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ऐसा अधिकारी जिसने चारे की जड़ खंगाली
प्रवाल बसाक और ईशिता आयान दत्त /  October 03, 2013

अक्सर आपकी पहचान आपके नाम से ज्यादा उन चीजों से होती है जिनसे आप जुड़े होते हैं। उपेंद्रनाथ विश्वास जो उपेन विश्वास नाम से ज्यादा जाने जाते हैं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के ऐसे कर्तव्यपरायण अधिकारी थे जिन्होंने 950 करोड़ रुपये के उस चारा घोटाले का पर्दाफाश किया जिसने लालू प्रसाद को जेल तक पहुंचा दिया। रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरुवार को अपने फैसले में लालू प्रसाद को पांच साल की सजा  सुनाई।

विश्वास उस समय पहली बार सुर्खियों में आए जब 1996 में चारा घोटाले का राज खुला। उनके साथ उस वक्त बतौर कनिष्ठï अधिकारी काम करने वाले एक अधिकारी ने बताया कि कैसे बंगाल कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी विश्वास ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्व) के रूप में सतत जांच की जिसकी वजह से लालू प्रसाद को बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोडऩा पड़ा।

विशेष जांच टीम के एक सदस्य समीर रंजन मजूमदार कहते हैं, 'अगर उपेन विश्वास नहीं होते तो चारा घोटाले का राज कभी नहीं खुल पाता। वह दिल से ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठï हैं।Ó विश्वास की अगुआई में इस विशेष टीम का गठन घोटाले की बड़ी साजिश की जांच के लिए किया गया था।

शायद मजूमदार जानते होंगे कि कैसे विश्वास की जांच रिपोर्ट ने न केवल सीबीआई बल्कि राजनीतिक सत्ता प्रतिष्ठïान को भी नाराज कर दिया। चारा घोटाले के उजागर होने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा हो गई थी। बौद्घ धर्म में आस्था रखने वाले विश्वास की पसंद अक्सर लीक से हटकर रही है। उन्हें अपने जीवन में ऐसे विकल्पों को चुनने पर जोर दिया जो सामान्य नहीं थे। सुर्खियों में उनकी वापसी कई साल बाद हुई। वर्ष 2011 में उस समय जब ऐसी चर्चाएं चलीं कि वह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, वह फिर से सुर्खियों में रहने लगे। विश्वास का चुनाव लडऩे का फैसला एक तरह से सांकेतिक था। इससे तृणमूल की ईमानदार और साफ-सुथरी छवि और चमकी, पार्टी ने उनकी स्वच्छ छवि का इस्तेमाल अपने लिए किया।  वह उत्तर 24 परगना जिले की बागड़ा सीट से चुनाव जीते और फिलहाल ममता बनर्जी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के पद पर आसीन हैं। लेकिन मंत्री के रूप में न तो उनके बारे में बहुत सुना जाता है और न ही वह बहुत दिखाई ही देते हैं। माना जाता है कि वह खबरों की दुनिया से दूर रहकर चुपचाप अपना काम करने में भरोसा करते हैं।

पहली बार तब जब माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता और वाममोर्चा सरकार में पूर्व आवास मंत्री गौतम देव ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल किया और यह भी कहा कि सिर्फ उपेन विश्वास अकेले ऐसे नेता हैं जिन्होंने पैसा लेने से इनकार कर दिया और अपने चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल नहीं किया। इस मसले में तृणमूल कांग्रेस ने देव के आरोपों को लेकर अवमानना का मामला भी दायर किया। देव ने मीडिया के लोगों को विश्वास का नंबर भी देने की बात कही और कहा कि अगर वे चाहें तो विश्वास से इसकी पुष्टिï भी कर सकते हैं।

दूसरी बार विश्वास का नाम अखबारों में तब देखने को मिला जब उन्होंने मंत्रियों की रैंकिंग उनके काम के आधार पर करने का फैसला करने पर ममता बनर्जी की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा था, 'मैं मंत्रियों को रिपोर्ट कार्ड जारी करने के उनके फैसले का पूरा समर्थन करता हूं। उन्होंने राइटर्स बिल्डिंग में काम करने की परंपरा को फिर से बहाल कर दिया है।Ó उनका यह बयान वर्ष 2011 के विधानसभा चुनावों के कुछ दिनों बाद ही आया था। हालांकि तब से अब तक विश्वास ज्यादातर मामलों में शांत ही रहे हैं और वह सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए भी नजर नहीं आते हैं। बनर्जी के कई आयोजनों में जहां विद्वानों, टॉलीवुड और कभी-कभी शाहरुख खान जैसे बॉलीवुड कलाकारों का जमावड़ा भी होता है, विश्वास नजर नहीं आते हैं।

शाहरुख कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के सह-मालिक हैं और पश्चिम बंगाल के ब्रांड एंबेसडर भी। ऐसे आयोजनों से दूरी बनाए रखने में ही विश्वास भलाई समझते हैं।  अटकलों का बाजार गरम है। तृणमूल कांग्रेस के लोगों का कहना है कि विश्वास और पार्टी नेतृत्व के बीच संबंध मधुर नहीं रहे। पार्टी के एक आंतरिक सूत्र के मुताबिक, 'उन्हें कई बार आयोजनों के लिए आमंत्रित किया गया, लेकिन वह कभी ऐसे आयोजनों में हिस्सा नहीं लेते हैं, जब तक आयोजन उनके विभाग से संबंधित न हो।Ó

चर्चा तो यहां तक है कि बंगाल में तृणमूल नेताओं ने उनसे सलाह मांगी कि सारदा घोटाले की अगर सीबीआई जांच होती है तो उस स्थिति से निपटने का  सबसे बेहतर तरीका क्या हो सकता है। लेकिन बताया जाता है कि पिछड़ा कल्याण मंत्री विश्वास ने इस मामले में सलाह देने से भी इनकार कर दिया।

इसके साथ ही पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी चर्चा चलती रहती है कि उपेन विश्वास अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा भी नहीं करते हैं, लेकिन अधिकारी कुछ दूसरी ही कहानी बयां करते हैं। इनमें से एक का कहना है, 'मौजूदा दौर में वह सबसे पेशेवर मंत्रियों में से हैं और उनके विभाग ने कई बेहतरीन काम किए हैं।Ó तृणमूल कांग्रेस की वेबसाइट के मुताबिक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की उपलब्धियां इस प्रकार हैं- राज्य सरकार ने 7,06071 जाति प्रमाण पत्र जारी किए हैं और इसके अलावा राज्य के 35 से अधिक उपमंडलों में आवेदनों की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। शायद इस मामले से वे लोग कुछ सोचने को बाध्य होंगे जो स्वच्छता, ईमानदारी और नैतिकता के पहरेदार हैं।

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