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अवाम के बीच आम
मानवी कपूर /  October 06, 2013

दिल्ली में दिसंबर में होने वाला चुनाव आम आदमी पार्टी के लिए असली परीक्षण साबित होगा। मानवी कपूर ने पिछले रविवार को इसके नेता अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ चलते हुए पूरा दिन बिताया...

दिल्ली को चलाने की इच्छा रखने वाला यह शख्स शहर के बाहर गाजियाबाद में रहता है। गिरनार अपार्टमेंट का सुरक्षाकर्मी हाथ से चौथी मंजिल पर स्थित फ्लैट की ओर इशारा करता है, जो संभवत: वहां आने वालों को पूर्व नौकरशाह, भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखने वाले अरविंद केजरीवाल के घर का पता बता-बताकर हताश सा नजर आता है। सुबह के 9 बजे हैं और वह एक टेलीविजन चैनल के लिए साक्षात्कार रिकॉर्ड करवा रहे हैं। टेलीविजन के लिए उनकी मांग बढ़ गई है। इस बीच सवाल होता है, 'आप चीनी खाना पसंद करते हैं या दाल-चावल?Ó केजरीवाल बताते हैं कि उन्हें डायबिटीज है और हर दो-तीन घंटों में थोड़ा बहुत खाना लेते हैं।

सलेटी पैंट और नीली धारियों वाली कमीज पहनकर केजरीवाल सोफे पर बैठे हैं। वह घर में नंगे पैर नजर आते हैं। खाने की मेज पर नाश्ते के लिए पूड़ी-सब्जी परोसी जा रही है। मेज के बगल में रखी अलमारी में बी आर अंबेडकर और महात्मा गांधी की पुस्तकें लगी नजर आ रही हैं, जहां कुछ किताबें आयकर से संबंधित भी हैं। बाहर से आने वालों के लिए कुछ मूढ़े और एक दीवान भी रखा हुआ है। एक कोने में पानी की मशीन है। फर्श पर कोई कालीन नहीं बिछा है। केजरीवाल की पत्नी और भारतीय राजस्व सेवा की एक अधिकारी सुनीता घर पर भीड़-भाड़ की आदी सी लगती हैं, लेकिन वह टेलीविजन पर कभी नहीं आती हैं क्योंकि 'सरकारी नौकरी से जुड़ी शर्तें उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं।Ó जैसे ही वह केजरीवाल को आम आदमी पार्टी की टोपी सौंपती हैं, तभी एक पार्टी कार्यकर्ता वैभव कुमार कमरे में प्रवेश करते हैं। वह उन्हें भाभीजी कहकर संबोधित करते हैं।
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सुबह के लगभग 9.45 बजे केजरीवाल और कुमार सीढिय़ों से नीचे उतरते हैं और नीले रंग की मारुति सुजूकी वैगनआर में बैठकर कौशांबी मेट्रो स्टेशन के लिए रवाना होते हैं। वह तेजी से सीढिय़ों पर चढ़ते हैं, सुरक्षा जांच से गुजरते हैं, मेट्रो कार्ड स्वाइप करके अंदर प्रवेश करते हैं, एलीवेटर पर चढ़ते हैं और मेट्रो के आखिरी डिब्बे में सवार होते हैं। यहीं से उनका प्रचार शुरू हो जाता है।

ज्यादातर लोग उन्हें तुरंत ही पहचान लेते हैं, कुछ लोग मुस्कराते हैं और अन्य की आंखें खुली की खुली रह जाती हैं। एक शख्स उनसे पूछता है, 'असली हैं क्या?Ó केजरीवाल हरेक को अपना 'विजिटिंग कार्डÓ देते हैं और चुनाव में पूरे जोश से उनकी पार्टी को वोट देने की अपील करते हैं। कुमार फुसफुसाते हैं कि मेट्रो में पर्चे बांटने की अनुमति नहीं है, लेकिन विजिटिंग कार्ड के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है। हर कार्ड एक फ्लैप की तरह खुलता है, जिसके पीछे नौ वादे लिखे हुए हैं और यह लगभग पर्चे जैसा ही हो गया है। जब कोई उनसे मोबाइल नंबर मांगता है तो केजरीवाल कहते हैं कि कार्ड पर लिखा है, जिसके साथ ईमेल पता, फेसबुक पेज और ट्विटर का ब्योरा भी मौजूद है।

कई यात्री उनके साथ फोटो भी खिंचाना चाहते हैं। वह लाचार से उनके कंधों पर हाथ रखकर और चेहरे पर मुस्कराहट लिए खड़े हो जाते हैं और हंसते हुए चुटकी भी लेते हैं, 'एक फोटो के सौ वोट।Ó कुछ उनकी पार्टी के कट्टर समर्थक भी हैं और नारे लगाने लगते हैं। अन्य असमंजस में हैं और कुछ संकोच के साथ उनसे कार्ड लेते हैं।

