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वाहन कलपुर्जा उद्योग में घटता निवेश!
शर्मिष्ठा मुखर्जी / नई दिल्ली September 05, 2013

घरेलू उद्योग में वाहनों के कलपुर्जों की घटती मांग के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के दौरान वाहन कलपुर्जा क्षेत्र में निवेश 1 अरब डॉलर से भी कम रहने के आसार हैं जो पिछले 5 साल का न्यूनतम स्तर है।

वाहनों के कलपुर्जा बनाने वाली कंपनियों के संगठन एक्मा के अध्यक्ष हरीश लक्ष्मण ने कहा, 'छह महीने पहले हम जितना पूंजीगत निवेश देख रहे थे उसके मुकाबले फिलहाल निवेश में 40 से 45 फीसदी की कमी दर्ज की जा रही है। पिछले साल वाहन कलपुर्जा उद्योग में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ था लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान उसमें उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा सकती है।Ó उद्योग संगठन एक्मा के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के दौरान इस क्षेत्र में ताजा निवेश 2008-09 के बाद सबसे कम होगा।

भारत फोर्ज ने कहा है कि वह भविष्य की अपनी निवेश योजनाओं पर दोबारा विचार कर रही है क्योंकि उसकी मौजूदा उत्पादन क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। भारत फोर्ज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बाबा कल्याणी ने कहा, 'हम अपनी भविष्य की निवेश योजनाओं पर फिर से विचार कर रहे हैं क्योंकि जब आप पहले के निवेश का पूर्ण इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं तो आगे और निवेश का कोई मतलब नहीं रह जाता है।Ó उन्होंने बताया कि वाहन उपकरण विनिर्माताओं की समस्याएं मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के मुकाबले कहीं बड़ी हैं। उन्होंने कहा, 'ओईएम मांग को देखते हुए निवेश करते हैं जबकि उपकरण विनिर्माताओं को मांग आने से पहले निवेश करना पड़ता है और इसलिए हमने कई साल पहले निवेश किया था। हमारी समस्या कहीं अधिक बड़ी है क्योंकि हमारी उत्पादन क्षमता का सही से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।Ó

राणे ग्रुप ने बाजार में सुस्ती को देखते हुए अपनी 550 करोड़ रुपये की निवेश योजनाओंं में से करीब 50 फीसदी को वापस ले लिया है। लक्ष्मण जो राणे टीआरडब्ल्यू स्टीयरिंग सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक भी हैं ने कहा, 'समूह ने अगले तीन वर्षों के दौरान 550 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई थी। लेकिन मंदी को देखते हुए अब करीब 50 फीसदी निवेश योजनाओं को वापस ले लिया गया है।Ó

उधर, सोना कोयो स्टीयरिंग सिस्टम्स भी मासिक आधार पर अपनी पूंजीगत निवेश योजनाओं की समीक्षा कर रही है। कंपनी के वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय कपूर ने कहा, 'हम इस समय करीब 75 फीसदी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम अपनी निवेश योजनाओं में कटौती नहीं कर रहे हैं, बल्कि मासिक आधार पर उनकी समीक्षा कर रहे हैं।Ó कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 80 से 100 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। देसी बाजार में वृद्धि एकल अंक में रहने की आशंका के बीच कंपनी की नजर निर्यात के जरिये रुपये के अवमूल्यन से लाभ उठाने पर है।

वैरॉक इंजीनियरिंग के प्रबंध निदेशक तरंग जैन ने कहा कि रुपये के अवमूल्यन को देखते हुए उनकी कंपनी निर्यात को मौजूदा 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 से 33 फीसदी करना चाहती है। इसी प्रकार आनंद ऑटोमोटिव ने भी 2016 तक निर्यात से प्राप्त राजस्व को लगभग दोगुना बढ़ाकर 800 रुपये करने की योजना बनाई है। आनंद समूह अगले 5 वर्षों के दौरान नए उत्पादों के विकास और क्षमता विस्तार पर 1,200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

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