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भारतीय बाजार में रफ्तार पकड़ता ट्रैक्टर कारोबार
खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  September 10, 2013

भारत के ट्रैक्टर बाजार में ऐतिहासिक रूप से मझोले आकार के ट्रैक्टरों की बहुलता रही है।  ऐसे ट्रैक्टरों की क्षमता 30-40 हॉर्सपावर (एचपी) होती है। इस तरह के ट्रैक्टर मझोले और बड़े किसानों के लिए ठीक रहते हैं जिन्हें मजदूरी बचाने और खासतौर पर समय बचाने के लिए ट्रैक्टरों और कृषि से संबंधित अन्य मशीनों की जरूरत होती है। मुश्किल होती खेती के लिए समय बहुत ही आवश्यक चीज है।

लेकिन अब भारत के ट्रैक्टर बाजार में विविधता काफी तेजी से बढ़ रही है। भारत के बाजारों में बड़े (50 एचपी से अधिक) और छोटे (20 एचपी से कम) ट्रैक्टरों की मांग में जबरदस्त तेजी आई है। ऋण की आसान उपलब्धता, मजदूरों की कम होती संख्या, साथ ही कृषि उत्पादन लागत में कमी और कुशलता बढ़ाने की जरूरत की वजह से मांग में तेजी का दौर देखने को मिल रहा है। यहां तक कि दो हेक्टेयर से भी कम जमीन पर खेती करने वाले छोटे जमीन मालिक भी भी खेत के काम के लिए या तो ट्रैक्टर किराये पर लेते हैं या खरीदते हैं। किसानों की कुल संख्या में 80 फीसदी किसान इसी श्रेणी के हैं।

उम्मीद है कि भारतीय ट्रैक्टर उद्योग मांग में आने वाले इस बदलाव के मुताबिक खुद को ढाल लेगा। कुछ बड़े ट्रैक्टर निर्माताओं ने कम और अधिक एचपी की मशीनों का उत्पादन या तो शुरू कर दिया है या फिर वे इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर देश के दिग्गज टै्रक्टर निर्माताओं में से एक महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने बाजार में मात्र 15 एचपी क्षमता वाला सबसे छोटा ट्रैक्टर पेश कर दिया।

इसका नाम युवराज 215 रखा गया है। इसके अलावा कंपनी 85 एचपी क्षमता वाले भारी भरकम ट्रैक्टर को भी बाजार में पेश कर चुकी है। इस बड़े टै्रक्टर को बाजार में अर्जुन इंटरनैशनल नाम से पेश किया गया है। बाजार में इन दोनों मॉडलों को काफी पसंद किया गया। दरअसल युवराज 215 संगठित क्षेत्र में इस श्रेणी का पहला ट्रैक्टर है। इससे मिलते जुलते और इससे कम एचपी क्षमता वाले अन्य टै्रक्टर भी बाजार में मौजूद हैं लेकिन ये सभी असंगठित क्षेत्र द्वारा तैयार किए गए हैं।

किसानों की सुविधा के मुताबिक 15 एचपी के छोटे ट्रैक्टर देखरेख और चलाने के लिहाज से बेहतर होते हैं। इनकी छोटी बनावट और ईंधन कुशलता किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। हल्के वजन के कारण मिट्टïी भी नहीं उखड़ती है, जिसके कारण पैदावार पर बुरा असर पडऩे का डर होता है। इसलिए ऐसे ट्रैक्टर न सिर्फ जमीन तैयार करने, बुआई, निराई और पौधे लग जाने के बाद की गतिविधियों जैसे खेती के पारंपरिक काम करने में मददगार साबित होते हैं बल्कि अनाज निकालने, पानी भरने और बिजली उत्पादन जैसे दूसरी चीजों में भी इसकी मदद ली जा सकती है।

यह ट्रैक्टर करीब 1.5 टन का वजन भी आसानी से ढो सकता है, हालांकि कई किसान तो इससे भी अधिक वजन ढोने के लिए ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करते हैं। सड़क पर इनकी रफ्तार औसतन 25 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है और 18 किलोमीटर चलने के लिए इन्हें 1 लीटर डीजल की जरूरत होती है। खेतों में काम करते वक्त टै्रक्टर 1 घंटे में 1 लीटर डीजल का उपभोग करते हैं। अलग-अलग राज्य के स्थानीय करों के मुताबिक इसकी कीमत करीब 2.35 लाख रुपये है।

कर्नाटक के कई किसान युवराज 215 को फसलों के उत्पादन और खेती के लिए जरूरी चीजों को विषम परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में पहुंचाने के लिहाज से काफी उपयुक्त मानते हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में बैलगाडिय़ां भी काम नहीं करती हैं। कपास, गन्ने, सोयाबीन, चने और अंगूर की खेती के लिए इन ट्रैक्टरों को उपयुक्त माना जा रहा है, इस वजह से इन ट्रैक्टरों को महाराष्टï्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार और उत्तर प्रदेश में काफी लोकप्रियता मिल रही है।

खास बात यह है कि युवराज उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों और कुछ अन्य राज्यों में यातायात के प्रचलित वाहन 'जुगाड़Ó का उचित विकल्प साबित हो रहा है। जुगाड़ खुले इंजन के साथ दूसरे पुर्जों को स्थानीय स्तर पर जोड़कर बनाया गया एक प्रकार का वाहन है। कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने इसे असुरक्षित करार देते हुए इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। कई जुगाड़ परिचालकों ने युवराज का रुख करना शुरू कर दिया है जो संगठित क्षेत्र की ओर से पेश किया गया एक भरोसेमंद वाहन है।

दूसरी ओर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का 85 एचपी मॉडल अर्जुन इंटरनैशनल अमीर और बड़ी जोत वाले किसानों के लिए उपयोगी है। यह ट्रैक्टर उन लोगों के लिए काम का है जो खेतों में काम के लिए बड़ी मशीनें रखना पसंद करते हैं, साथ ही उसका इस्तेमाल प्रतिष्ठïा के प्रतीक के तौर पर करते हैं।  खास बात यह है कि इस ट्रैक्टर में ड्राइवर के लिए अलग केबिन की व्यवस्था की गई है। साथ ही डीलक्स सीटों, वातानुकूलन, म्यूजिक सिस्टम, ऐश ट्रे, कैन होल्डर और कोट हैंगर जैसी बेहतरीन सुविधाएं हैं। पंजाब में इसकी कीमत करीब 17.3 लाख रुपये है।

खेती के कामों में सफाई और स्पष्टïता की मांग बढ़ी है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां बहुफसलीय खेती का चलन है वहां अलग-अलग प्रकार के ट्रैक्टरों की मांग में इजाफा हुआ है। जिसके चलते ट्रैक्टर निर्माताओं के लिए अवसर बढ़े हैं। जरूरत है कि वे अपने उत्पादों में विविधता को प्रोत्साहन दें। देश के ट्रैक्टर उद्योग के विकास के लिए भी यह नीति काम की है।

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