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डॉलर बचाने की योजना पर लगेगा ईरान से झटका!
ज्योति मुकुल और शाइन जैकब /  September 08, 2013

कच्चे तेल की खरीद में डॉलर खर्च घटाकर अर्थव्यवस्था को बल देने संबंधी पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली की योजना को संभवत: ईरान से झटका लग सकता है। एक वरिष्ठï अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि ईरान इस मुद्दे पर सख्त रुख अख्तियार कर रहा है। ईरान को भारत से होने वाले निर्यात के बदले भारत फिलहाल ईरान से 44 फीसदी कच्चे तेल की खरीद करता है।

इसी साल मार्च के बाद रुपये में अब तक करीब 18 फीसदी का अवमूल्यन हो चुका है। इसे देखते हुए सरकार डॉलर खर्च में किफायत बरतना चाहती है ताकि बढ़ते चालू खाते के घाटे पर लगाम लगाई जा सके। इसी क्रम में सरकार ईरान से कच्चे तेल की खरीद का भुगतान डॉलर में न करने की योजना बनाई है। यदि ईरान सरकार भारत की इस योजना को मान लेती है तो भारत के डॉलर खर्च में करीब 8.47 अरब डॉलर की बचत होगी।

अधिकारी ने कहा कि ईरान भारत से चावल जैसी सस्ती जिंसों का आयात करता है। इसलिए ईरान से भारत के कुल आयात बिल का भुगतान निर्यात के जरिये नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा पिछले महीने हसन रूहानी के ईरान के राष्टï्रपति बनने के बाद भारत के मंसूबे पर पानी फिर गया है।

ईरान पर अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के दबाव में भारत को भुगतान के लिए तुर्की के हॉक बैंक और अपने यूको बैंक का सहारा लेना पड़ा था। प्रतिबंध के कारण यूरापीय संघ के बैंकों को ईरान के बैंकों द्वारा डॉलर में किए गए खरीद को प्रॉसेस करने की अनुमति नहीं थी। पिछले साल के बाद भारत पर इन विकल्पों को अपनाने का दबाव बनाया गया लेकिन घरेलू मुद्रा में गिरावट को देखते हुए भारत के लिए यह फायदेमंद साबित हो सकता है। फिलहाल ईरान को सभी भुगतान यूको बैंक के जरिये किए जाते हैं।

अदले-बदले की खरीदारी के अलावा भारत ने ईरान से आयात में कमी भी की है। एक तेल कंपनी के वरिष्ठï कार्यकारी अधिकारी ने कहा, 'चालू वित्त वर्ष में पहली बार सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी मंगलूर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने अगस्त में ईरान से कच्चे तेल का आयात किया है। एस्सार ऑयल जैसी निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी ईरान से कच्चे तेल का अयात किया है।Ó

भारत को इस साल ईरान से होने वाले कच्चे तेल के आयात में करीब 1.1 करोड़ टन की कमी होने की उम्मीद है। औसतन 105 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत पर चालू वित्त वर्ष में ईरान से होने वाले आयात में करीब 8.47 अरब डॉलर की कमी हो सकती है। जबकि ईरान को भारत से इससे अधिक कीमत की खरीदारी करने की जरूरत होगी। ईरान यूको बैंक को पहले ही करीब 5 अरब डॉलर मूल्य का भुगतान रुपये में कर चुका है।

ईरान को होने वाले भारत के कुल निर्यात का आकार पिछले साल करबी 3.4 अरब डॉलर रहा था। भारत चावल, चाय और दवा जैसी वस्तुओं के निर्यात के अलावा अधिक वस्तुओं का विनिमय ईरान के साथ करने मेंं भी समर्थ नहीं है।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) के पूर्व निदेशक (वित्त) बी मुखर्जी ने कहा, 'व्यापार की प्रकृति को देखते हुए 44 फीसदी से अधिक का लक्ष्य को हासिल करना कठिन होगा।Ó भारतीय रिफाइनरियों में ईरान से आयातित कच्चे तेल की खपत वित्त वर्ष 2012-13 की एक तिमाही में घटकर 1.33 करोड़ टन रह गई जो वित्त वर्ष 2011-12 की उसी तिमाही में 1.81 करोड़ टन रही थी।

इससे भारत को जून 2013 से शुरू छमाही में राहत मिल सकती है। वर्ष 2011 के अंत में पारित कानून के तहत ईरान से कच्चे तेल खरीदने वाली किसी भी कंपनी के खिलाफ अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि इसमेंं कहा गया है कि ईरान से आयात में उल्लेखनीय कमी करने वाले देशों को इस प्रतिबंध से छूट दी जा सकती है, लेकिन उल्लेखनीय कमी को परिभाषित नहीं किया गया है।

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