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आईटी कंपनियों के शेयरों में फिर दिख रहा उफान
कृष्ण कांत / मुंबई September 02, 2013

पिछले शुक्रवार को ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया है कि 100 अरब डॉलर बाजार पूंजीकरण हासिल करने वाली भारत की पहली कंपनी बनने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सही राह पर है। हालांकि इससे पहले कि यह विश्लेषकों के लिए विचार-विमर्श का मसला बने, बाजार ने सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी देसी निर्यातक कंपनी को पहचान लिया है।

टीसीएस की अगुआई में एक्सचेंजों पर आईटी कंपनियों के शेयरों की तेजी से रेटिंग होने लगी है और यह क्षेत्र बाजार में अग्रणी बनकर लौटा है, जैसा कि यह साल 2004 तक हुआ करता था। आईटी के अग्रणी निर्यातक अब बाजार की अगुआई कर रहे हैं, बीएसई-500 कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में इसकी हिस्सेदारी 18 फीसदी है। इस प्रक्रिया में इन्होंने बैंकों व वित्तीय सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों (16.3 फीसदी) की जगह ले ली है, जो पिछले पांच साल से अग्रणी स्थिति बनाए हुए थे। टीसीएस की हिस्सेदारी अब आईटी क्षेत्र की बाजार कीमत में करीब आधी है और बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण का करीब 7 फीसदी, जो इसे फिलहाल एक्सचेंजों पर सबसे ज्यादा प्रभावशाली कंपनी बनाती है।

अप्रैल के आखिर में (जब डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट की शुरुआत हुई) बीएसई-500 कंपनियों में आईटी क्षेत्र की हिस्सेदारी महज 12.2 फीसदी थी, वहीं बैंकों व वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी 20 फीसदी से ज्यादा थी। यह विश्लेषण 300 कंपनियों के आंकड़ों पर आधारित है, जिसके बाजार पूंजीकरण का आंकड़ा अगस्त 2004 से उपलब्ध है, जब टीसीएस एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हुई थी।

साल 2004 तक आईटी कंपनियों की बीएसई-500 में हिस्सेदारी 15.3 फीसदी थी। तब से इस क्षेत्र में लगातार गिरावट देखी गई क्योंकि तेजी का दौर दूसरे क्षेत्रों मसलन बिजली, पूंजीगत सामान, निर्माण, रियल एस्टेट, बैंक व वित्तीय संस्थान व बुनियादी ढांचा क्षेत्र की तरफ चला गया। जनवरी 2008 में जब बाजार सर्वोच्च स्तर पर था, तब बीएसई-500 में शामिल कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में इसकी हिस्सेदारी महज 7 फीसदी थी।

आईटी क्षेत्र में सुधार की वजह विश्लेषक रुपये में गिरावट को बताते हैं, जिससे टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इससे भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियों मसलन आईबीएम, एक्सेंचर, एचपी व कैप जेमिनी से मुकाबला भी कर पाएगी, इनमें से ज्यादातर कंपनियां अपने राजस्व का लेखाजोखा डॉलर में रखती हैं। आनंद राठी फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (इक्विटी सेल्स) व वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवांग मेहता ने कहा, अब रकम आईटी क्षेत्र की ओर जा रही है क्योंकि यही एकमात्र क्षेत्र है जो निवेशकों को मजबूत बढ़त दिला सकता है।

रुपये में गिरावट ने दवा कंपनियों को भी बाजार में अपना भारांक बढ़ाने में मदद की है। पिछले एक साल में बीएसई500 कंपनियों में दवा निर्माताओं की हिस्सेदारी 150 आधार अंक बढ़कर अगस्त के आखिर तक 8.1 फीसदी पर पहुंच गई है।

निर्यात में भागीदारी करने वाले क्षेत्रों की बढ़ती हिस्सेदारी से उम्मीद जगी है कि बाजार का निचला स्तर शायद करीब है। आईटी व दवा क्षेत्र ऐसे समय में कंपनियों की आय को समर्थन दे रहे हैं जब दूसरे क्षेत्र या तो स्थिर या लाभ में कमी दर्ज कर सकते हैं।

Keyword: TCS, IT companies, ITES, टीसीएस, सूचना प्रौद्योगिकी, Shares, BSE, NSE, Share Market,
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