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बाघों के बसेरे में जाएगा भाप का इंजन
विजय रॉय /  September 23, 2013

करीब बीस साल से खामोश पड़ा अंगद अब एक बार  फिर दहाड़ेगा और सैलानियों की खातिर नवंबर से वह पटरी पर  रफ्तार भी पकड़ेगा। अंगद भारत का अकेला बचा हुआ एक्स क्लास ब्रॉड गेज का भाप इंजन है जिसका निर्माण 1930 में हुआ था।

इस पुराने इंजन में नए पुर्जे लगाकर उसे फिर से दुरुस्त किया गया है। आगामी नवंबर माह में यह पर्यटकों को दिल्ली छावनी से राजस्थान के अलवर में सरिस्का टाइगर रिजर्व की सैर कराना शुरू कर देगा।

रेलवे अधिकारियों ने इस इंजन का नाम पौराणिक कथाओं में वर्णित एक पात्र अंगद के नाम पर रखा है, जिसके पैर को जमीन पर पडऩे के बाद कोई भी व्यक्ति नहीं उठा सकता था। 198 टन वजनी और करीब पौने पंद्रह फु ट लंबा यह इंजन इंगलैंड की वुल्कान फाउंड्री में तैयार किया गया था। अपने समय की इंजीनियरिंग का यह नायाब नमूना था। ऐसे 93 रेल इंजन बनाए गए थे, जिनमें से 35 बंटवारे के बाद पाकिस्तान और 58 भारत पहुंच गए।

मुख्य वर्कशॉप प्रबंधक समरेंद्र कुमार कहते हैं, 'इस इंजन की मरम्मत उत्तरी रेलवे के अमृतसर स्थित मैकेनिकल वर्कशॉप में की गई और यह नवंबर तक चलना शुरू हो सकता है।Ó इंजन का 60 वर्ग फुट का बड़ा ग्रैट एरिया है और यह 30 मील प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अंगद विलियम बर्डमोर द्वारा बनाया गया था और यह रेवाड़ी में भाप के इंजनों के शेड में था। यह शेड हरियाणा में दिल्ली-जयपुर रेलवे लाइन पर स्थित है, जहां अन्य कई प्रकार के भाप के इंजन खड़े हैं। यह रेल इंजन मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड का था और बोर्ड इसे कोरबा में अपने ताप विद्युत संयंत्र के लिए इस्तेमाल कर रहा था। इस्तेमाल बंद होने के बाद इसे रेलवे को भेंट कर दिया गया था और यह पिछले दो दशकों से बंद था।

कुमार कहते हैं, 'हमारे पास भाप के इंजन का असली नक्शा नहीं हैं, लेकिन हम फिर भी थोड़े समय में ही इंजन को चालू करने में सफल रहे हैं।Ó

इसे चालू करने की चुनौतियों के बारे में बातचीत करते हुए वर्कशॉप के चीफ मैकेनिकल इंजीनियर जी सी सिंह कहते हैं, 'यह इंजन मरम्मत के लिए हमारी वर्कशॉप में अप्रैल में आया था, ताकि यह विशेष पर्यटक भाप ट्रेनों को दिल्ली और अलवर के बीच खींच सके। शुरुआती जांच में पाया गया कि इसके एक्सल खराब हो चुके थे। टेंडर को बुरी तरह जंग लग गई थी और सभी बुशों और मोशन कंपोनेंट, ब्रेक गियर, अंडर गियर और लेमिनेटेड स्प्रिंग्स की मरम्मत की जरूरत थी।Ó

इंजन को चालू करने के लिए बड़े पैमाने पर मरम्मत की गई। अगस्त में ईंधन डाला गया और अमृतसर वर्कशॉप में इसका सफल परीक्षण किया गया, जहां इसे कई बार आगे-पीछे घुमाया गया।

सिंह कहते हैं, 'अंगद को चालू करने में रेवाड़ी और अमृतसर वर्कशॉप के अधिकारियों, निरीक्षकों और अनुभवी स्टाफ की समर्पित टीम की अहम भूमिका रही।Ó पिछले कुछ वर्षों के दौरान पुराने भाप के इंजनों की मरम्मत में उत्तरी रेलवे में अमृतसर वर्कशॉप ने काफी ख्याति पाई है।

 इसने इस विशालकाय इंजन को 'नया जीवनÓ देने में बहुत कम समय लिया। पिछले कुछ वर्षों में वर्कशॉप ने भाप के इंजनों से संबंधित कार्यों के लिए कौशल अर्जित किया है। हालांकि रेवाड़ी वर्कशॉप का भी अमृतसर में भाप के इंजनों को फिर से चालू करने में आंशिक योगदान रहा है।

बड़े भाप के इंजनों की शृंखला में अंगद तीसरा इंजन है, जिसे फिर चालू किया गया है। इससे पहले अकबर और शेर-ए पंजाब को चालू किया जा चुका है।

Keyword: Tiger, Tiger Reserve, टाइगर रिजर्व,
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