केजरीवाल एक कोच से दूसरे कोच में जाते हैं, तेजी से दर्शकों की ओर मुखातिब होते हैं और आसानी से अंग्रेजी को छोड़कर हिंदी में बोलने लगते हैं। वह एक कॉलेज के छात्र से कहते हैं, 'इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को वोट देना और कृपया अपने दोस्तों से भी ऐसा कहना।Ó केजरीवाल धोती-कुर्ता पहने एक बुजुर्ग से कहते हैं, 'नमस्ते, इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को वोट देना। घर में और मोहल्ले में सबको बताना।Ó चुनाव की घोषणा के साथ यह केजरीवाल का पहला प्रचार हो सकता है, लेकिन वह जानते हैं कि विभिन्न श्रोताओं के साथ किस तरह से अपने हाव-भाव और भाषा को बदलना है।

केजरीवाल प्रगति मैदान स्टेशन पर उतरते हैं और मेट्रो के दरवाजे बंद होने तक हाथ हिलाते रहते हैं। स्टेशन से निकलते समय वह एक सुरक्षाकर्मी से हाल-चाल पूछते हैं, उसके हाथ में अपना कार्ड देते हैं और उससे अपना वोट देने के लिए कहते हैं। स्टेशन के ठीक नीचे ऑटो-रिक्शा चालकों की भीड़ गर्म-जोशी से उनका स्वागत करती है। वह उनमें से एक पर सवार होते हैं और वहां से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित चिडिय़ाघर की ओर रवाना होते हैं, जहां उनकी नीले रंग की कार पहले से इंतजार कर रही है। स्पष्ट है कि मेट्रो का सफर उनके लिए जनसंपर्क कार्यक्रम था, न कि एक मध्यम वर्ग का सदस्य पैसे बचाने या एक व्यस्त राजनेता मेट्रो की सवारी करके समय बचाने की कोशिश कर रहा था। ऑटो-रिक्शा चालक उनसे पैसा लेने से इनकार करता है, लेकिन केजरीवाल अड़ जाते हैं। वह कहते हैं, 'आपको अपने बड़े भाई से बहस नहीं करनी चाहिए।Ó

वैगनआर के भीतर केजरीवाल इस बात से सहमति जताते हैं कि ऑटो चालक बेलगाम होते हैं और अक्सर सवारियों से दुव्र्यवहार करते हैं, लेकिन इसके लिए वह झुग्गी-बस्ती में उनके मुश्किल भरे रहन-सहन को जिम्मेदार ठहराते हैं। वह कहते हैं कि आम आदमी पार्टी को उनकी गंभीरता और ईमानदारी अपनी ओर खींचती है। वह एक उदाहरण देते हैं जब पार्टी नेता योगेंद्र यादव उनकी पार्टी को बकवास बताकर एक चालक को बुरा-भला कह रहे थे लेकिन चालक ने जवाब में कहा, 'भले ही केजरीवाल कुछ नहीं करें, लेकिन मैं गर्व के साथ कह सकूंगा कि मेरा मुख्यमंत्री ईमानदार है।Ó ईमानदारी ही केजरीवाल की सबसे बड़ी खूबी (यूएसपी) है और वह हमेशा ही इसी बात को जोर-शोर से उठाते हैं। दिल्ली के लगभग एक लाख ऑटो-रिक्शा चालक उनके सेल्समैन हैं।
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केजरीवाल का पहला पड़ाव सरकारी अधिकारियों की एक आवासीय कॉलोनी बापा नगर है। यहां एक कतार में बने बहुमंजिला मकान ही हैं। यह कॉलोनी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में आती है, जहां से केजरीवाल ने 4 दिसंबर को होने वाले चुनाव में कांग्रेसी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ खुद उतरने की घोषणा की है। सुबह 10.35 बजे लोगों का छोटा सा समूह उनका स्वागत करता है। एक प्रोजेक्टर पर आम आदमी पार्टी के एजेंडे से संबंधित फिल्म चलाई जा रही है। (पूरे शहर में इस तरह के 200 प्रोजेक्टर लगाए गए हैं और केजरीवाल दावा करते हैं कि जो भी इन वीडियो को देखेगा, उसकी धारणा 'बदलÓ जाएगी।) शायद केजरीवाल जानते हैं कि नए तरह के वादे कारगर नहीं होंगे, इसलिए उनके लोग वहां के वाशिंदों की समस्याएं जुटाने में व्यस्त हैं जिन्हें पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा। यह एक चतुर पहल है जिससे लोगों के सामने वे समस्याएं आएंगी, जिनका दीक्षित समाधान नहीं कर सकीं।

