। अपने दम पर किए गए शोधों के आधार पर  विश्वविद्यालय को महज 14 फीसदी अंक हासिल हुए।
हालांकि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। रसायन विभाग पर नजर डालें तो यहां फिलहाल 80 शोध छात्र काम कर रहे हैं। यहां कुछ भारतीय-जर्मन और भारतीय-जापानी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
जन संचार विभाग जो एक समय दो कमरों में संचालित होता था और  अब तीन मंजिला इमारत में संचालित होता है और इससे मल्टीमीडिया शोध केंद्र को प्रोत्साहन मिला है और इसका नाम बाद में बदलकर स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन स्टडीज कर दिया गया था। इसके चेयरमैन जयंत नारायण पेठकर कहते हैं, 'हमने यहां पर डॉक्टरेट कोर्स भी शुरू किया है।Ó विशेष संस्थान आईआईटी की तुलना में विश्वविद्यालय में 13 संकाय हैं, जहां शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।

विश्वविद्यालय भले ही विज्ञान के क्षेत्र में खासा काम कर रहा है, लेकिन जब दूसरे विषयों की बात आती है तो यहां कई विरोधाभास सामने आते हैं। राजीवलोचन कहते हैं, 'इतिहास में संकाय सदस्यों की संख्या 16 से घटकर छह रह गई है। सामाजिक विज्ञान में यह संख्या 20 से घटकर छह रह गई है।Ó राजनीतिक विज्ञान विभाग को अपने कुछ कोर्स बंद तक करने पड़ गए थे। भारतीय रंगमंच विभाग में जहां फिलहाल मरम्मत हो रही है, बिना चेयरमैन और गणितज्ञ के संचालित हो रहा है। इसकी कार्यवाहक चेयरमैन मधु राका हैं। ग्रोवर कहते हैं, 'राका विश्वविद्यालय की डीन  हैं और वह यहां कभी-कभार ही आती हैं।Ó

लेकिन रंगमंच विभाग में काम फिलहाल जारी है, जहां से अनुपम खेर और किरण खेर जैसे अभिनेता निकले हैं। मध्य प्रदेश के एक छात्र दिग्विजय ने कहा, 'हम योग की कक्षाओं के साथ सुबह छह बजे अपना दिन शुरू करते हैं और तब से रात तक काम जारी रहता है।Ó जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के चेयरपर्सन एस पी गौतम कहते हैं, 'पंजाब के लिए आतंकवाद सबसे मुुश्किल दौर रहा था, जिसने विश्वविद्यालय की संस्कृति को खासा प्रभावित किया।Ó गौतम 1971 से 2004 के बीच विश्वविद्यालय से जुड़े रहे, पहले छात्र और फिर शिक्षक के रूप में। जैन कहते हैं, '80 और 90 के दशक के दौरान अच्छे लोगों की नियुक्ति मुश्किल हो गई था। कई लोग यहां आना ही नहीं चाहते थे।Ó
    (साथ में कोमल अमित गेरा)

Keyword: टाइम्स हायर एजूकेशन वल्र्ड युनिवर्सिटी रैंकिंग, Punjab University, पंजाब विश्वविद्यालय,
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