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परियोजना के प्रभावितों ने मांगी ज्यादा जमीन
संजय जोग / मुंबई September 05, 2013

नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना से प्रभावित लोग भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता, पुनरुद्धार एवं पुनर्वास का अधिकार विधेयक, 2012 के प्रावधानों के अनुसार पुनरुद्धार पैकेज लेने के खिलाफ हैं। यह विधेयक बुधवार रात राज्यसभा में पारित किया गया है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार प्रभावितों को 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का नकद मुआवजा मिलेगा, लेकिन प्रभावित नकदी में मुआवजा लेने को तैयार नहीं हैं। वे नेट बेसिस पर विकसित जमीन आवंटित करने की मांग पर अड़े हैं।

परियोजना से प्रभावित लोगों की शुक्रवार को सिटी ऐंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सिडको) के प्रबंधन के साथ एक अहम बैठक होगी। सिडको हवाई अड्डा परियोजना की नोडल एजेंसी है। यह बैठक मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की इस घोषणा के बाद हो रही है कि सरकार जमीन के मुआवजे के रूप में जमीन देने के पक्ष में है न कि नकदी के बदले नकदी। चव्हाण ने इस बात को स्वीकार किया कि सिडको और परियोजना से प्रभावित लोगों के बीच 291 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के बदले 22.5 फीसदी विकसित जमीन आवंटित करने को लेकर सहमति नहीं बनी है।

चव्हाण ने यह भी कहा कि अगर जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका तो हवाई अड्डा परियोजना परवान नहीं चढ़ सकेगी।  सिडको के चेयरमैन प्रमोद हिंदुराव ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'सहमति बनाने को लेकर पूरी कोशिश की जा रही है। सिडको के वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय भाटिया और अन्य अधिकारियों की परियोजना प्रभावित लोगों के साथ शुक्रवार को बातचीत होगी। हमें इससे काफी उम्मीदें हैं।Ó हवाई अड्डा परियोजना से प्रभावित 10 गांवों के लोगों के वार्ताकार आरसी घारट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता, पुनरुद्धार और पुनर्वास का अधिकार विधेयक, 2012 से परियोजना प्रभावित लोगों को फायदा नहीं होगा।

उन्होंने कहा, 'सिडको ने वर्तमान रेडी रेकनर दरों के हिसाब से जमीन की कीमत 21 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर आकलित की है। भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता, पुनरुद्धार और पुनर्वास का अधिकार विधेयक, 2012 के हिसाब से यह मुआवजा करीब चार गुना बढ़कर 84 लाख प्रति हेक्टेयर हो जाएगा। अगर मुआवजा एकड़ के हिसाब से दिया जाएगा तो यह 40 लाख रुपये प्रति एकड़ होगा। यह परियोजना से प्रभावित लोगों को स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इससे उन्हें नुकसान होगा। इसलिए परियोजना से प्रभावित लोग 35 फीसदी विकसित भूमि के आवंटन की मांग कर रहे हैं और वह भी नेट बेसिस पर। ये लोग 22.5 फीसदी विकसित भूमि के आवंटन के प्रस्ताव के खिलाफ हैं।Ó

घारट ने कहा कि सरकार सकल विकसित भूमि नहीं दे, बल्कि यह नेट होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'सरकार के 22.5 फीसदी विकसित भूमि के फॉर्मूले के मुताबिक परियोजना से प्रभावित लोगों को वास्तविक भूमि 15.75 फीसदी मिलगी, जो हमें मंजूर नहीं है। इस तरह विकसित भूमि नेट बेसिस पर दी जानी चाहिए न कि ग्रोस बेसिस पर।Ó

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