बिजनेस स?टैंडर?ड - लागत व ज्ञान की कमी ने किया तकनीक से दूर
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लागत व ज्ञान की कमी ने किया तकनीक से दूर
गिरीश बाबू /  September 08, 2013

भारत के सूक्ष्म व छोटे उद्योगों (एमएसई) द्वारा नई तकनीक के इस्तेमाल की राह में दो प्रमुख बाधाएं हैं, जिनकी वजह से उन्हें प्रतिस्पर्धा और आगे बढऩे में मदद नहीं मिल पाती। पहली वजह लागत और दूसरी प्रमुख वजह नई तकनीक के इस्तेमाल से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी का अभाव है। 

हाल ही में देश के 12 प्रमुख शहरों के 748 एमएसई में किए गए सर्वे से यह जानकारी मिली है। इंटुइट इंक ने एमएसएमई मंत्रालय, नैशनल इंस्टीट्यूट आफ इंटरप्रेन्योरशिप ऐंड स्माल बिजनेस डेवलपमेंट और नैशनल स्माल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के साथ मिलकर यह सर्वे कराया। इसका विषय था- अंडरस्टैंडिंग ऐंड ओवरकमिंग बैरियर्स टु टेक्नोलॉजी एडॉप्शन अमांग इंडियाज माइक्रो, स्माल ऐंड मीडियम इंटरप्राइजेज : बिल्डिंग ए रोडमैप टु ब्रिज द डिजिटल डिवाइड।

इस रिपोर्ट में नई तकनीक के इस्तेमाल न कर पाने में तीन और बाधाओं का जिक्र है- कुशल श्रमिकों का अभाव, सुरक्षा और निजता संबंधी चिंता और खराब बुनियादी ढांचा। इसमें कहा गया है कि सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल बुनियादी जरूरत है और यह लोकप्रिय उत्पादों और स्थापित ब्रांडों पर निर्भर है। इंडरनेट और मोबाइल सॉल्यूशंस का इस्तेमाल व्यक्गित कामों के लिए होता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसका कारोबार में इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसका इस्तेमाल कुछ खास कारोबारी जरूरतों को पूरा करने तक ही सीमित है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एमएसई अभी भी इस बात से आश्वस्त नहीं है कि तकनीक अपनाने पर किए गए निवेश से मुनाफा होगा। मूल्यवर्धन के बारे में प्रदर्शन करना कठिन है और इसका इस्तेमाल लागत के फायदे के विश्लेषण और परंपरागत कारोबार व आईटी आधारित तकनीक अपनाने के बारे के बाद कारोबार की वृद्धि दर की सामान्य तुलना करके किया जा सकता है।

अध्ययन में कहा गया है कि उद्यमियों ने तमाम सरकारी और अन्य हिस्सेदारों की योजनाओं का लाभ उठाया है, लेकिन अभी भी जागरूकता का बहुत ज्यादा अभाव है, जिसके चलते छोटे कारोबारी इसका फायदा नहीं उठा पाते। किसी कार्यक्रम विशेष की मान्यता न्यूनतम 1 से 4 प्रतिशत और अधिकतम 32 प्रतिशत है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि सभी हिस्सेदारों- जिसमें सरकार, प्रशिक्षण संस्थान और निजी क्षेत्र शामिल हैं, को साथ मिलकर इसका आकलन करना चाहिए कि उपलब्ध संसाधन अंतिम उपभोक्ता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं।

जागरूकता के मोर्चे पर न तो सरकारी मानक और न ही तकनीकी के इस्तेमाल के बारे में उद्यमियों को जानकारी है। 12वीं पंचवर्षीय योजा के कार्यसमूह ने तकनीकी लाभ और सहायता योजना शुरू करने का प्रस्ताव किया है, जिससे एमएसएमई के  विकास में मदद की जा सके जिससे वे तकनीक का इस्तेमाल कर सकें। सरकार ने तकनीकी उन्ननय के लिए क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (सीएलसीएसएस) और राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्रम के प्रासंगिक तकनीकी पहलुओं के साथ नई तकनीक के लाभ व विकास योजनाओं के विलय की भी सिफारिश की है।  12वीं पंचवर्षीय योजना में तकनीकी प्लेटफार्म पर विभिन्न योजनाओं के लिए एमएसएमई पर बने कार्यसमूह ने 9,500 करोड़ रुपये के बजट की सिफारिश की है।

अध्ययन में क्लाउड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का हवाला देते हुए कहा है कि इसकी क्षमताएं बहुत ज्यादा हैं, लेकिन उपभोक्ता इसके फायदे के बारे मेंं आस्वस्त नहीं हैं। इसकी वजह यह हो सकती है कि भारत का एमएसई क्षेत्र अभी बेहतर तरीके से पारिभाषित नहीं है या जो तकनीक मुहैया करा रहे हैं, वे इसका समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। इसमें कहा गया है कि जबतक सुरक्षा और विश्वसनीयता के बारे में ग्राहक आश्वस्त नहीं होते, तब तक इसके इस्तेमाल को लेकर हिचकिचाहट बनी रहेगी।

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