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चुनावी साल में वेतन आयोग की सौगात
सरकार ने केंद्रीय कर्मियों के लिए किया सातवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 09 25, 2013

अब इसे चुनावी रणनीति कहें या फिर कर्मियों के हितों की बात- केंद्र सरकार ने आज 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 30 लाख पेंशनभोगियों के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन करने का निर्णय किया है। विश्लेषकों का आकलन है कि सरकार के इस कदम से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ सकता है लेकिन वित्त मंत्रालय का कहना है कि अभी नियम-शर्तें तय नहीं हुईं है, ऐसे में पहले से अनुमान लगाना सही नहीं होगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार अगले कदम के तौर पर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु मौजूदा 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर सकती है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज कहा, 'प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है।Ó

दिलचस्प है कि पिछली बार से इतर इस बार वेतन आयोग के गठन की घोषणा इसकी सिफारिशों के लागू होने से तीन साल पहले ही कर दी गई। पिछली बार जुलाई 2006 में मंत्रिमंडल ने छठे वेतन अयोग के गठन की मंजूरी दी थी, जिसकी सिफारिशें जनवरी 2006 से लागू हुईं थीं। लेकिन कांग्रेस इस मामले में यह कह सकती है कि पिछली बार राष्टï्रीय जनतांत्रिक गठनबंधन सरकार द्वारा शुरुआत में वेतन आयोग के गठन की मंजूरी नहीं देने के कारण देरी हुई थी। कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रमुख अजय माकन ने ट्वीट में कहा, 'राजग सरकार ने 2003 में छठे वेतन आयोग के गठन से इनकार कर दिया था।

उसके बाद कांंग्रेस ने 2006 में इसका गठन किया था और अब 2013 में सातवें वेतन आयोग का गठन किया जा रहा है।Ó तत्कालीन वित्त मंत्री ने कहा था कि छठे वेतन आयोग के गठन की जरूरत नहीं थी क्योंकि 50 फीसदी महंगाई भत्ते को पहले ही मूल वेतन में जोड़ा जा चुका था। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से सरकार पर 1 लाख करोड़ रुपये के बोझ पडऩे के बारे में पूछने पर वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अभी नियम-कायदे तय भी नहीं हुए हैं, ऐसे में सरकारी खजाने पर पडऩे वाले बोझ का कैसे आकलन किया जा सकता है।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण चुनाव आचार संहिता लागू होने पर आयोग का गठन किया जा सकता है? पूछने पर अधिकारी ने बताया कि आयोग के गठन की घोषणा की जा चुकी है, ऐसे में इसके गठन को लेकर चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं होगा। चुनावी फायदे के लिए वेतन आयोग के गठन की घोषणा पर वित्त मंत्रालय का कहना है कि इससे 80 लाख सरकारी कर्मचारियों/पेेंशनभोगियों को फायदा होगा लेकिन 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 72.5 ककरोड़ मतदाता हैं। इसे चुनावी रणनीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

तीन साल पहले वेतन आयोग के गठन के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि सिफारिशों को पिछली तिथि से लागू करने की जरूरत न हो और अचानक एक ही वर्ष में सरकारी खजाने पर बोझ न बढ़े। वित्त मंत्रालय ने कहा कि वेतन आयोग औसतन अपनी सिफारिशें देने में 2 साल का वक्त लेता है। ऐसे में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2016 से लागू हो सकती हैं। छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से 2008-09 में सरकारी खजाने पर 22,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था।

'घोषणा के पीछे चुनावी गणित'
योजना आयोग के सदस्य अरुण मायरा ने कहा कि सातवें वेतन आयोग का गठन चुनाव की ताकत की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी कर्मचारी वेतन अयोग के पक्ष में होंगे, जबकि अन्य ऐसा नहीं चाहते होंगे। वेतन आयोग का गठन इस समय किए जाने के बारे में मायरा ने कहा कि यह रोचक स्थिति है, क्योंकि यह चुनाव का समय है।

वेतन       चेयरमैन     गठन      लागू      खजाने पर
आयोग                                                             कितना बोझ*
पहला      श्रीनिवास वरदाचार्य     मई 1946      जन. 1946      --
दूसरा      जगन्नाथ दास      अग. 1957     जुल. 1959      39.62
तीसरा     रघुवीर दयाल      अप्रै. 1970      जन. 1973      144.6
चौथा      पी एन सिंघल      जून 1983      जन. 1986     1282
पांचवां      एस.  रत्नावेल पांड्यिन      अप्रै. 1994     जन. 1996      17,000
छठा      बीएन श्रीकृृष्णा      जुलाई 2006      जन. 2006      22,000
    (*वित्तीय बोझ करोड़ रुपये में)

Keyword: 7Th pay Committion, केंद्रीय कर्मचारियों, वित्त मंत्रालय,
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