केजरीवाल कहते हैं कि वह यहां पर झूठे वादे करने के लिए नहीं आए हैं, जैसे अजय माकन (दिल्ली कांग्रेस के दिग्गज नेता) यहां पर लंबे भाषण देते हैं या उन्हें वोट के बदले पैसे की पेशकश करते हैं। वह सिर्फ यह भरोसा दिलाते हैं कि सत्ता में आने पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और यह उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके बाद केजरीवाल श्रोताओं को अपनी शिकायतें और मांग साझा करने के लिए बुलाते हैं। भीड़ में अधिकांश सरकारी अधिकारियों के नौकर शामिल हैं, जो पानी और बिजली बेहतर आपूर्ति चाहते हैं। एक बार उनकी शिकायतें दर्ज होने के बाद वे केजरीवाल का उत्साह बढ़ाने में जुट जाते हैं।

एक स्वयंसेवक ने उन्हें बताया कि पास के फ्लैटों में रहने वाले अधिकारी भी वहां आएंगे, लेकिन वे इस 'गुनाहÓ के लिए दिल्ली से बाहर स्थानांतरण से डरे हुए हैं। पूर्वाह्न 11.30 बजे उन्होंने एक अन्य सरकारी कॉलोनी नौरोजी नगर में कुछ बड़ी भीड़ को संबोधित किया, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के साथ मध्यम वर्ग के पुरुर्षों और महिलाओं को देखकर इस बार भाषण में कुछ बदलाव कर दिया गया। केजरीवाल कहते हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र में आने के बावजूद दीक्षित इस कॉलोनी का जायजा लेने कभी नहीं आईं, इसके बजाय वह अपनी बहन को यहां भेज देती हैं। तभी तेज बारिश होने लगती है और भीड़ सामुदायिक केंद्र में पहुंचने का सुझाव देती है।

केजरीवाल तेजी से दौड़े बिना आराम से टहलते हुए आड़ में जाते हैं। भीतर पहुंचकर वह गीले फर्श पर बैठ जाते हैं और लोग उन्हें अपनी समस्याएं गिनाने लगते हैं, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा, पानी और शिक्षा आदि शामिल थीं। एक अंडरपास की मांग के जवाब में वह कहते हैं कि वह झूठे वादे नहीं करेंगे और कहते हैं कि यह केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आता है। वह जल्द ही बैठक को समाप्त करते हैं और अपनी कार में घुस जाते हैं। जैसे ही वह जाने लगते हैं तो एक अधेड़ शख्स सवाल करता है कि क्या वह चुनाव के बाद भी नजर आएंगे, केजरीवाल आत्म-विश्वास के साथ जवाब देते हैं, 'हां।Ó

लेकिन वह जानते हैं कि यह शंका सभी मतदाताओं के मन में है और उन्हें इसे ही दूर करना है। जैसे ही उनकी कार दिल्ली के 250 से ज्यादा गांवों में से एक पिलानजी की ओर दौडऩे लगती है, वह अपने टिफिन में एक पनीर रोल निकालकर खाने लगते हैं और सड़क के किनारे स्थित एक खोखे से पानी की बोतल खरीदते हैं। कार के पास खड़े लोग उन्हें पहचान लेते हैं, वह उनकी तरफ हाथ हिलाते हैं और उनकी पार्टी को समर्थन देने की अपील करते हैं।

गांव पहुंचने पर केजरीवाल संकरी गलियों में टहलते हुए आगे बढ़ते हैं और लोगों की समस्याओं को जानने के लिए एक पेड़ के नीचे रुक जाते हैं। यहां की महिलाओं में ज्यादा उत्साह नहीं है और जानना चाहती हैं कि क्या वह हकीकत में अपने वादों को पूरा करेंगे। उनमें से एक कहती है कि यदि सभी नागरिक कार्य केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को करने हैं तो वह वोट लेकर सत्ता में आने के बाद क्या करेंगे? पिलानजी केजरीवाल की लहर से अछूता रहा है।

यहां उन्हें अलग तरह का नजरिया अपनाने की जरूरत होती है। ऐसे में यहां केजरीवाल अपनी ही कहानी पेश करते हैं कि एक आयकर आयुक्त के रूप में वह अकूत संपत्ति अर्जित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने उनके जैसे लोगों के लिए काम करना पसंद किया और यही वजह है कि उन्हें उन पर भरोसा करना चाहिए। भारत दुनिया के सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों में हो सकता है, लेकिन ईमानदारी की बातें यहां पसंद की जाती हैं। केजरीवाल भी इस बात को जानते हैं।

