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रुपये से मिलेगा बाजार को सहारा
बीएस संवाददाता / मुंबई September 02, 2013

आर्थिक चुनौतियों के बावजूद निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर लोग काफी आशान्वित दिख रहे हैं। रुपये में अवमूल्यन, विदेशी मुद्राभंडार में कमी, बढ़ती महंगाई और राजकोषीय व चालू खाते के घाटे बढऩे से उपजी चिंताओं के बीच लोग इस तूफान के थमने का इंतजार कर रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए नीति निर्माता जैसे ही हरकत में आएंगे वैसे ही शेयर बाजार मेंं उसकी झकल दिखेगी। रुपये के मूल्य में 20 फीसदी गिरावट होने के बाद यह मानना गलत नहीं होगा कि अवमूल्यन कभी भी खत्म हो सकता है। रुपये में स्थिरता आने के साथ ही शेयर बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगेगी।

बीते दिनों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि रुपये में अवमूल्यन थमने के साथ ही शेयर बाजार में न केवल स्थिरता आने लगती है बल्कि उसमें तेजी भी दिखने लगती है। भारत के मौद्रिक इतिहास में पिछले तीन मौकों पर रुपये में 20 फीसदी से अधिक अवमूल्यन दर्ज किए गए हैं। सबसे पहले जुलाई 1995 और फरवरी 1996 के बीच रुपये में 20.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

इस 199 दिनों की अवमूल्यन अवधि के दौरान शेयर बाजार में 4.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। दूसरी बार मार्च 2008 से मार्च 2009 के बीच रुपये में 28.6 फीसदी का अवमूल्यन हुआ और इस दौरान शेयर बाजार में 46.5 फीसदी की गिरावट हुई। तीसरी बार मार्च 2011 से दिसंबर 2011 के बीच रुपये में 19.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इस दौरान शेयर बाजार में 13.3 फीसदी की गिरावट रही।

बहरहाल, इन तीनों घटनाओं में रुपये और शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही मौकों पर रुपये में अवमूल्यन थमने के बाद शेयर बाजार में बढ़त दर्ज की गई। रुपये के अवमूलयन की इन तीनों घटनाओं के एक महीने बाद शेयर बाजार में औसतन 10 फीसदी के सकारात्मक रिटर्न मिले। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अपने एक नोट में कहा है कि चूंकि इस दौरान लोगों का ध्यान रुपये पर रहा और इसलिए रुपये में गिरावट को थामने के लिए सरकार यार आरबीआई द्वारा उठाए गए प्रत्येक कदम से निवेशकों में भरोसा जगा।

ब्रोकरेज ने कहा है, 'ऐतिहासिक तौर पर रुपये में अवमूल्यन थमने पर बाजार में सुधार दिखा है। रुपये में 15 फीसदी से अधिक अवमूल्यन की पिछली तीन घटनाओं के दौरान शेयर बाजार में औसतन 21.5 फीसदी (4.5 फीसदी से 47 फीसदी तक) की गिरावट दर्ज की गई है।Ó लेकिन तीनों घटनाओं में देखा गया है कि अवमूल्यन थमने के बाद शेयर बाजार में तेजी आई और महज तीन महीनों के दौरान अच्छा रिटर्न मिला। इसलिए रुपये में अवमूल्यन के थमने को इंतजार करें।

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