जैसे ही बैठक खत्म होती है, कुछ स्वयंसेवी उडिय़ा भाषा में नारे लिखी पार्टी की टोपी पहने हुए आते हैं। उनमें से एक कहता है कि वह सलाहकार कंपनी में काम करता है और इस अभियान में मदद करने के लिए उसने एक सप्ताह की छुट्टी ली है। जहां उसे यात्रा व्यय का भुगतान किया गया है, वहीं केजरीवाल ने उसे मालवीय नगर में आवास उपलब्ध कराया है। पार्टी के सभी कार्यकर्ता और स्वयंसेवी केजरीवाल को अरविंद या अरविंद भाई पुकारते हैं और अपनी आंखों में चमक लिए उन्हें अपने काम के बारे में बताते हैं। हर बैठक या रैली के बाद वह प्रतिक्रिया लेने के लिए वापस आते हैं।
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उसके बाद केजरीवाल दिल्ली के कॉलेजों के छात्र नेताओं के साथ संवाद के लिए केंद्रीय दिल्ली में स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब की ओर रवाना होते हैं। वह एक डाइट कोक के लिए रास्ते में रुकते हैं और हाल में शहर में हुई मोदी की बहुचर्चित रैली पर बात करते हैं। वह कहते हैं, 'जहां तक दिल्ली चुनावों की बात है, मोदी यहां अप्रासंगिक हैं। भारतीय जनता पार्टी फटे कपड़ों में है और मोदी सिर्फ एक बैसाखी हैं।Ó

वह उत्साह से अपने बच्चों के बारे में बात करते हैं। क्या उन्हें इतनी ज्यादा चर्चा मिलने पर बच्चों को कोई समस्या होती है, इस सवाल पर वह कहते हैं, 'मेरे बच्चे मुझ पर गर्व करते हैं। क्योंकि उनका पिता ईमानदार है, इसलिए उनके पास शर्मिंदा होने के लिए कुछ नहीं है।Ó कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में होने वाले आयोजन का नेतृत्व आम आदमी पार्टी के एक नेता कुमार विश्वास कर रहे थे और केजरीवाल उनके बाद मौजूद थे। वहां से जाने पहले केजरीवाल ने श्रोताओं से कहा, 'यदि त्रिशंकु विधानसभा आती है तो हम किसी भी दल को समर्थन नहीं देंगे और दोबारा चुनाव के लिए जाएंगे। हमें भरोसा है कि हम चुनाव जीतेंगे।Ó

अपराह्न लगभग 3 बजे वह मालवीय नगर में होने वाली तीन रैलियों के लिए रवाना होते हैं। यहां वह इस विधानसभा के लिए पार्टी के प्रत्याशी सोमनाथ भारती के साथ खुली मारुति सुजूकी जिप्सी में दौरे पर निकलते हैं। साथ में एक टोयोटा इनोवा भी जलती है, जिसमें बॉलीवुड के देशभक्ति के, शीला की नाकामियों और झाड़ू (आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न) की सफलता से जुड़े मिले-जुले गाने बज रहे होते हैं। हर रैली लगभग समान है, हालांकि भीड़ का आकार अलग-अलग है और भाषण पूरी तरह से दूसरे दलों द्वारा किए गए गलत कामों और भ्रष्टाचार मुक्त शहर बनाने के वादों से भरे हुए हैं। जहां भारती पूरे कार्यक्रम की अगुआई कर रहे हैं, वहीं केजरीवाल स्टेज पर मेहमान या मशहूर वक्ता के रूप में मौजूद हैं।

इन रैलियों में आम आदमी पार्टी की आय के स्रोतों से संबंधित ब्योरा भी जारी किया जाता है। वहां ऐसी कुछ डेस्क भी थीं, जहां तैनात स्वयंसेवी के पास हर प्रत्याशी द्वारा दस्तखत किया गया शपथ पत्र (जिसमें उल्लेख होता है कि चुने जाने के बाद वह कोई पुलिस सुरक्षा नहीं लेगा), सर्वे के लिए एक प्रश्नावली और दान की प्राप्ति रसीदें होती हैं। दान हर 10 मिनट या ज्यादा वक्त में मिलता है। दूसरों के लिए छोटे शहरों में घूमने वाले फकीरों की तरह स्वयंसेवी सफेद रंग का कपड़ा फैलाकर हर आधे घंटे में घूमते हैं और लोग उसमें सिक्कों से लेकर 100 रुपये के नोट तक डालते हैं।

केजरीवाल रात 9.30 बजे अभियान खत्म करते हैं। वह अपनी वैगनआर में बैठते हैं और इमेल या संदेशों के लिए अपने ब्लैकबेरी का जायजा लेते हैं और कुमार के साथ अपने सोमवार के कार्यक्रम पर बात करते हैं। कल एक नए दिन का आगाज होगा।

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